diwali horizontal

नीतीश कुमार के हिजाब खींचने पर शिया – सुन्नी मौलाना ने की आलोचना की!

0 74

नीतीश कुमार के हिजाब खींचने पर शिया – सुन्नी मौलाना ने की आलोचना की!

इंडिया Live: हाल के दिनों में देश की राजनीति और मीडिया को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। एक वीडियो के ज़रिए बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पुराने व्यवहार से जुड़ा मामला फिर चर्चा में आया है। वीडियो में दिखाया गया और बताया गया कि एक सरकारी कार्यक्रम के दौरान एक महिला डॉक्टर के साथ ऐसा व्यवहार हुआ,

जिसे कई लोग अनुचित और अपमानजनक बता रहे हैं। आरोप है कि मुख्यमंत्री ने मंच पर मौजूद महिला डॉक्टर का हिजाब हटाया, जिससे वह असहज हो गईं। इस घटना को महिलाओं के सम्मान और निजी स्वतंत्रता से जोड़कर देखा जा रहा है।

कहा जा रहा है कि महिला डॉक्टर एक सम्मानित पेशे से जुड़ी थीं और उनका हिजाब उनकी व्यक्तिगत और धार्मिक पहचान का हिस्सा था। सार्वजनिक मंच पर बिना अनुमति किसी महिला के पहनावे को छूना या हटाना,

चाहे वह कोई भी हो, सवालों के घेरे में आता है। वीडियो में यह भी कहा गया कि अगर यही काम कोई आम व्यक्ति करता, तो उस पर तुरंत कार्रवाई होती, लेकिन सत्ता में बैठे व्यक्ति के मामले में यह मुद्दा दबा दिया गया।

इस पूरे मामले में सबसे ज़्यादा चर्चा मीडिया की चुप्पी को लेकर हुई। वीडियो में आरोप लगाया गया कि देश का बड़ा हिस्सा मीडिया का, जिसे लोग “गोदी मीडिया” कहते हैं, उसने इस घटना को नज़रअंदाज़ किया। कहा गया कि जिन चैनलों पर रोज़ नैतिकता और संस्कृति की बातें होती हैं, उन्होंने इस मुद्दे पर न तो बहस की और न ही सत्ता से सवाल पूछा। इससे यह धारणा और मज़बूत होती है कि मीडिया सत्ता के सामने कमजोर पड़ता जा रहा है।

वीडियो में यह भी कहा गया कि मीडिया का एक वर्ग जनता के असली मुद्दों को उठाने के बजाय सरकार की छवि सुधारने में लगा हुआ है। जब किसी विपक्षी नेता से गलती होती है, तो उसे बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया जाता है, लेकिन सत्ता पक्ष के मामलों में खामोशी छा जाती है। यही दोहरा रवैया लोकतंत्र के लिए खतरनाक बताया गया।

इसी संदर्भ में वीडियो में दिल्ली की मुख्यमंत्री के खिलाफ लगे “हाय-हाय” के नारों का भी ज़िक्र किया गया। बताया गया कि एक कार्यक्रम में अचानक नारेबाज़ी शुरू हो गई, जिससे साफ लगा कि यह विरोध स्वाभाविक नहीं बल्कि राजनीतिक था। आरोप है कि दिल्ली सरकार को बदनाम करने और दबाव में लाने के लिए ऐसे नारे लगवाए जाते हैं, ताकि उनके कामों पर चर्चा न हो।

वीडियो में कहा गया कि जब कोई सरकार शिक्षा, स्वास्थ्य या आम जनता से जुड़े मुद्दों पर काम करती है, तो उसके खिलाफ माहौल बनाने की कोशिश होती है। नारेबाज़ी लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन जब इसे साजिश की तरह इस्तेमाल किया जाए, तो यह सवाल खड़े करता है।

पूरे वीडियो का सार यही बताया गया कि आज देश में सत्ता, राजनीति और मीडिया के बीच एक अजीब सा संतुलन बन गया है, जहां सवाल पूछने वाले कम और बचाव करने वाले ज़्यादा हैं। महिला सम्मान, अभिव्यक्ति की आज़ादी और लोकतांत्रिक मूल्यों की बातें सिर्फ भाषणों तक सीमित होती जा रही हैं।
विपक्षी नेताओं ने इस घटना की कड़ी आलोचना की है। उनका कहना है कि यह महिला के सम्मान और उसकी धार्मिक पहचान का अपमान है। सपा सांसद इकरा हसन ने इसे “शर्मनाक” बताया, जबकि आरजेडी ने मुख्यमंत्री के व्यवहार पर सवाल उठाए। विपक्षी दलों का कहना है कि ऐसा व्यवहार गलत और अस्वीकार्य है, जिससे बिहार में इस मुद्दे पर बहस तेज हो गई है

मुस्लिम महिला का हिजाब हटाने के मामले में आरजेडी ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर तीखा हमला बोला है। पार्टी नेताओं ने कहा कि यह घटना महिला के सम्मान और धार्मिक भावनाओं के खिलाफ है। आरजेडी ने मुख्यमंत्री के व्यवहार को अनुचित बताते हुए इसकी कड़ी निंदा की और इस मुद्दे पर जवाबदेही की मांग की है।
अंत में वीडियो के माध्यम से आम जनता से अपील की गई कि वह हर खबर को आंख बंद करके न माने, बल्कि खुद सोचे, सवाल पूछे और सच जानने की कोशिश करे। कहा गया कि लोकतंत्र तभी ज़िंदा रहेगा जब जनता जागरूक रहेगी और सत्ता से जवाब मांगेगी।

Leave A Reply

Your email address will not be published.