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ट्रंप का मुस्लिम डर, मुस्लिम से इतनी नफ़रत!

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ट्रंप का मुस्लिम डर, मुस्लिम से इतनी नफ़रत!

ZOHRAN MAMDANI vs TRUMP: अमेरिका में इस वक़्त सियासत गरम है, और उसकी सबसे बड़ी वजह बन गए हैं न्यूयॉर्क से मेयर पद के उम्मीदवार जोहरान ममदानी। जोहरान एक मुसलमान हैं, भारतीय मूल के हैं, और अमेरिका में रह रहे गरीब, प्रवासी और अल्पसंख्यक तबकों की आवाज़ उठाते हैं। लेकिन डोनाल्ड ट्रंप को ये बात रास नहीं आ रही है।

 

ट्रंप ने हाल ही में एक रैली में जोहरान ममदानी पर सीधा हमला बोला और न सिर्फ उन्हें “कम्युनिस्ट” और “देशद्रोही” बताया, बल्कि धमकी तक दे डाली कि अगर ममदानी मेयर बनते हैं और उन्होंने इमिग्रेशन कानूनों में दखल दिया तो उन्हें गिरफ़्तार करके देश से निकाल दिया जाएगा।

ट्रंप ने यह भी कहा कि ममदानी के नागरिक होने पर शक है, जबकि यह साफ है कि ज़ोहरन एक कानूनी अमेरिकी नागरिक हैं। उन्होंने यह भी कहा कि ममदानी जैसे नेता अगर सत्ता में आते हैं, तो अमेरिका को नुकसान होगा, क्योंकि वो “रिफ्यूजी एजेंडा” चला रहे हैं और पुलिस तथा ICE (जो अवैध प्रवासियों को रोकने के लिए होती है) के खिलाफ काम कर रहे हैं। जोहरान ममदानी शुरू से ही अमेरिका में प्रवासियों के हक़ में आवाज़ उठाते रहे हैं। वो कहते हैं कि अमेरिका हर इंसान के लिए है – चाहे उसका रंग कोई भी हो, मजहब कोई भी हो, या वो किसी भी देश से आया हो।

जब ट्रंप ने इतनी सख्त और निजी बातें कहीं, तो जोहरान ममदानी ने भी चुप नहीं बैठने का फैसला किया। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि एक राष्ट्रपति अगर एक मुस्लिम नेता को डराने की कोशिश कर रहा है, तो वो सिर्फ़ एक शख्स को नहीं, बल्कि लोकतंत्र को धमका रहा है। उन्होंने कहा कि उन्हें धमकाकर चुप नहीं कराया जा सकता और वो अपने मिशन पर डटे रहेंगे – गरीबों, मजदूरों, मुसलमानों, प्रवासियों और रंगभेद का शिकार लोगों के लिए बोलते रहेंगे।

इस पूरे मामले के बाद न्यूयॉर्क में हलचल मच गई। कई डेमोक्रेटिक नेताओं और मानवाधिकार संगठनों ने ममदानी का खुलकर समर्थन किया और ट्रंप के बयान को “खतरनाक”, “इस्लामोफोबिक” और “तानाशाही मानसिकता” वाला बताया। गवर्नर कैथी होकुल, कांग्रेस लीडर जेफ्रीज़ और कई शहरों के मेयरों ने ममदानी के साथ खड़े होकर कहा कि यह अमेरिका की आत्मा पर हमला है। अमेरिका की ताक़त उसकी विविधता है, न कि नफ़रत।

लोगों का मानना है कि ट्रंप एक खास रणनीति के तहत ऐसा कर रहे हैं – वो चाहते हैं कि ममदानी को मुस्लिम और बाहरी बताकर अपने कट्टर समर्थकों को खुश करें। वो जानते हैं कि ज़ोहरन ममदानी जैसे युवा, ईमानदार और बेबाक नेता अगर चुनाव जीत जाते हैं, तो वो एक नया रास्ता खोल देंगे – जहां हर इंसान को बराबरी मिलेगी, और मजहब या रंग के आधार पर कोई फर्क नहीं होगा।

ममदानी की छवि एक पढ़े-लिखे, मेहनती और ज़मीनी नेता की है। उन्होंने अपनी पढ़ाई अमेरिका में ही की है और समाज सेवा से लेकर स्थानीय राजनीति तक लगातार मेहनत की है। वो अक्सर सड़कों पर लोगों के बीच देखे जाते हैं – चाहे वो किराएदारों की मदद हो या गरीब प्रवासियों की। उनकी बातों में गुस्सा नहीं, उम्मीद होती है – और शायद यही बात ट्रंप को सबसे ज़्यादा चुभ रही है।

यह मामला अब सिर्फ़ एक मुस्लिम नेता का नहीं रहा, बल्कि ये सवाल बन गया है – क्या अमेरिका में अब भी सबको बराबरी का हक है? क्या एक मुसलमान नेता को सिर्फ उसकी पहचान की वजह से निशाना बनाया जाएगा? या क्या लोग नफ़रत की राजनीति को हराकर इंसाफ़ और इंसानियत को जिताएँगे?

आने वाले दिनों में यह मुद्दा और बढ़ेगा। एक तरफ ट्रंप हैं – धमकी और डर की राजनीति के साथ। और दूसरी तरफ जोहरान ममदानी – जो कह रहे हैं कि “हम डरने वाले नहीं हैं। ये मुल्क सबका है – और हम इसे सबके लिए बनाएँगे।”

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