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वक़्फ़ क़ानून प्रावधानों पर जारी हो सकता है स्टे ऑर्डर!

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वक़्फ़ क़ानून प्रावधानों पर जारी हो सकता है स्टे ऑर्डर!

 

इंडिया Live: वक़्फ़ संशोधन क़ानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को भी सुनवाई जारी रहेगी. बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने दस याचिकाओं पर सुनवाई की थी.सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार के अपने फैसले में संकेत दिया था कि वो इस क़ानून के कुछ प्रावधानों पर स्टे जारी कर सकता है. गुरुवार को कोर्ट इस मामले में कोई अंतरिम आदेश जारी कर सकता हैबुधवार को मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव खन्ना की पीठ ने इस मामले में कई टिप्पणियां की थीं और कहा था कि इस पर गुरुवार को फिर सुनवाई होगी.बुधवार की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा था क्या वो हिंदू समुदाय के धार्मिक ट्रस्ट में मुसलमान या ग़ैर हिंदू को जगह देने पर विचार कर रही है. हालांकि केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने निवेदन किया कि इस मामले में कोई भी आदेश जारी करने से पहले उनको भी सुन लिया जाए.

मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना, जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस केवी विश्वनाथन की बेंच वक्फ एक्ट 2025 को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी. इस दौरान, मुख्य न्यायाधीश ने केंद्रीय वक्फ परिषद और राज्य वक्फ बोर्डों में गैर-मुस्लिमों के नामांकन की अनुमति देने वाले संशोधन अधिनियम (धारा 9 और 14) के प्रावधानों पर सवाल उठाया. सीजेआई खन्ना ने सवाल किया कि क्या हिंदू धार्मिक संस्थानों का प्रबंधन करने वाले बोर्डों में मुसलमानों को शामिल किया जा सकता है.

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से सवाल करते हुए मुख्य न्यायाधीश ने पूछा, “क्या आप ये सुझाव दे रहे हैं कि मुसलमानों सहित अल्पसंख्यकों को भी हिंदू धार्मिक संस्थानों का प्रबंधन करने वाले बोर्ड में शामिल किया जाना चाहिए? कृपया इस पर खुलकर बताएं.”

इस पर मामले में केंद्र का प्रतिनिधित्व करते हुए सॉलिसिटर जनरल ने प्रावधानों का हवाला देते हुए कहा कि गैर-मुस्लिम सदस्यों को शामिल करना बहुत ही सीमित है और इन निकायों की मुख्य रूप से मुस्लिम संरचना को प्रभावित नहीं करता है. सिर्फ 2 गैर-मुस्लिमों को ही शामिल किया जा सकता है, जबकि बोर्ड और परिषदों में अभी भी बहुसंख्यक मुस्लिम ही होंगे.

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