
कमजोर विदेश नीति से राष्ट्रीय सुरक्षा और अर्थव्यवस्था पर संकट: प्रमोद तिवारी
नई दिल्ली, लखनऊ: राज्यसभा में विपक्ष के उपनेता प्रमोद तिवारी ने मोदी सरकार की विदेश नीति को कमजोर बताते हुए कहा है कि इससे देश की राष्ट्रीय सुरक्षा और अर्थव्यवस्था दोनों पर गंभीर खतरे उत्पन्न हो रहे हैं। उन्होंने अमेरिका और चीन के मामलों में सरकार की चुप्पी पर सवाल खड़े किए और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सीधा जवाब मांगा कि वे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के समक्ष राष्ट्रीय हितों के मुद्दों पर मौन क्यों हैं।प्रमोद तिवारी ने कहा कि अमेरिका पहले भारत और पाकिस्तान को व्यापारिक दृष्टि से समान स्तर पर रखकर भारत की वैश्विक साख को धक्का पहुंचा चुका है। अब, एपल के आईफोन निर्माण को लेकर ट्रंप सरकार भारत पर दबाव बना रही है, जिससे न केवल भारत के आर्थिक हित प्रभावित हो रहे हैं बल्कि संभावित रोजगार के अवसर भी खतरे में हैं। उन्होंने कहा कि अगर भारत में एपल का उत्पादन शुरू होता है, तो इससे न सिर्फ रोजगार के अवसर मिलेंगे बल्कि उपभोक्ताओं को सस्ते दर पर फोन भी उपलब्ध हो सकेंगे।तिवारी ने अमेरिकी हस्तक्षेप को “व्यापार की लालच देकर अपमान” करार दिया और कहा कि यह स्पष्ट करना जरूरी है कि कहीं कोई बड़ा व्यापारी हित अमेरिका में उलझा हुआ तो नहीं है, जिसके चलते भारत की नीति दबाव में आ रही है।राज्यसभा सांसद ने प्रधानमंत्री मोदी के पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के घर अचानक पहुंचने की पुरानी घटना को याद करते हुए तंज कसा कि यह किसी से छिपा नहीं है कि प्रधानमंत्री लाहौर जाकर नवाज शरीफ की मां के सामने नतमस्तक हुए थे। उन्होंने कहा कि अब नवाज के भाई शहबाज शरीफ पाकिस्तान के प्रधानमंत्री हैं, लेकिन भारत की नीति में स्पष्टता और दृढ़ता नहीं दिख रही।उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ‘शिमला समझौते’ के विपरीत एकतरफा सीजफायर की घोषणा को भी कठघरे में खड़ा किया और पूछा कि ट्रंप को ऐसा करने का अधिकार कहां से मिला। साथ ही, तिवारी ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर पर भी निशाना साधते हुए कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान जब भारतीय सेना आतंकियों के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई कर रही थी, तो पाकिस्तान को इसकी सूचना देने की क्या आवश्यकता थी? उन्होंने आरोप लगाया कि इस “चूक” से पाकिस्तानी सेना या सरकार को आतंकवादियों को सुरक्षित निकालने का अवसर मिल गया।
हाईकोर्ट की फटकार, स्वास्थ्य सेवाओं पर गंभीर सवाल
राज्यसभा सदस्य तिवारी ने उत्तर प्रदेश के सरकारी अस्पतालों की बदहाल स्थिति को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी को भी सरकार के लिए “कड़ी नसीहत” बताया। उन्होंने कहा कि प्रयागराज के स्वरूपरानी मेडिकल कॉलेज समेत कई सरकारी अस्पतालों में चिकित्सा सेवाओं की स्थिति चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि गरीब और असहाय मरीजों को बेहतर चिकित्सा सुविधा सरकारी अस्पतालों में ही मिले ताकि उन्हें निजी अस्पतालों में जाने की विवशता से राहत मिल सके।उन्होंने यह भी जोड़ा कि सरकारी अस्पतालों को “रेफर सेंटर” नहीं बनने दिया जाना चाहिए, बल्कि इन्हें चिकित्सा मानकों के अनुरूप क्रियाशील और जवाबदेह बनाना चाहिए।
