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लखनऊ के छात्र सड़कों पर।

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लखनऊ के छात्र सड़कों पर।

Lucknow University Crisis:लखनऊ में यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमिशन (UGC) के नए नियमों को लेकर विरोध तेज हो गया है। लखनऊ विश्वविद्यालय समेत कई कॉलेजों के स्टूडेंट्स सड़क पर उतर आए हैं। LU कैंपस के बाहर जोरदार प्रदर्शन चल रहा है। छात्र यूजीसी एक्ट-2026 के खिलाफ जमकर नारेबाजी कर रहे हैं। यूजीसी रोल बैक के नारे लगा रहे हैं। छात्रों का कहना है कि यह यूजीसी का काला कानून है। जब तक सरकार इसे वापस नहीं लेगी। हम लोग पीछे हटने वाले नहीं है।

आज लखनऊ विश्वविद्यालय के छात्रों ने UGC (विश्वविद्यालय अनुदान आयोग) के नए नियमों के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। छात्रों ने हाथों में तख्तियाँ और पोस्टर लिए और जोर ज़ोर से नारे लगाए। मुख्य नारा था “UGC रोलबैक करो!”। प्रदर्शन में सिर्फ छात्रों तक सीमित नहीं रहे, बल्कि हर जाति और वर्ग के लोग भी शामिल हुए। इसका मकसद UGC के नए नियमों को लेकर अपना विरोध दिखाना था। नए नियम जनवरी 2026 में लागू किए गए हैं, जिनमें कहा गया है कि विश्वविद्यालयों में समानता और निष्पक्षता बढ़ाई जाएगी। UGC का कहना है कि इसका उद्देश्य छात्रों के बीच भेदभाव को खत्म करना और शिक्षा संस्थानों में बेहतर व्यवस्था लाना है।

लेकिन विरोध करने वाले छात्रों और कुछ सामाजिक समूहों का कहना है कि ये नियम वास्तव में छात्रों के लिए भय और तनाव पैदा करेंगे। उनका आरोप है कि नियम लागू होने से कुछ वर्गों को फायदा और कुछ को नुकसान हो सकता है। छात्रों का कहना है कि इससे जाति और वर्ग आधारित भेदभाव बढ़ सकता है। इसी वजह से आज लखनऊ विश्वविद्यालय के गेट नंबर एक के पास दर्जनों छात्रों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में छात्र नेता जतिन शुक्ला, शशि प्रकाश मिश्रा और रिशेंद्र प्रताप सिंह भी शामिल थे। उन्होंने सरकार और UGC से नए नियमों को पूरी तरह वापस लेने की मांग की।

पुलिस भी प्रदर्शन स्थल पर मौजूद रही। उन्होंने छात्रों से बातचीत की और शांति बनाए रखने के लिए सुरक्षा व्यवस्था रखी। छात्रों ने बताया कि अगर उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो आंदोलन और बड़ा होगा। लखनऊ विश्वविद्यालय ही नहीं, दिल्ली और यूपी के अन्य जिलों में भी छात्र UGC के खिलाफ विरोध कर रहे हैं। दिल्ली में UGC मुख्यालय के बाहर छात्रों की भीड़ जमा हुई और उन्होंने नियम वापस लेने की मांग की। इसके अलावा, मेरठ, सहारनपुर, रायबरेली जैसे शहरों में भी छात्र और सामाजिक संगठन विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।

छात्रों का कहना है कि नए नियम केवल कानूनी कागज़ी बातों तक सीमित नहीं हैं। वे सामाजिक माहौल पर भी असर डाल सकते हैं। छात्रों का आरोप है कि नियम लागू होने से विश्वविद्यालय परिसरों में तनाव बढ़ेगा और आपसी मतभेद बढ़ेंगे। कई युवा और छात्र संगठनों ने इसे “काला कानून” कहा है। दूसरी ओर, सरकार और UGC का कहना है कि नियम का मकसद शिक्षा में निष्पक्षता और समान अवसर देना है। उन्होंने कहा कि विरोध को सुनने और समाधान निकालने के लिए बातचीत करने को तैयार हैं।

इस विरोध से यह स्पष्ट होता है कि देशभर के छात्र UGC के नए नियमों को लेकर असंतुष्ट हैं। छात्र चाहते हैं कि नियम रोलबैक किए जाएं, ताकि सभी छात्र बिना किसी भेदभाव के उच्च शिक्षा का लाभ ले सकें। यह मामला अब केवल छात्रों का विरोध नहीं रहा, बल्कि राजनीतिक और सामाजिक बहस का रूप ले चुका है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि सरकार और UGC विरोधकारियों की मांगों पर ध्यान देंगे या नहीं।

कुल मिलाकर, लखनऊ विश्वविद्यालय का यह प्रदर्शन दिखाता है कि UGC के नए नियमों पर छात्रों का विरोध और असंतोष तेज़ हो रहा है। हर जाति और वर्ग के लोग इसमें शामिल हो रहे हैं। छात्र शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग कर रहे हैं, लेकिन अगर सरकार ने जल्द समाधान नहीं किया, तो विरोध और बड़ा हो सकता है। यह मुद्दा अब केवल शिक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक और राजनीतिक बहस का भी हिस्सा बन गया है।

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