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यूक्रेन से छात्र के लौटने से परिवार में छा गई खुशियां

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अम्बेडकरनगर : यूक्रेन में पढ़ाई कर रहे छात्र की घर पर सकुशल वापसी होने से परिजनों में खुशी की लहर व्याप्त है। जलालपुर नगर के जफराबाद निवासी मसील जाफर यूक्रेन के युवानो फ़्रैंकिस्क नेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहा था। रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध होने के कारण जलालपुर के कई छात्र यूक्रेन में फस गये थे। इस युद्ध के कारण पढ़ाई कर रहे छात्रों को बीच में ही अपनी-अपनी पढ़ाई छोड़कर अपने वतन को वापस आना पड़ा।

इन्हीं छात्रों में जाफराबाद निवासी मसील जाफर ने आप बीती बताते हुए बताया कि हम लोग युद्ध प्रभावित क्षेत्र युवानो फ़्रैंकिस्क में रह कर अपनी पढ़ाई करते थे। जब दोनों देशों के बीच युद्ध शुरू हुआ तब शहर से 800 कि0मी0 की दूरी पहली मिसाइल गिरी। इस स्थिति में हम लोगों को हॉस्टल को छोड़कर बंकर में आकर शरण लेना पड़ा। युद्ध के खतरों को देखते हुए सबसे पहले हम लोगों ने खाने पीने के सामान को इकठ्ठा करना शुरू किया जहाँ पर लंबी-लंबी लाइन लग जाया करती थी और आर्थिक समस्याओं से बचने के लिए पैसे एटीएम में पैसे न होने के कारण काफी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा था। वहां की सरकार का आदेश था कि रात 11ः00 बजे से सुबह दिन हो जाने तक लाइट को न जलाया जाए।

उस विपरीत परिस्थिति में हम लोग जूता, कपड़ा, जैकेट पहन कर ही सोते थे ताकि अगर कही पर भी निकलने की व्यवस्था हो जाय तो तुरंत निकल सके। बताया कि 25-02-2022 को हम लोग रोमानिया बॉर्डर के लिए निकले लेकिन रास्ते में काफी जाम हो जाने के कारण रोमानिया से 12 किलोमीटर पहले ही रुकना पड़ा जहाँ से हम लोगों को पैदल दूतावास जाना पड़ा। जहां पर दूतावास द्वारा 2500 लोगों की लिस्ट बनाई गई और 26 तारीख को 1 बजे पहुँचे 3 बजे लाइन में लगे 27 तारीख को शाम को 06ः30 बजे बार्डर को पार किया जो बीते बुधवार को दिन में घर पहुंचा घर पहुचते ही परिवार में उजाला फैल गया इन सभी लोगों में बड़ी संख्या में लड़कियाँ भी शामिल थी।

इन मुश्किल घड़ी में पहले लड़कियों को निकालने के लिए प्राथमिकता दी गई जिससे सकुशल वापस अपने घर पहुँच सके। रोमानिया में पहुंचे वहां पर हम सभी लोगों का रोमानिया के लोगों और वहां पर रह रहे भारतीयों का विशेष सहयोग मिला। हमारे खाने पीने रहने की अच्छा प्रबंध किया गया था और हमें हमारे देश भेजने के लिए जो भी व्यवस्था होनी चाहिए थी वह सभी व्यवस्था वहां रह रहे लोग और वहां रह रहे भारतीयों ने किया। आगे उन्होंने अपने डिग्री की चिंता को व्यक्त करते हुए बताया कि हमारा अंतिम साल की पढ़ाई बाकी है और इसी समय युद्ध छिड़ गया जिससे हमारी पढ़ाई अधूरी रह गई है।

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