
वफ़ा अब्बास ने ईरानी एम्बेसी में अयातुल्लाह सैयद अली खामेनेई की शहादत पर ताज़ियत व पुरसा पेश किया!
इंडिया Live: कभी-कभी इतिहास के कुछ पल ऐसे होते हैं जब शब्द छोटे पड़ जाते हैं और दिल का दर्द आँखों से आँसुओं की शक्ल में बाहर आने लगता है। आज ऐसा ही एक पल था। जब मैं दिल्ली स्थित ईरान कल्चर हाउस पहुँचा, तो माहौल में अजीब सी ख़ामोशी, ग़म और दर्द का एहसास था। दिल में सिर्फ एक ही ख्याल था कि एक ऐसी शख्सियत की याद में यहाँ आया हूँ जिसने पूरी दुनिया के मज़लूमों को हिम्मत, सब्र और इज़्ज़त का पैग़ाम दिया।
अयातुल्लाह सैयद अली खामेनेई की शहादत पर वहाँ जाकर उनके भारत में प्रतिनिधि आयतुल्लाह अब्दुल माजिद हकीम इलाही साहब और मौलाना तकी नकवी साहब से मुलाक़ात की और ताज़ियत व पुरसा पेश किया

इस मुलाक़ात के दौरान शहीद रहबर की महान शख्सियत, उनके हौसले, उनकी रहनुमाई और मज़लूमों के हक़ में बुलंद की गई आवाज़ को याद किया गया। सच यह है कि उन्होंने पूरी दुनिया को यह पैग़ाम दिया कि जुल्म के सामने खामोश रहना नहीं बल्कि हक़ और इंसाफ़ के लिए डटकर खड़ा होना ही असली इम्तिहान है।
ईरान कल्चर हाउस में रखी ताज़ियती किताब (Condolence Book) में भी अपनी तरफ से खिराजे अकीदत पेश की और दुआ की कि परवरदिगार इस अज़ीम रहबर को जन्नतुल फिरदौस में आला मकाम अता फरमाए और ईरान समेत पूरी दुनिया में हक का साथ देने वालो को सब्र व इस्तिक़ामत दे।

आज जब दुनिया के कई हिस्सों में जंग, बमबारी और बेगुनाह इंसानों का खून बह रहा है, ऐसे वक़्त में इंसानियत का तकाज़ा है कि हम मज़लूमों के साथ खड़े हों और इंसाफ़ व अमन की आवाज़ बुलंद करें।
अम्बर फाउंडेशन ,नगराम लखनऊ मोमिनीन की तरफ से हमारी दुआएँ, हमदर्दी और इंसानी एकजुटता का पैग़ाम ईरान और तमाम मज़लूम लोगों के साथ है।