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वक्फ कानून को कूड़ेदान में फेंक देंगे; तेजस्वी यादव

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वक्फ कानून को कूड़ेदान में फेंक देंगे; तेजस्वी यादव

बिहार: बिहार की सियासत में इस वक्त एक बयान ने नया भूचाल ला दिया है। राजद नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने कहा है कि “वक्फ कानून को कूड़ेदान में फेंक देंगे।” उनका यह बयान पटना में अल्पसंख्यक समुदाय के एक कार्यक्रम के दौरान आया, जहाँ उन्होंने कहा कि मौजूदा वक्फ कानून गरीबों और अल्पसंख्यकों के हित में नहीं है। तेजस्वी यादव ने कहा कि आज वक्फ की ज़मीनों पर गरीब मुसलमानों को कोई हक नहीं मिलता, जबकि नेता और अफसर इसका फायदा उठा रहे हैं। उन्होंने वादा किया कि अगर उनकी सरकार बनी, तो वक्फ कानून को खत्म कर एक नया कानून लाया जाएगा, जिसमें जनता का हक सुरक्षित रहेगा।
तेजस्वी के इस बयान पर बीजेपी और जेडीयू ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। बीजेपी प्रवक्ता ने कहा कि तेजस्वी यादव वोट बैंक की राजनीति कर रहे हैं और उन्हें संविधान की मर्यादा का ध्यान रखना चाहिए। जेडीयू ने इसे गैर-जिम्मेदाराना बयान बताया। वहीं राजद प्रवक्ता ने सफाई दी कि तेजस्वी यादव का मतलब कानून को खत्म करने से नहीं था, बल्कि उसमें जरूरी बदलाव की बात उन्होंने कही थी। सोशल मीडिया पर भी इस बयान को लेकर जबरदस्त बहस छिड़ गई है — कुछ लोग इसे साहसिक बयान बता रहे हैं, तो कुछ इसे सस्ती राजनीति।
दरअसल, वक्फ एक्ट 1995 के तहत मुस्लिम समुदाय की धार्मिक, सामाजिक और शैक्षणिक संस्थाओं की संपत्तियों का प्रबंधन किया जाता है। वक्फ बोर्ड इन संपत्तियों की देखरेख करता है, लेकिन लंबे समय से इस कानून में भ्रष्टाचार, कब्जे और राजनीतिक दखल के आरोप लगते रहे हैं। इसी पृष्ठभूमि में तेजस्वी यादव का यह बयान आया है।

लोगों की राय भी इस मुद्दे पर बंटी हुई है। कुछ का कहना है कि तेजस्वी यादव ने सही मुद्दा उठाया है और वक्फ की जमीनें गरीबों के काम आनी चाहिए, जबकि कुछ का कहना है कि कानून को “कूड़ेदान में फेंकने” जैसी भाषा उचित नहीं है। कानूनी विशेषज्ञों का भी मानना है कि वक्फ कानून में सुधार की गुंजाइश है, लेकिन उसे खत्म करने की बात करना गलत है। उनका कहना है कि अगर कोई कानून जनता के हित में नहीं है, तो संसद में संशोधन का रास्ता है, न कि उसे खत्म करने का।
राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि तेजस्वी यादव का यह बयान आगामी चुनावों से पहले अल्पसंख्यक वोटरों को साधने की रणनीति का हिस्सा हो सकता है। कुल मिलाकर, तेजस्वी का यह बयान बिहार की राजनीति में नई गर्मी लेकर आया है। अब देखना होगा कि वे अपने बयान पर कायम रहते हैं या विपक्ष के दबाव में सफाई देते हैं।

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