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अकेले पड़े ट्रम्प- युद्ध खत्म होगा?

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अकेले पड़े ट्रम्प- युद्ध खत्म होगा?

IRAN-US, ISRAEL WAR:मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव के बीच ईरान के बड़े नेता Ali Larijani का बयान काफी चर्चा में है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि मौजूदा हालात को अगर ध्यान से देखा जाए तो ईरान कमजोर नहीं बल्कि पहले से ज्यादा मजबूत होकर सामने आया है। लारिजानी का मानना है कि अमेरिका, खासकर Donald Trump की नीतियों के बाद, अब पहले जितना प्रभावी नहीं दिख रहा और कई मामलों में वह अकेला पड़ता नजर आ रहा है। उन्होंने कहा कि दबाव, प्रतिबंध और धमकियों के बावजूद ईरान ने खुद को संभाला है और यही उसकी सबसे बड़ी ताकत है।

लारिजानी ने अपने बयान में मुस्लिम देशों को भी खुलकर कुछ अहम बातें समझाने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि सबसे बड़ी कमजोरी आपसी लड़ाई और बंटवारा है। अगर मुस्लिम देश आपस में ही बंटे रहेंगे, तो बाहर की ताकतें हमेशा फायदा उठाएंगी। इसलिए सबसे पहले एकता जरूरी है। उन्होंने समझाया कि चाहे राजनीतिक मतभेद हों या विचार अलग हों, लेकिन बड़े मुद्दों पर सबको साथ आना होगा।
दूसरी बड़ी बात उन्होंने अर्थव्यवस्था को लेकर कही। लारिजानी ने कहा कि जब तक देश आर्थिक रूप से मजबूत नहीं होंगे, तब तक वे बाहरी दबाव से नहीं बच सकते। उन्होंने इशारा किया कि कई देशों पर प्रतिबंध इसलिए असर करते हैं क्योंकि वे दूसरे देशों पर ज्यादा निर्भर होते हैं। अगर खुद की इंडस्ट्री, व्यापार और संसाधन मजबूत होंगे, तो कोई भी देश आसानी से झुका नहीं पाएगा।
तीसरी बात उन्होंने सुरक्षा और तकनीक को लेकर कही। उनके अनुसार आज के समय में सिर्फ सेना होना काफी नहीं है, बल्कि आधुनिक तकनीक, मिसाइल सिस्टम, साइबर क्षमता और खुफिया ताकत भी उतनी ही जरूरी है। उन्होंने कहा कि जो देश इन क्षेत्रों में पीछे रहेंगे, वे हमेशा खतरे में रहेंगे।

लारिजानी ने मीडिया की ताकत पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि आज की दुनिया में लड़ाई सिर्फ हथियारों से नहीं, बल्कि खबरों और सोच से भी लड़ी जाती है। अगर आप अपनी बात सही तरीके से दुनिया तक नहीं पहुंचा पाएंगे, तो आपकी छवि गलत तरीके से पेश की जा सकती है। इसलिए मुस्लिम देशों को अपना मजबूत मीडिया नैरेटिव तैयार करना चाहिए और सच को सामने लाना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि मुस्लिम देशों को आपस में व्यापार, ऊर्जा और सुरक्षा के मामलों में सहयोग बढ़ाना चाहिए। अगर ये देश मिलकर काम करें, तो एक मजबूत समूह बन सकता है, जो दुनिया की बड़ी ताकतों के सामने मजबूती से खड़ा हो सके।
लारिजानी के इस पूरे बयान का मतलब साफ है कि वह यह दिखाना चाहते हैं कि मौजूदा हालात में ईरान दबाव में नहीं आया, बल्कि उसने हालात का सामना किया और खुद को मजबूत बनाया। साथ ही, उन्होंने बाकी मुस्लिम देशों को यह संदेश देने की कोशिश की है कि अगर वे एकजुट नहीं हुए, तो उन्हें भी ऐसे ही दबावों का सामना करना पड़ सकता है।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या आने वाले समय में यह तनाव कम होगा या और बढ़ेगा। क्या सच में अमेरिका इस मामले में कमजोर पड़ रहा है या यह सिर्फ राजनीतिक बयानबाजी है—इस पर बहस जारी है। लेकिन इतना जरूर है कि इस बयान ने मिडिल ईस्ट की राजनीति में हलचल जरूर बढ़ा दी है और आने वाले दिनों में इसके असर और साफ नजर आ सकते हैं।

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