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no debate

सिस्टम का खेल न पेशी न मुकदमा न जिरह न बहस बस जेल ही जेल

चंदौली। अचानक 22 वर्षो से मरा हुआ ब्यक्ति जी उठा। जैसे ही उसके जिवीत होने का अहसास लोगो को हुआ तो उनके खुशी का ठिकाना ही नही रहा। और सिस्टम का दोष यह कि जिस जुर्म में मात्र तीन या चार वर्षो की सजा होती है उस जुर्म में विना ट्रायल के 22 वर्ष…
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