
सुप्रीम कोर्ट ने टीचरों के लिए टेट की परीक्षा की अनिवार्य।
हाइलाइट्स
2011 के पहले के शिक्षकों के माथे पर TET बनी चिंता की लकीर।
शिक्षक संगोष्ठी के दौरान ब्लाक कार्यकारिणी का हुआ गठन।
(सिटीजन वॉयस: उन्नाव रिपोर्टर: सुशील यादव)
उन्नाव:फतेहपुर 84 के ब्लॉक संसाधन केंद्र हफीजाबाद में एक शिक्षक संगोष्ठी का आयोजन किया गया।जिसमें प्राथमिक शिक्षक संघ के जिला अध्यक्ष बृजेश पाण्डेय नें संगोष्ठी में आए सभी शिक्षकों को सर्वोच्च न्यायालय द्वारा एक सितम्बर को जारी किए गये टेट की अनिवार्यता के आदेश को ग़लत ठहराया।उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूलों में कई सालों से पढा रहे शिक्षक और शिक्षिकाओं की नौकरी अब खतरे में है। जिससे उत्तर प्रदेश में करीब डेढ़ लाख से अधिक शिक्षक इस आदेश से प्रभावित होंगे।तत्पश्चात शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष द्वारा शिक्षक संघ की कार्यकारिणी का गठन किया गया।जिसमें रज्जू प्रसाद को प्राथमिक शिक्षक संघ का ब्लाक अध्यक्ष मनोनीत किया गया।
सुप्रीम कोर्ट द्वारा एक सितंबर को दिए गए एक फैसले से कि अब हर शिक्षक और शिक्षिकाओं को टेट की परीक्षा क्वालीफाई करना अनिवार्य होगा।यदि ऐसा नहीं हो पाता है तो उन्हें अपनी नौकरी से त्यागपत्र देना होगा या उन्हें जबरन ही सेवा से हटा दिया जायेगा।
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से लाखों शिक्षक एवं शिक्षिकाओं का जीवन समाप्त कर दिये जैसा निर्णय है।अब सवाल यह है कि जो सालों से शिक्षक विद्यालयों में पढ़ा रहे हैं उन विद्यालयों से निकलने वाले छात्र आज खुद सिविल सर्विसेज के माध्यम से देश की सेवा कर रहे हैं।और उन्हीं शिक्षकों की सेवा पर आज प्रश्न चिन्ह लग रहा है।लेकिन सरकार अब चाहती है कि खुद शिक्षक ही अपनी पात्रता परीक्षा को देकर अपनी पात्रता बचाएं।लेकिन सोचने वाली बात यह होगी कि अगर किसी के घर में शिक्षक की उम्र 50 वर्ष है और वह खुद ही एक घर का गार्जियन है उसकी सेवा के 10 साल शेष बचे हैं तो क्या यह संभव है कि वह अपनी सारी जिम्मेदारियां को निभाते हुए इस पात्रता परीक्षा को पास कर पाएगा?
मेरे यह बिल्कुल समझ से परे है कि सरकार सरकारी विद्यालयों में पढ़ाने वाले शिक्षक एवं शिक्षिकाओं के ऊपर नित्य नए प्रयोग करती चली आ रही है। चाहे वह बीएलओ ड्यूटी हो जनगणना ड्यूटी हो इलेक्शन ड्यूटी हो या फिर विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में लगने वाली ड्यूटी ही क्यों न हो?
इन सब परिस्थितियों से उबर के बाद शिक्षक एवं शिक्षिकाएं अपनी तैयारी करेंगे या सरकार द्वारा जारी नेट नए फरमानों का आदान-प्रदान करेंगे। कितनी जिम्मेदारियां के साथ वह इस एग्जाम को टारगेट करेगी अगर एक्जाम क्रैक नहीं हो पता,तो आपके द्वारा 2 साल के अंदर पास कीजिए वरना घर बैठिए।
क्या आपने सोचा है कि इन शिक्षकों को भी अपनी बेटियों की शादी करनी होगी या अपने घरों का लोन चुकाना होगा?क्या आपने सोचा है कि इन सब जिम्मेदारियां से एक मां-बाप कैसे निकल सकता है।
उत्तर प्रदेश में ही अभी हाल ही में एक सरकारी टीचर द्वारा टेट की अनिवार्यता से तनावग्रस्त होकर फांसी लगाकर आत्म हत्या कर ली थी।