
अम्बेडकरनगर /अकबरपुर में मशहूर गाँव सिकंदरपुर में नामवर शख़्सियत मरहूम हकीम अली हैदर साहब के बड़े बेटे ज़फ़र ज़ैदी का हरक़ते क़ल्ब के रूकने की वजह से आज इंतक़ाल हो गया।उनकी तबीयत गाँव सिकन्दरपुर में ख़राब हुई और आग़ाज़ का इलाज अकबरपुर शहर में हुआ कुछ फ़ायदा पहुँचने के लिए लखनऊ का रूख किया गया तो चंदन हॉस्पिटल आते -आते इंतक़ाल हो गया
इन्तक़ाल की ख़बर सुनते ही पूरे अम्बेडकरनगर में ग़म की लहर दौड़ गई। ज़फ़र ज़ैदी सरकारी नौकरी से रिटायर होने के बाद आपने गाँव में रहने लगे और आपने अजदाद के क़ायम करदा आज़ादरी की रवायतों को आगे बढ़ाते रहें। आस -पास शिया ज़्यादातर गाँव में उनके अच्छे इख़लाख और मोहब्बतों का ज़िक्र होता रहा है और वो भी हर मौक़े पर हर जगह पहुंचते थे। हमारे ख़बरनिगार से बात करते हुए उसी गाँव के रहने वाले मशहूर वकील मसरूर आलम ज़ैदी उर्फ़ मस्सू ने बताया की ज़फ़र गाँव में बड़े भाई की अहमियत रखते थें और सारे गाँव की आज़ादारी की ज़िम्मेदारी उन्ही के कंधों पर थी , ये नुक़सान हमारे गाँव का बहुत बड़ा नुक़सान है
लखनऊ में इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के पत्रकार रज़ा अब्बास उर्फ़ अबुज़ार जिनका तालुक अम्बेडकरनगर दाउदपुर गाँव से है और ये गाँव सिकंदरपुर गाँव के बिल्कुल बगल में है। उनका कहना है की ज़फ़र भाई लोगो को जोड़ने का काम करते थें, आज़ादारी हो,या महफ़िले हो सब में आगे रहकर एक बड़प्पन निभाने, याही उनकी ख़ास पहचान थी। मोहब्बत , खुलूस से पेश आना उनकी अहम ख़ूबियाँ थी। वो एक बड़े ख़ानदानी परिवार से तालुक रखतें थें और उनके वालिद मरहूम हकीम अली हैदर साहब इल्मी हलकों एक अहम मक़ाम रखतें थें। ज़फ़र भाई हमेशा हमारी यादों में रहेंगे।