
जावेद अख्तर बनाम मुफ्ती शमाइल!
इंडिया Live: हाल ही में जावेद अख्तर और मुफ्ती शमाइल के बीच हुई बहस सोशल मीडिया पर खूब चर्चा में है। इस बहस के बाद लोग अपनी-अपनी राय रख रहे हैं। कई लोगों का कहना है कि जावेद अख्तर के सवालों का जवाब मुफ्ती शमाइल ने इस्लाम की सोच के अनुसार साफ और शांत तरीके से दिया। इसी वजह से यह डिबेट अब सोशल मीडिया पर लगातार चर्चा का विषय बनी हुई है।
इस डिबेट के बाद सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में लोग यह कह रहे हैं कि जावेद अख्तर को इस बहस में अपनी बातों का साफ जवाब मिला और मुफ्ती शमाइल ने इस्लाम के हवाले से उनकी दलीलों को चुनौती दी। जावेद अख्तर ने जब बार-बार यह कहा कि अगर भगवान है तो दुनिया में दुख क्यों है, तो मुफ्ती शमाइल ने जवाब दिया कि इस्लाम के मुताबिक दुनिया आराम की जगह नहीं बल्कि इम्तिहान (परीक्षा) है। उन्होंने कहा कि अगर यहां पूरा इंसाफ हो जाए तो आखिरत और जवाबदेही का कोई मतलब नहीं बचेगा। इस जवाब को बहुत से लोगों ने मजबूत और सीधा माना।
मुफ्ती शमाइल की तारीफ इसलिए भी हो रही है क्योंकि उन्होंने बहस के दौरान गुस्सा नहीं किया, आवाज़ ऊँची नहीं की और बात को धर्म की किताबों और सोच के साथ जोड़े रखा। उन्होंने यह भी कहा कि हर बुराई को भगवान पर डाल देना सही नहीं है, क्योंकि इंसान को भी सही-गलत चुनने की आज़ादी दी गई है। जब जावेद अख्तर ने धर्म पर सवाल उठाते हुए कहा कि धर्म डर पर टिका होता है, तो मुफ्ती शमाइल ने कहा कि इस्लाम डर नहीं बल्कि जिम्मेदारी और इंसाफ की बात करता है।
कई लोगों का मानना है कि जावेद अख्तर बार-बार एक ही सवाल को अलग-अलग तरीके से पूछते रहे, जबकि मुफ्ती शमाइल ने इस्लामी नजरिए से उसका जवाब पहले ही दे दिया था। इसी वजह से सोशल मीडिया पर यह बात फैल गई कि जावेद अख्तर को “अपने सवालों का जवाब मिल गया” और वे आगे नई ठोस दलील नहीं रख पाए। हालांकि जावेद अख्तर ने तर्क की भाषा में बात की, लेकिन धार्मिक मंच पर मुफ्ती शमाइल की तैयारी ज्यादा मजबूत मानी गई।
इसी कारण मुस्लिम समाज और धर्म में विश्वास रखने वाले लोग मुफ्ती शमाइल की खुलकर तारीफ कर रहे हैं। वे कह रहे हैं कि उन्होंने इस्लाम को शांति, समझ और ज्ञान के साथ पेश किया, न कि बहस या झगड़े के रूप में। हालांकि कुछ लोग अब भी जावेद अख्तर की सोच का समर्थन करते हैं, लेकिन यह साफ है कि इस डिबेट के बाद मुफ्ती शमाइल को बड़ी पहचान और समर्थन मिला, और यही वजह है कि उनकी तारीफ सोशल मीडिया पर लगातार हो रही है।
कुल मिलाकर यह बहस किसी को हराने या जीतने की नहीं थी, बल्कि दो अलग सोच को सामने रखने की थी। जावेद अख्तर ने तर्क और सवालों के जरिए अपनी बात रखी, वहीं मुफ्ती शमाइल ने धैर्य, शांति और इस्लामी नजरिए से जवाब दिए। सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में लोगों का मानना है कि मुफ्ती शमाइल ने बिना गुस्सा किए, बिना आवाज़ ऊँची किए अपनी बात मजबूती से रखी और इस्लाम को समझदारी और ज्ञान के साथ पेश किया। इसी वजह से इस डिबेट के बाद उन्हें खास पहचान और समर्थन मिला। यह बहस यह भी दिखाती है कि मतभेद होने के बावजूद बातचीत शांति और सम्मान के साथ की जा सकती है