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6 दिसंबर पर बड़ा हमला: दिल्ली लाल किला ब्लास्ट की आतंकी साजिश!

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6 दिसंबर पर बड़ा हमला: दिल्ली लाल किला ब्लास्ट की आतंकी साजिश!

 इंडिया Live: दिल्ली के लाल किले के पास 10 नवंबर को हुए कार धमाके की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, यह हमला केवल एक घटना नहीं बल्कि बाबरी मस्जिद ढहाए जाने की बरसी 6 दिसंबर के दिन देशभर में कई जगह धमाके करने की साजिश का हिस्सा था। आतंकी इस योजना के तहत देशभर में 32 कारों का इंतजाम कर चुके थे, जिनमें ब्रेजा, स्विफ्ट डिजायर, इकोस्पोर्ट और आई20 जैसी गाड़ियां शामिल थीं। इनमें बम और विस्फोटक सामग्री रखी जानी थी। अब तक जांच में चार कारें बरामद हो चुकी हैं। 10 नवंबर को आई20 कार में हुए धमाके में 13 लोगों की मौत हो गई और 20 लोग घायल हुए, जिनमें से तीन की हालत नाजुक बताई जा रही है।

जांच में सामने आया कि जनवरी से ही लाल किले में हमले की रेकी की गई थी। फरीदाबाद की अल-फलाह यूनिवर्सिटी के डॉ. मुजम्मिल गनी और धमाके में कथित रूप से मारे गए डॉ. उमर नबी ने जनवरी में कई बार लाल किले का निरीक्षण किया और सुरक्षा व भीड़ का पैटर्न समझा। यह योजना 26 जनवरी पर हमले की थी, लेकिन नाकाम रही। इसके बाद 6 दिसंबर को हमला करने की तैयारी थी, लेकिन मुजम्मिल गनी की गिरफ्तारी के कारण यह प्लान फेल हो गया। इस अंतरराज्यीय मॉड्यूल का केंद्र फरीदाबाद था और इसमें छह डॉक्टर शामिल थे। इसके अलावा श्रीनगर का डॉ. निसार फरार है, जो कश्मीर डॉक्टर्स एसोसिएशन का अध्यक्ष भी था।

जांच में यह भी पता चला कि विस्फोटक सामग्री को छुपाने के लिए डॉ. मुजम्मिल ने खाद की बोरियों का बहाना बनाया। वह किराए के कमरे में विस्फोटक रख रहा था और पड़ोसियों को बताया कि यह खाद के कट्टे हैं। पुलिस ने कमरे से लगे सीसीटीवी फुटेज भी जब्त किए हैं। इसके अलावा धमाके में शामिल दूसरी गाड़ी हरियाणा के खंदावली गांव में बरामद हुई।

जांच में अब प्रवर्तन निदेशालय (ED) भी शामिल हो गया है। ED यह पता लगाएगा कि डॉक्टरों ने विस्फोटक खरीदने के लिए 20 लाख रुपए कहां से जुटाए और अल-फलाह यूनिवर्सिटी के लेन-देन की जांच करेगी। गुरुग्राम, नूंह और आसपास के इलाकों से 20 क्विंटल से ज्यादा एनपीके उर्वरक खरीदा गया था, जिसे विस्फोटक बनाने के लिए इस्तेमाल किया गया। अब तक कई डॉक्टरों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जिनमें डॉ. फारूक अहमदार और डॉ. शाहीन सईद शामिल हैं। इस पूरी घटना ने यह साफ कर दिया है कि आतंकवाद अब सिर्फ बाहरी हमला नहीं बल्कि पेशेवर और सुगठित नेटवर्क के जरिए भी फैल रहा है।

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