
अवैध मोबाइल सिग्नल बूस्टर कॉल ड्रॉप्स की बढ़ती घटनाओं और कम डेटा गति का कारण इस प्रकार क्षेत्र में बड़ी संख्या में ग्राहकों के लिए खराब टेलीकाॅम सेवा और अनुभव का बड़ा कारण बनते हैं
मथुरा, 25 नवंबर, 2020: डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकॉम (डीओटी) वायरलेस मॉनिटरिंग ऑर्गनाइजेशन के निदेशक श्री आर के सक्सेना के निर्देशानुसार वायरलेस मॉनिटरिंग ऑर्गनाइजेशन, डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकॉम (डीओटी) ने स्थानीय प्रशासन और मोबाइल ऑपरेटरों की संयुक्त टीम ने मथुरा में कई स्थानों पर छापे मारे। यह छापा घरों, दुकानों और अन्य वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों में स्थापित अवैध मोबाइल सिग्नल रिपीटर्स को हटाने और इन्हें स्थापित करने वाले व्यक्तियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई को अंजाम करने के लिए मारा गया था। संयुक्त टीम ने चैक बाजार, कच्ची सड़क, बारापुरा, गोविंदनगर, सुनारवाली गली, वृंदावन द्वार, मंडी रामदास गली, गोविन्द नगर चैक आदि स्थानों में छापे मारे, इन स्थानों से कुल 40 अवैध रिपीटर हटाए गए और 26 लोगों को नोटिस दिए गए।
अवैध तरीके से इंस्टाल किए गए रिपीटर्स के खिलाफ संयुक्त टीम द्वारा चलाए जा रहे अभियान के बारे में बताते हुए श्री जीके रेड्डी, चीफ इंजीनियर, वायरलेस मॉनिटरिंग ऑर्गनाइजेशन, डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकॉम (डीओटी) ने कहा, “अवैध मोबाइल सिग्नल बूस्टर के खिलाफ हमारी ड्राइव निरंतर चलने वाला अभियान है अकेले इस वर्ष में, हमने 400 से अधिक ऐसे उपकरणों को हटा दिया है और हमारा अभियान आगेआने वाले दिनों में भी जारी रहेगा। जिस प्रकार बूस्टर पंपों का उपयोग मुख्य जल आपूर्ति लाइन से अवैध रूप से पानी चूसने के लिए किया जाता है, जिससे अन्य नागरिकों को मिलने वाली जलापूर्ति बाधित होती है,ठीक उसी प्रकार अवैध रूप से लगाए गए सिग्नल रिपीटर्स या बूस्टर अन्य नागरिकों के लिए सिग्नल की कमी और कॉल ड्राप की समस्या पैदा करते हैं। इसलिए, हम लोगों को किसी भी अवैध रिपीटर्स का उपयोग न करने की सलाह देते हैं क्योंकि इससे मोबाइल नेटवर्क में भारी व्यवधान उत्पन्न हो रहा है।“
उन्होंने आगे कहा कि टेलीकॉम उद्योग ने हाल ही में इस मुद्दे पर जागरूकता फैलाने के लिए स्थानीय अखबारों में एक सार्वजनिक नोटिस प्रकाशित करवाया था। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स से ऐसे अवैध रिपीटर्स की सूची को हटाने के लिए नोटिस जारी किए गए हैं और ऐसी कंपनियों ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है। टेलीकॉम के वायरलैस मॉनिटरिंग ऑर्गनाइजेशन के अनुसार, भारतीय वायरलेस टेलीग्राफी अधिनियम, 1933 और भारतीय टेलीग्राफ अधिनियम, 1885 के अनुसार अवैध रिपीटर की स्थापना, सिग्नल में बाधा पहुंचाना या बिक्री दंडनीय अपराध है। जिन परिसरों में यह अवैध रिपीटर्स स्थपित किए गए हैं, उनके मालिकों पर भारी जुर्माना लगाया जा सकता है ।
अवैध मोबाइल सिग्नल रिपीटर्स एक प्रमुख समस्या बन चुके हैं और कॉल ड्रॉप्स और कम डेटा गति जैसे नेटवर्क की समस्या का सामना करने वाले ग्राहकों के लिए सबसे बड़े कारणों में से एक हैं। ये अवैध पुनरावर्तक मोबाइल सिग्नलों को बढ़ावा देने के लिए घरों/कार्यालयो/ पीजी/गेस्ट हाउसों में व्यक्तियों/प्रतिष्ठानों द्वारा स्थापित किए जाते हैं। ये अवैध उपकरण सभी मोबाइल नेटवर्क के साथ हस्तक्षेप करते हैं, सिग्नल की गुणवत्ता को प्रभावित करते हैं और पूरे क्षेत्र में नेटवर्क के सिग्नल को कम करते हैं। मोबाइल ऑपरेटर ग्राहक को अच्छी सेवा और सिग्नल देने के लिए स्पेक्ट्रम और नेटवर्क रोलआउट के अधिग्रहण में भारी निवेश करता है लेकिन अवैध बूस्टर मोबाइल नेटवर्क बाधा पहुंचाने का एक बड़ा कारण बनता है। इन प्रतिष्ठानों पर नकेल कसने और कड़ी कार्रवाई करने के लिए ही टेलिकॉम सेक्टर से जुड़े सरकारी अधिकारियों और टेलिकॉम ऑपरेटर्स के प्रतिनिधियों को बुलाया गया था ।