
मिशन कर्मयोगी और विकसित भारत 2047 के दृष्टिकोण से दीन दयाल उपाध्याय ग्राम्य विकास संस्थान में प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन
मिशन कर्मयोगी और विकसित भारत 2047 के दृष्टिकोण से दीन दयाल उपाध्याय ग्राम्य विकास संस्थान में प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन
लखनऊ: उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के नेतृत्व और निर्देशन में दीन दयाल उपाध्याय ग्राम्य विकास संस्थान, बख्शी का तालाब, लखनऊ में विभिन्न सरकारी एवं अर्धसरकारी विभागों, संस्थानों के अधिकारियों, कर्मचारियों और रचनात्मक कार्यों से जुड़े लोगों को अधिक दक्ष व सक्षम बनाने के उद्देश्य से विविध प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।संस्थान के महानिदेशक एल. वेंकटेश्वर लू की अध्यक्षता और अपर निदेशक सुबोध दीक्षित के मार्गदर्शन में 27 से 31 अक्टूबर, 2025 तक कई प्रशिक्षण सत्रों का आयोजन किया गया। इनमें ग्रामीण आजीविका मिशन कार्यक्रम के अंतर्गत 150 प्रतिभागियों के लिए ‘लोकोस ट्रांजैक्शन’ और ‘एसबीसीसी’ विषयक प्रशिक्षण, ग्राम विकास विभाग के कार्मिकों के लिए ‘मद्य निषेध’ और ‘जेंडर इश्यूज’ पर प्रशिक्षण कार्यक्रम, तथा क्षेत्रीय/जिला ग्राम्य विकास संस्थानों के अधिकारियों के लिए ‘ट्रेनर्स ओरिएंटेशन प्रोग्राम’ शामिल रहे।बुधवार को आयोजित समापन एवं उद्घाटन समारोह में मिशन कर्मयोगी और विकसित भारत 2047 के परिप्रेक्ष्य में संस्थान के महानिदेशक एल. वेंकटेश्वर लू की अध्यक्षता में विशिष्ट अतिथि वक्ता डॉ. किशन वीर सिंह शाक्य (प्रख्यात शिक्षाविद एवं पूर्व वरिष्ठ सदस्य, उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग), डॉ. ललित मोहन जोशी (पूर्व अपर निदेशक संस्थान एवं मास्टर ट्रेनर, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग, भारत सरकार) और राज्य मद्य निषेध अधिकारी आर. एल. राजवंशी की गरिमामयी उपस्थिति रही।
इस अवसर पर वक्ताओं ने विभिन्न विषयों पर सारगर्भित व्याख्यान दिए। डॉ. ललित मोहन जोशी ने बुद्धा सभागार में उपस्थित लगभग 250 प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि मिशन कर्मयोगी की भावना वही है जो श्रीमद्भगवद्गीता में भगवान कृष्ण ने अर्जुन को दी थी — अपने कर्म को निष्ठा, ईमानदारी और समर्पण से करना ही सच्चा कर्मयोग है। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रशिक्षण कार्यक्रम में वक्ता और प्रशिक्षक को स्वयं आदर्श का उदाहरण बनना चाहिए, तभी नेतृत्व और व्यक्तित्व विकास संभव है।डॉ. किशन वीर सिंह शाक्य ने प्रतिभागियों से कहा कि प्रशिक्षण के दौरान शिक्षा, सूचना और संचार के घटकों को समझना अनिवार्य है। मिशन कर्मयोगी और विकसित भारत 2047 के दृष्टिकोण से प्रशिक्षण तभी सार्थक होगा जब इन मूलभूत तत्वों पर समेकित चर्चा और व्यवहारिक क्रियान्वयन हो।कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए महानिदेशक एल. वेंकटेश्वर लू ने कहा कि “सर्वोत्तम पथ वही है, जहां व्यक्ति अपने पद और स्थान पर रहते हुए पूर्ण निष्ठा और लगन से कार्य कर जनकल्याण में अपनी सार्थक भूमिका निभाए।”राज्य मद्य निषेध अधिकारी आर. एल. राजवंशी ने युवाओं में बढ़ती नशे की प्रवृत्ति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि समाज के हर वर्ग को इस विषय में जागरूक होकर सकारात्मक भूमिका निभानी चाहिए।कार्यक्रम का संचालन डॉ. नवीन कुमार सिन्हा ने किया। अंत में सहायक निदेशक डॉ. राज किशोर यादव ने सभी विशिष्ट अतिथियों, वक्ताओं, अधिकारियों, प्रतिभागियों और आयोजन से जुड़े सभी सहयोगियों का आभार व्यक्त किया।इन प्रशिक्षण कार्यक्रमों के सफल आयोजन में उपनिदेशक आर. के. मल्ल, डॉ. नीरजा गुप्ता, सरिता गुप्ता, सहायक निदेशक डॉ. सत्येंद्र कुमार गुप्ता, डॉ. गरिमा सिंह, डॉ. सीमा राठौर, राजीव कुमार दूबे, विनीता रावत, धर्मेंद्र कुमार सुमन, मोहित यादव, तथा तकनीकी सहयोग में उपेंद्र कुमार दूबे, मोहम्मद शहंशाह और मोहम्मद शाहरुख का योगदान विशेष रूप से उल्लेखनीय रहा।
