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क्या महात्मा गांधी नोटों से हटेंगे?

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क्या महात्मा गांधी नोटों से हटेंगे?

इंडिया Live: भारत में हाल ही में केंद्र सरकार ने देश की सबसे बड़ी ग्रामीण रोजगार योजना मनरेगा (MGNREGA) को बदलकर VB-G RAM G (विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन – ग्रामीण) नाम से नया कानून बना दिया है।

इस बदलाव में सबसे बड़ी बात यह है कि योजना के नाम से “महात्मा गांधी” शब्द हटा दिया गया, जिससे राजनीति में जमकर बहस शुरू हो गई और विपक्ष ने कहा कि यह गांधी की विरासत को मिटाने जैसा है। विरोध में कुछ जगहों पर धरना-प्रदर्शन और संसद में हंगामा भी हुआ, विपक्षी दलों ने खूब नारेबाज़ी की और इस फैसले को लेकर सरकार को निशाने पर लिया गया। विपक्षियों जैसे कांग्रेस के नेताओं ने कहा कि मनरेगा का नाम हटाना गांधी के नाम पर बनी इस योजना की पहचान को खत्म कर देगा और यह गरीबों के हित के खिलाफ है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने कहा कि यह बदलाव योजना के मूल लक्ष्य और उसके इतिहास को कमजोर करता है, क्योंकि मनरेगा 2005 से चली आ रही थी और उसने ग्रामीण भारत को रोजगार देने में बड़ा काम किया था। विपक्ष इसे राजनीतिक संकेत भी मान रहा है।

इसके उलट सरकार का कहना है कि यह बदलाव योजनाओं को और प्रभावी, आधुनिक और विकास-मुखी बनाने का प्रयास है। नए कानून के तहत काम के दिनों की संख्या बढ़ाने, ग्रामीण इलाकों में आजिविका और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए कुछ नए नियम लाए जा रहे हैं। सरकार कहती है कि यह बदलाव लोगों के रोजगार और आजीविका के लिए बेहतर होगा, और नाम बदलने से योजनाओं का लाभ नहीं ख़त्म
अब दूसरी बात: क्या इससे नोटों से महात्मा गांधी की तस्वीर भी हट सकती है? कुछ राजनीतिक नेताओं ने विरोध में यह भी कहा कि अगर नाम को हटाया जा सकता है, तो आगे चलकर नोटों से गांधी की फोटो भी हट सकती है। लेकिन यह अब तक केवल राजनीतिक बयान और बयानबाज़ी है, न कोई आधिकारिक निर्णय आया है और न ही ऐसा कोई प्रस्ताव रखा गया है कि नोटों से गांधी की फोटो हटाई जाएगी। पिछले साल भी ऐसी खबरें वायरल हुईं, लेकिन रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने स्पष्ट कहा था कि नोटों से महात्मा गांधी की तस्वीर हटाने का कोई प्रस्ताव या योजना नहीं है।
ध्यान से समझिए तो नोटों पर तस्वीर हटाना आसान नहीं है। भारत में रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया (RBI) के पास नोट जारी करने का अधिकार है और नोटों के डिज़ाइन, स्वरूप और सामग्री RBI की सिफ़ारिश और केंद्र सरकार की मंज़ूरी के आधार पर तय होते हैं। इसका मतलब यह है कि अगर किसी दिन सरकार या RBI चाहे तो नोटों का डिज़ाइन बदल सकता है, लेकिन उसके लिए क़ानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया होती है: RBI का सेंट्रल बोर्ड सुझाव देता है और फिर केंद्र सरकार उसे मंज़ूरी देती है। फिलहाल ऐसा नहीं हुआ है।

इतिहास देखें तो महात्मा गांधी की तस्वीर पहली बार 1969 में उनके 100वें जन्मदिन पर भारतीय नोटों पर छपी थी, और बाद में 1996 से ‘महात्मा गांधी सीरीज’ के रूप में सभी नए नोटों पर उनका चेहरा रखा गया है। यह डिज़ाइन वर्षों से चला आ रहा है और इसे बदलने का कोई आधिकारिक प्रस्ताव अभी तक नहीं आया है।

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