diwali horizontal

अरावली खत्म तो जंगली जानवर आपके घर में।

0 50

अरावली खत्म तो जंगली जानवर आपके घर में।

ARAVALI MOUNTAIN NEWS:अरावली की पहाड़ियां सिर्फ पत्थर और चट्टान नहीं हैं। ये पहाड़ियां हजारों साल पुरानी हैं और यहां कई तरह के जंगली जानवर रहते हैं। दिल्ली से लेकर हरियाणा, राजस्थान और गुजरात तक फैली अरावली पर्वतमाला को दुनिया की सबसे पुरानी पर्वतमालाओं में से एक माना जाता है। यह इलाका उत्तर भारत के लिए बहुत जरूरी है।

अरावली के जंगलों में तेंदुए, लकड़बग्घे, सियार, नीलगाय, सांभर, लोमड़ी और सैकड़ों पक्षी रहते हैं। यहां पेड़-पौधे, छोटी नदियां और पानी के प्राकृतिक स्रोत भी हैं। इन सबकी वजह से अरावली को एक पूरा जीवन तंत्र कहा जाता है।

अरावली की नई परिभाषा और बढ़ता खतरा

इन दिनों अरावली की पहाड़ियों को लेकर बड़ी बहस चल रही है। नई परिभाषा में कहा जा रहा है कि सिर्फ वही पहाड़ियां अरावली मानी जाएंगी जिनकी ऊंचाई 100 मीटर या उससे ज्यादा होगी। पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह नियम लागू हुआ, तो अरावली की बहुत सारी छोटी-छोटी पहाड़ियां कानूनी सुरक्षा से बाहर हो जाएंगी।

इसका मतलब यह होगा कि इन इलाकों में खनन, बिल्डिंग, सड़क और फैक्ट्री बनाना आसान हो जाएगा। जब पहाड़ काटे जाएंगे और जंगल साफ किए जाएंगे, तो जानवरों का घर खत्म हो जाएगा।

तेंदुए: अरावली का राजा

अरावली में सबसे ज्यादा चर्चा तेंदुओं को लेकर है। तेंदुए को अरावली का ‘राजा’ कहा जाता है। ये जानवर बहुत चतुर और शांत होते हैं और आमतौर पर इंसानों से दूर रहना पसंद करते हैं।

राजस्थान में अरावली का सबसे बड़ा हिस्सा है। 2024 की रिपोर्ट के अनुसार राजस्थान में 925 तेंदुए पाए गए थे। जानकारों का कहना है कि अब इनकी संख्या 1000 से भी ज्यादा हो चुकी है। इनमें से अधिकतर तेंदुए अरावली की पहाड़ियों में ही रहते हैं।

तेंदुओं को जंगल में रहकर शिकार करने और छिपने के लिए घना इलाका चाहिए। अरावली की चट्टानें और जंगल उन्हें यह सुरक्षा देते हैं।

जंगल उजड़ा तो क्या होगा?

अगर अरावली के जंगल कटे, तो सबसे पहले जानवर बेघर होंगे। जब जंगल नहीं बचेगा, तो तेंदुए, सियार और दूसरे जानवर मजबूरी में गांवों और शहरों की तरफ आएंगे।

इससे इंसानों और जंगली जानवरों के बीच टकराव बढ़ेगा। कई जगह पहले ही तेंदुए गांवों के पास दिखने लगे हैं। जंगल खत्म हुआ, तो ऐसी घटनाएं और बढ़ सकती हैं।

इसके अलावा, जब जंगल खत्म होते हैं, तो जानवरों को खाने के लिए शिकार नहीं मिलता। इससे वे कमजोर हो जाते हैं और बीमारियों का खतरा भी बढ़ता है।

अरावली इंसानों के लिए क्यों जरूरी है?

अरावली सिर्फ जंगली जानवरों के लिए ही नहीं, बल्कि इंसानों के लिए भी बहुत जरूरी है। ये पहाड़ियां बारिश के पानी को जमीन में जाने देती हैं, जिससे कुएं और ट्यूबवेल में पानी बना रहता है।

अरावली गर्म हवाओं और धूल को रोकती है। यही वजह है कि दिल्ली-एनसीआर और आसपास के इलाकों में अरावली को प्राकृतिक ढाल माना जाता है। अगर अरावली कमजोर हुई, तो गर्मी बढ़ेगी और पानी की कमी भी होगी।

आने वाली पीढ़ियों का सवाल

आज जो फैसले अरावली को लेकर लिए जा रहे हैं, उनका असर आने वाली पीढ़ियों पर पड़ेगा। अगर जंगल और पहाड़ खत्म हो गए, तो बच्चे सिर्फ किताबों और तस्वीरों में ही तेंदुए और घने जंगल देख पाएंगे।

सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर जंगल उजड़ गया, तो अरावली के जानवर कहां जाएंगे? क्या विकास के नाम पर हम उनका घर छीन लेंगे?

अरावली की पहाड़ियां आज भी शांत हैं। तेंदुए आज भी वहां बेखौफ घूम रहे हैं। लेकिन उनका भविष्य हमारे फैसलों पर टिका है। अगर जंगल बचा, तभी जानवर और इंसान दोनों सुरक्षित रहेंगे।

Leave A Reply

Your email address will not be published.