
लखनऊ : सपा के वरिष्ठ नेता आजम खां की जमानत अर्जी 27 जनवरी को एमपी-एमएलए कोर्ट के विशेष अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अम्बरीष कुमार श्रीवास्तव ने खारिज कर दी थी। उन्होंने कहा था कि आरोपी ने ऐसे तथ्यों को प्रकाशित किया, जो लोकभय उत्पन्न करते हैं। इससे कोई व्यक्ति या समुदाय लोक शांति को भंग करने के लिए उत्प्रेरित हो सकता है। ऐसी स्थिति में जमानत पर रिहा किए जाने का कोई औचित्य नहीं है। जबकि बचाव पक्ष की ओर से कहा गया था कि आजम खां काफी समय से जेल में हैं। उनके खिलाफ लगाया गया आरोप मजिस्ट्रेट न्यायालय द्वारा परीक्षणनीय है।
पत्रावली के अनुसार आजम खां के खिलाफ इस मामले की रिपोर्ट हजरतगंज थाने में 1 फरवरी, 2019 वादी अल्लामा जमीर नकवी ने दर्ज कराई थी। इसमें कहा गया है कि घटना 2014 से संबंधित है। मगर, सरकार के प्रभाव के चलते उसकी रिपोर्ट दर्ज नहीं की जा रही है। अपनी शिकायत सदस्य राज्य अल्पसंख्यक आयोग को भेज कर आरोप लगाया है कि आजम सरकारी लेटरहेड और सरकारी मोहर का दुरुपयोग करके भाजपा, आरएसएस एवं मौलाना सैयद कल्बे जव्वाद नकवी को बदनाम कर राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर छवि धूमिल करके प्रतिष्ठा को घोर आघात पहुंचा रहे हैं।