
तकनीक बने जीवन परिवर्तन का माध्यम, युवाओं को इनोवेशन से जोड़े जाने की जरूरत — मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
तकनीक बने जीवन परिवर्तन का माध्यम, युवाओं को इनोवेशन से जोड़े जाने की जरूरत — मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
गोरखपुर: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि टेक्नोलॉजी जीवन में परिवर्तन की प्रमुख कारक है और व्यवसाय को तीव्र गति से आगे बढ़ाने में निर्णायक भूमिका निभाती है। उन्होंने कहा कि युवाओं के लिए इलेक्ट्रॉनिक्स और उभरती तकनीक के क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं। हमें अपने दैनिक कार्यों को टेक्नोलॉजी के माध्यम से और अधिक सरल बनाना चाहिए तथा इनोवेशन को जीवन का हिस्सा बनाना चाहिए। विश्व में वही देश महाशक्ति बन पाया है, जहां के युवा अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में सक्रिय हैं। जितना अधिक शोध और विकास होगा, समाज और देश उतनी ही तेजी से प्रगति करेगा।मुख्यमंत्री गोरखपुर में आयोजित सैमसंग इनोवेशन कैंपस फेज-3 के कार्यक्रम में सफलतापूर्वक प्रशिक्षण पूर्ण करने वाले विद्यार्थियों को प्रमाणपत्र वितरित करने के बाद संबोधित कर रहे थे। सैमसंग इंडिया द्वारा इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर स्किल काउंसिल ऑफ इंडिया के सहयोग से संचालित इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, बिग डेटा, इंटरनेट ऑफ थिंग्स और कोडिंग एवं प्रोग्रामिंग जैसी उभरती तकनीकों में प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले 1,600 से अधिक विद्यार्थियों को प्रमाणपत्र वितरित किए गए।मुख्यमंत्री ने कहा कि सैमसंग विश्व की अग्रणी इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियों में से एक है, जिसका निवेश उत्तर प्रदेश को वैश्विक ब्रांड पहचान प्रदान कर रहा है। सीएसआर फंड के अंतर्गत सैमसंग इनोवेशन कैंपस के तीसरे चरण में देशभर के 10,000 युवाओं को प्रशिक्षण से जोड़ा गया है, जिनमें से 5,000 उत्तर प्रदेश और 2,000 गोरखपुर व आसपास के क्षेत्र से हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारें युवाओं को स्टार्टअप शुरू करने के लिए हरसंभव सहयोग दे रही हैं। सैमसंग इनोवेशन कैंपस युवाओं को आत्मनिर्भरता की दिशा में एक सशक्त प्लेटफॉर्म प्रदान कर रहा है। राज्य सरकार ने स्टार्टअप्स को समर्थन देने के लिए 1,000 करोड़ रुपये के ‘फंड ऑफ फंड्स’ की व्यवस्था की है।योगी आदित्यनाथ ने कहा कि शैक्षणिक संस्थानों में छात्रों को केवल सैद्धांतिक ज्ञान मिलता है, जबकि सैमसंग इनोवेशन कैंपस जैसे कार्यक्रम उन्हें व्यावहारिक ज्ञान से जोड़ते हैं, जो जीवन के लिए आवश्यक है। इस प्रकार के कार्यक्रम युवाओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, इंटरनेट ऑफ थिंग्स और बिग डेटा जैसी तकनीकों की वास्तविक समझ प्रदान करते हैं। थ्योरी के साथ प्रायोगिक प्रशिक्षण उन्हें उद्योग की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करता है।उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक का प्रशिक्षण अर्थव्यवस्था को सशक्त करने और नागरिकों को आत्मनिर्भर बनाने में सहायक है। राज्य सरकार स्वामी विवेकानंद युवा सशक्तिकरण योजना के अंतर्गत दो करोड़ युवाओं को नि:शुल्क टैबलेट और स्मार्टफोन वितरित कर रही है। भारत आज विश्व की सबसे युवा आबादी वाला देश है और उत्तर प्रदेश इसमें अग्रणी राज्य है। राज्य की लगभग 60 प्रतिशत जनसंख्या कार्यशील युवाओं की है, जिनमें विकास को नई दिशा देने की क्षमता है।मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत आज विश्व में नई पहचान बना रहा है। भारत अब दुनिया का सबसे बड़ा मोबाइल और इंटरनेट उपयोगकर्ता देश है। देश में बनने वाले कुल मोबाइल फोनों का 55 प्रतिशत और इलेक्ट्रॉनिक आइटम्स का 60 प्रतिशत निर्माण उत्तर प्रदेश में हो रहा है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री इंटर्नशिप योजनाओं से युवाओं को जोड़ा जाए ताकि उन्हें रोजगार और बेहतर अवसर मिल सकें। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है और यदि सभी संस्थाएं इसे समयबद्ध रूप से लागू करें तो इसका लाभ लाखों युवाओं तक पहुंचेगा।योगी ने कहा कि 2014 से पहले भारत पहचान के संकट से गुजर रहा था। भ्रष्टाचार चरम पर था और देश की वैश्विक छवि कमजोर पड़ चुकी थी। लेकिन प्रधानमंत्री के नेतृत्व में स्टार्टअप इंडिया, स्टैंडअप इंडिया और डिजिटल इंडिया जैसे अभियानों ने भारत को चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में स्थापित किया। यह उपलब्धि निरंतर और नवोन्मेषी प्रयासों से संभव हुई है।मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार ने टाटा टेक्नोलॉजीज लिमिटेड के सहयोग से 150 से अधिक सरकारी आईटीआई संस्थानों को उभरती तकनीकों के साथ जोड़ा है, जिससे युवाओं को व्यावसायिक शिक्षा के क्षेत्र में नए अवसर प्राप्त हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि जीवन में सफलता का मार्ग समाधान खोजने से बनता है, न कि पलायन से। जो लोग समस्याओं पर चर्चा के बजाय समाधान की दिशा में कार्य करते हैं, वही सफलता प्राप्त करते हैं।पर्यावरण संरक्षण पर बल देते हुए उन्होंने कहा कि पराली और कूड़े को जलाने से प्रदूषण बढ़ता है और खतरनाक गैसें निकलती हैं, जिससे स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। दिल्ली इसका सबसे बड़ा उदाहरण है, जो पराली जलाने की वजह से गैस चेंबर में बदल गई है। उन्होंने कहा कि पहले गांवों में लोग स्वेच्छा से सफाई करते थे और कूड़े को खाद में बदलकर खेतों की उर्वरता बढ़ाते थे। आज भी यदि यह परंपरा अपनाई जाए, तो प्रदूषण और कचरा प्रबंधन की समस्या का समाधान संभव है।कार्यक्रम के दौरान सैमसंग इनोवेशन फेज-3 के मिशन और उसके प्रभावों पर आधारित एक लघु फिल्म प्रदर्शित की गई। इस अवसर पर सैमसंग इंडिया के साउथवेस्ट एशिया के सीईओ और प्रेसीडेंट जे.बी. पार्क, इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर स्किल काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन विनोद शर्मा और दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने भी विचार व्यक्त किए।कार्यक्रम में सांसद रवि किशन शुक्ल, विधायक विपिन सिंह, प्रदीप शुक्ला, श्रीराम चौहान, विमलेश पासवान, इंजीनियर सरवन निषाद, राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष चारू चौधरी समेत अनेक जनप्रतिनिधि और गणमान्य उपस्थित रहे।
