
रोजे के दौरान हमारे शरीर की प्रतिक्रिया कुछ रोचक जानकारियाँ!
पहले दो रोज़ेः
पहले ही दिन ब्लड शुगर लेवल कम होने लगता है, यानी खून में मौजूद शक्कर का असर घट जाता है। दिल की धड़कन धीमी हो जाती है और ब्लड प्रेशर कम हो जाता है। शरीर में जमा ग्लाइकोजन ऊर्जा के रूप में इस्तेमाल होने लगता है, जिससे कमजोरी महसूस होती है।
ज़हरीले पदार्थों की सफाई शुरु होने के कारण सिर दर्द, चक्कर आना, मुंह से बदबू आना और जीभ पर परत जमना महसूस हो सकता है।
तीसरे से सातवें रोज़े तकः
शरीर की चर्बी टूटकर पहले ग्लूकोज़ में बदलने लगती है। कुछ लोगों की त्वचा मुलायम और चमकदार हो जाती है। शरीर भूख का आदी बनने लगता है और पाचन तंत्र को आराम मिलता है। सफेद रक्त कण और रोग प्रतिरोधक शक्ति बढ़ने लगती है। फेफड़ों में हल्की तकलीफ हो सकती है क्योंकि विषैले पदार्थ निकलने लगते हैं।
आंतों और कोलन की मरम्मत शुरु हो जाती है और जमा गंदगी ढीली होने लगती है।
आठवें से पंद्रहवें रोज़े तक:
आप खुद को पहले से अधिक ताकतवर और मानसिक रूप से हल्का महसूस करते हैं। पुरानी चोट या दर्द उभर सकता है क्योंकि शरीर की रक्षा प्रणाली मजबूत हो जाती है। शरीर खराब और कैंसरग्रस्त कोशिकाओं को नष्ट करने लगता है। इस कारण कुछ दर्द बढ़ सकता है। नसों और पैरों में खिंचाव महसूस हो सकता है। रोज़ नमक के पानी से गरारे करना फायदेमंद होता है।
सोलहवें से तीसवें रोज़े तकः
शरीर पूरी तरह भूख और प्यास का आदी हो जाता है। आप खुद को चुस्त और सक्रिय महसूस करते हैं। जीभ साफ और लालिमा लिए होती है, सांस ताज़ा हो जाती है। शरीर से ज़हरीले तत्व निकल चुके होते हैं। पाचन तंत्र ठीक हो जाता है। अतिरिक्त चर्बी और गंदगी बाहर निकल जाती है।

शरीर पूरी ताकत से काम करने लगता है। बीस रोज़ों के बाद दिमाग तेज़ हो जाता है, याददाश्त और एकाग्रता बढ़ जाती है।
निस्संदेह, शरीर और आत्मा तीसरे दशक की बरकतों को पूरी तरह अपनाने लगते हैं।
यह तो दुनिया का लाभ हुआ, जो हमारे ख़ालिक़ ने हमारी भलाई के लिए हमें दिया है। लेकिन उनकी कृपा देखिए कि उनके आदेश मानने से हमारी दुनिया के साथ-साथ हमारी आख़िरत भी संवर जाती है।
सुब्हान अल्लाह व बिहम्दिही, सुब्हान अल्लाह अल-अज़ीम