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पूरे वक्फ कानून पर रोक नहीं क्यों?

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पूरे वक्फ कानून पर रोक नहीं क्यों?

Waqf Bill News: सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में केंद्र सरकार द्वारा पारित वक्फ (संशोधन) अधिनियम 2025 के तीन प्रमुख प्रावधानों पर अस्थायी रोक लगा दी है, लेकिन पूरे कानून पर रोक नहीं लगाई गई है। इन प्रावधानों में सबसे अहम है कि केंद्रीय वक्फ बोर्ड में 4 से अधिक गैर-मुस्लिम सदस्यों को नियुक्त नहीं किया जा सकता

और राज्यों के वक्फ बोर्डों में 3 से अधिक गैर-मुस्लिम सदस्य नहीं हो सकते। यह बदलाव मोदी-शाह सरकार द्वारा लाए गए थे, जिनका उद्देश्य वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में पारदर्शिता और सुधार लाना था। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस प्रावधान को मुस्लिम समुदाय के धार्मिक अधिकारों में अनावश्यक हस्तक्षेप बताते हुए फिलहाल लागू होने से रोक दिया है।

 

 

 

सुप्रीम कोर्ट का मानना है कि ये प्रावधान संविधान के अनुच्छेद 25 और 26 के तहत धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकारों का उल्लंघन कर सकते हैं। इसके साथ ही, कोर्ट ने कहा कि वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में समुदाय की भागीदारी सुनिश्चित होना चाहिए और गैर-मुस्लिमों की अधिक नियुक्ति इस संतुलन को बिगाड़ सकती है। इस मामले की पूरी सुनवाई बाद में होगी, जब कोर्ट विस्तार से इस कानून के संवैधानिक पक्षों पर विचार करेगा।

 

सरकार ने इस कानून को वक्फ संपत्तियों के दुरुपयोग को रोकने और बेहतर प्रशासन के लिए जरूरी बताया था। सरकार का तर्क था कि इस संशोधन से वक्फ बोर्डों में अधिक पारदर्शिता आएगी और भ्रष्टाचार कम होगा। लेकिन विपक्ष और कई मुस्लिम संगठनों ने इस कानून को धार्मिक आज़ादी में दखलंदाजी करार दिया और सुप्रीम कोर्ट से इसे चुनौती दी।

 

इस फैसले के बाद मोदी-शाह सरकार की योजना को बड़ा झटका लगा है क्योंकि कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि तीन विवादास्पद प्रावधान तब तक लागू नहीं होंगे जब तक पूरी सुनवाई पूरी नहीं हो जाती। यह मामला देश में धार्मिक संपत्तियों के प्रबंधन और धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकारों के बीच संतुलन का एक अहम मुद्दा बन गया है, जो आने वाले समय में बड़े कानूनी विवादों का विषय बन सकता है।

 

इस फैसले का मुस्लिम समुदाय और वक्फ बोर्ड पर भी गहरा असर होगा, क्योंकि अब तक जो संशोधन किए गए थे, वे फिलहाल लागू नहीं हो पाएंगे और पारंपरिक प्रबंधन व्यवस्था जारी रहेगी। कोर्ट के इस फैसले को धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

 

इस पूरी स्थिति ने केंद्र सरकार के वक्फ कानून सुधारों की योजना पर सवालिया निशान लगा दिए हैं और इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। आने वाले दिनों में इस मामले की विस्तृत सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट से अंतिम फैसला आने की उम्मीद है, जो वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन के भविष्य और धार्मिक अधिकारों के संरक्षण में निर्णायक साबित होगा।

पूरे वक्फ कानून पर रोक इसलिए नहीं लगी क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने केवल उन तीन बदलावों (प्रावधानों) को चुनौती के तहत अस्थायी रूप से रोक लगाई है जो विवादास्पद माने गए हैं। बाकी कानून के अन्य हिस्से अभी तक सुप्रीम कोर्ट के संज्ञान में विवादास्पद नहीं पाए गए या उनका कानून के तहत लागू होना न्यायालय ने ठीक माना है।

 

कोर्ट का मानना है कि पूरा कानून रोकना एक बड़ा कदम होता, जो बिना पूरी जांच और सुनवाई के न्यायसंगत नहीं होगा। इसलिए कोर्ट ने संवैधानिक और धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़े खास मुद्दों पर ही स्टे लगाया है, ताकि वे पहले जांच कर सकें कि ये प्रावधान संविधान के खिलाफ तो नहीं हैं। बाकी कानून के प्रावधान फिलहाल लागू रहेंगे जब तक पूरी सुनवाई नहीं हो जाती।

 

इस तरह कोर्ट ने मामले को संतुलित तरीके से देखा है — विवादास्पद हिस्सों को रोका, बाकी लागू रखा — ताकि समुदायों के धार्मिक अधिकारों और प्रशासनिक सुधारों के बीच न्यायसंगत संतुलन बना रहे।

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