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उत्तर प्रदेश बोर्ड परीक्षा 2021 : कोरोना संक्रमण के कारण बड़ा बदलाव, 70 प्रतिशत कोर्स पर ही होगा बोर्ड एग्जाम

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उत्तर प्रदेश : माध्यमिक शिक्षा परिषद (UP board) की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षा 2021 का कार्यक्रम भले ही जारी नहीं हुआ है लेकिन, यह तय है कि परीक्षा केवल 70 प्रतिशत पाठ्यक्रम पर ही होगी UP बोर्ड की ओर से कई माह पहले ही पाठ्यक्रम कम करके वेबसाइट पर अपलोड किया गया था, उसके बाद चर्चा तेज थी कि पाठ्यक्रम में और कटौती हो सकती है। UP बोर्ड को सचिव दिव्यकांत शुक्ल ने उसे सिरे से खारिज किया है। संकेत है कि जनवरी के पहले पखवारे में परीक्षा की तारीखें घोषित हो सकती हैं, ताकि उसी के अनुरूप परीक्षार्थी तैयारी कर सकें। माध्यमिक शिक्षा परिषद (UP बोर्ड) की ओर से कोविड-19 के संक्रमण को देखते हुए शैक्षिक सत्र 2020-21 के लिए कक्षा-9, 10, 11 व 12 के सभी विषयों के पाठ्यक्रम में 30 प्रतिशत की कटौती की गई थी। वजह, कॉलेज कई माह तक नहीं खुल सके थे UP बोर्ड सचिव दिव्यकांत शुक्ल ने बताया कि पाठ्यक्रम संबंधी विवरण प्रदेश के समस्त विद्यालयों के प्रधानाचार्यों को जिला विद्यालय निरीक्षकों के माध्यम से उपलब्ध कराए जा चुके हैं।

साथ ही संक्षिप्त किया गया पाठ्यक्रम परिषद की वेबसाइट पर भी उपलब्ध है। 2021 की हाईस्कूल व इंटरमीडिएट की परीक्षा 70 प्रतिशत पाठ्यक्रम के आधार पर होगी। यही वजह है कि इस बार यूपी बोर्ड की वेबसाइट पर मॉडल पेपर अपलोड नहीं किए गए हैं कि कहीं कम पाठ्यक्रम से वही प्रश्न कहीं जारी न हो जाएं जो परीक्षा में पूछे जाने हैं। ज्ञात हो कि यूपी बोर्ड हर वर्ष परीक्षा के पहले मॉडल पेपर जारी करता रहा है परीक्षा कार्यक्रम पर सीबीएसई पहल करने जा रहा है, संभव है कि 31 दिसंबर को वह कार्यक्रम जारी कर दें। इसके बाद यूपी बोर्ड भी परीक्षा की तारीखों का ऐलान करने की तैयारी में जुटा है।

बता दें कि उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा ने यूपी बोर्ड परीक्षा-2021 मार्च से अप्रैल के बीच कराने की घोषणा की है। हालांकि परीक्षा कार्यक्रम अभी जारी नहीं हुआ है कोरोना संक्रमण के कारण राजकीय, सहायता प्राप्त और वित्तविहीन स्कूलों में करीब सात महीने पठन-पाठन बंद रहा। 19 अक्तूबर से शिक्षण कार्य शुरू होने के बाद भी कक्षाएं पूर्व की भांति नहीं चल रही हैं विभाग ने जुलाई में परीक्षा का पाठ्यक्रम 30 प्रतिशत कम किया था, लेकिन ऑनलाइन क्लास तक हर बच्चे की पहुंच नहीं होने से एक बार फिर पाठ्यक्रम कम करने की संभावना थी, लेकिन पाठ्यक्रम में और कटौती नहीं होगी

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