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औरंगाबाद में ओवैसी का बड़ा सियासी दांव!

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औरंगाबाद में ओवैसी का बड़ा सियासी दांव!

इंडिया Live: औरंगाबाद (छत्रपति संभाजीनगर) में आयोजित एक बड़ी जनसभा में एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी का भाषण महाराष्ट्र की सियासत में चर्चा का विषय बन गया। नगर निकाय चुनावों की पृष्ठभूमि में दिए गए इस भाषण में ओवैसी ने स्थानीय मुद्दों से लेकर राज्य और देश की राजनीति तक कई अहम बिंदुओं को उठाया। मंच पर मौजूद सांसद इम्तियाज़ जलील और पार्टी कार्यकर्ताओं की मौजूदगी ने यह संकेत दिया कि एआईएमआईएम शहरी राजनीति में अपनी पकड़ और मजबूत करने की कोशिश में है।

अपने संबोधन की शुरुआत में ओवैसी ने औरंगाबाद की पहचान, इतिहास और मौजूदा हालात का ज़िक्र किया। उन्होंने कहा कि यह शहर सिर्फ नाम बदलने से नहीं, बल्कि बेहतर शिक्षा, रोज़गार और बुनियादी सुविधाओं से आगे बढ़ेगा। ओवैसी ने नगर निगम, पानी की समस्या, कचरा प्रबंधन, सड़कों की हालत और स्वास्थ्य सेवाओं जैसे मुद्दों पर स्थानीय प्रशासन को घेरा और कहा कि चुनाव केवल वादों के लिए नहीं, बल्कि जवाबदेही तय करने का मौका होते हैं।

भाषण के दौरान ओवैसी ने अल्पसंख्यकों, खासकर मुस्लिम समाज से जुड़े सवालों को भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि डर और भ्रम की राजनीति के बीच एआईएमआईएम संविधान और लोकतांत्रिक अधिकारों की बात करती रहेगी। उनका कहना था कि नगर निकाय चुनाव भले ही स्थानीय हों, लेकिन इनके फैसले लोगों की रोज़मर्रा की ज़िंदगी पर सीधा असर डालते हैं, इसलिए मतदाताओं को सोच-समझकर फैसला लेना चाहिए।

इम्तियाज़ जलील का नाम लेते हुए ओवैसी ने उनके संसदीय कार्यों का उल्लेख किया और कहा कि औरंगाबाद की आवाज़ संसद तक पहुंचाने में जलील ने अहम भूमिका निभाई है। हालांकि, पार्टी के भीतर उठ रही असहमति और “AIMIM में बगावत” की चर्चाओं पर भी अप्रत्यक्ष रूप से संकेत दिए गए। ओवैसी ने कहा कि किसी भी पार्टी में मतभेद हो सकते हैं, लेकिन जनता के हित सर्वोपरि होने चाहिए और व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा से ऊपर संगठन और सिद्धांत होने चाहिए।

राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, ओवैसी का यह बयान उन नेताओं के लिए संदेश माना जा रहा है जो हाल के दिनों में पार्टी लाइन से अलग राय रखते दिखे हैं। नगर निकाय चुनाव से पहले यह स्पष्ट करने की कोशिश की गई कि एआईएमआईएम नेतृत्व एकजुट है और चुनावी रणनीति मुद्दों पर आधारित होगी, न कि आपसी कलह पर।

अपने भाषण के मध्य भाग में ओवैसी ने सत्ताधारी दलों और विपक्ष दोनों पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कुछ पार्टियां चुनाव के समय ही गरीबों और अल्पसंख्यकों को याद करती हैं, जबकि एआईएमआईएम साल भर ज़मीनी संघर्ष करती है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे शिक्षा और रोज़गार के सवालों को चुनाव का मुख्य मुद्दा बनाएं।

महाराष्ट्र के नगर निकाय चुनावों को लेकर ओवैसी ने कहा कि शहरी स्थानीय निकाय लोकतंत्र की पहली सीढ़ी होते हैं। यदि यहां सही प्रतिनिधि चुने जाएं, तो बड़े स्तर पर बदलाव संभव है। उन्होंने पारदर्शिता, भ्रष्टाचार-मुक्त प्रशासन और नागरिक सुविधाओं के विस्तार का वादा दोहराया।

भाषण के अंत में ओवैसी ने मतदाताओं से बड़ी संख्या में मतदान करने की अपील की। उन्होंने कहा कि नफरत के जवाब में वोट, डर के जवाब में लोकतंत्र और झूठ के जवाब में सच्चाई ही सबसे मजबूत हथियार है। सभा में मौजूद समर्थकों ने नारेबाज़ी और तालियों के साथ उनके संबोधन का स्वागत किया।

कुल मिलाकर, औरंगाबाद में दिया गया असदुद्दीन ओवैसी का यह भाषण नगर निकाय चुनावों से पहले एआईएमआईएम की राजनीतिक दिशा, आंतरिक संदेश और चुनावी प्राथमिकताओं को साफ तौर पर सामने लाता है। इम्तियाज़ जलील की मौजूदगी, पार्टी में उठे असंतोष की चर्चाएं और स्थानीय मुद्दों पर आक्रामक रुख—इन सभी ने इस भाषण को महाराष्ट्र की सियासत में एक अहम घटनाक्रम बना दिया है।

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