
नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को एक बड़ा फैसला सुनाया है, यह फैसला दिल्ली-एनसीआर में हजारों झुग्गी झोपड़ियों से जुड़ा हुआ है। दरअसल सुप्रीम कोर्ट की ओर से इन झुग्गी झोपड़ियों को हटाने का आदेश दिया गया है। बताया जा रहा है कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि दिल्ली-एनसीआर में 140 किलोमीटर लंबी रेल पटरियों के आसपास बनी लगभग 48000 झुग्गियां हटाई जाएं
इसके साथ ही कोर्ट ने यह निर्देश भी दिया है कि कोई भी अदालत झुग्गी झोपड़ियों को हटाने के फैसले पर स्टे नहीं देगी। इस मामले को लेकर जस्टिस अरुण मिश्रा की अध्यक्षता वाली बेंच ने फैसला सुनाया है। फैसले के तहत 31 अगस्त को दिए गए एक आदेश का हवाला देते हुए कहा गया, ‘अगर कोई अतिक्रमण के संबंध में कोई अंतरिम आदेश दाय जाता है, जो रेलवे पटरियों के पास किया गया है, तो यह प्रभावी नहीं होगा’
आदेश में यह भी कहा गया है कि ये झुग्गी बस्ती हटाने के लिए चरणबद्ध तरीके से काम किया जाए। रेलवे सुरक्षा जोन में सबसे पहले अतिक्रमण हटाया जाए। जो कि तीन महीने में पूरा कर दिया जाए। गौरतलब हो कि इस मामले में साल 2018 में भी दिल्ली हाईकोर्ट ने रेलवे ट्रैक के किनारे सेफ्टी जोन से झुग्गियों को हटाने का आदेश जारी किया था
विरोध में उतरे थे राजनीतिक दल
हालांकि उस दौरान कोर्ट के फैसले के खिलाफ सभी राजनीतिक दल मैदान में उतर आए थे। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट में इस मामले को लेकर याचिका दाखिल की गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने ये आदेश एमसी मेहता मामले में दिया है। जिसमें सुप्रीम कोर्ट साल 1985 के बाद से दिल्ली और उसके पास प्रदूषण से संबंधित मुद्दों पर समय समय पर आदेश जारी करता रहता है
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी कहा है कि दिल्ली सरकार, रेलवे और संबंधित नगर निगमों के सभी हितधारकों की बैठक की जाए। दिल्ली शहरी आश्रय सुधार ट्रस्ट की बैठक अगले सप्ताह बुलाई जाए और काम शुरू किया जाए। अपेक्षित राशि का 70 फीसदी रेलवे वहन करेगी और बाकी का 30 फीसदी राज्य सरकार द्वारा वहन किया जाएगा