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 ईरान की ताकत का खौफ! अमेरिका थर थर काँप रहा!

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 ईरान की ताकत का खौफ! अमेरिका थर थर काँप रहा

IRAN- US TENTIONS:मध्य पूर्व में इन दिनों तनाव अपने चरम पर है। अमेरिका और ईरान के बीच हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि ऐसा लग रहा है कि जंग कभी भी शुरू हो सकती है। अमेरिका ने अपने युद्धपोत, लड़ाकू विमान और मिसाइल सिस्टम मध्य पूर्व में तैनात कर दिए हैं और ईरान पर कड़ा दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है। अमेरिका का कहना है कि अगर ईरान ने कोई भी सैन्य कदम उठाया तो उसे भारी नुकसान भुगतना पड़ेगा। लेकिन अमेरिका को अब डर इस बात का है कि ईरान की ताकत किसी भी सीधे हमले के लिए उसे रोक रही है। ईरान ने साफ कर दिया है कि वह अपने देश और जनता की सुरक्षा के लिए पूरी ताकत के साथ तैयार है। देश के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई और सैन्य कमांडरों ने बार बार कहा है कि अगर हमला हुआ तो ईरान तुरंत और सशक्त जवाब देगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी रक्षा क्षमता और मिसाइल शक्ति किसी भी दबाव या समझौते से कम नहीं होगी।

ईरान की ताकत केवल सैन्य नहीं है। उसके क्षेत्रीय समर्थन और गठबंधनों ने अमेरिका को सचमुच डराने पर मजबूर कर दिया है। इराक, सीरिया, लेबनान और यमन जैसे देशों में ईरान के समर्थित कई समूह सक्रिय हैं, और वे अमेरिका और उसके सहयोगियों के लिए चुनौती बन सकते हैं। अमेरिका यह जानता है कि अगर वह सीधे हमला करता है तो उसका असर सिर्फ ईरान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे मध्य पूर्व में अस्थिरता फैल जाएगी, तेल की आपूर्ति पर असर पड़ेगा और वैश्विक आर्थिक संकट भी पैदा हो सकता है। इसलिए अमेरिका अब हर कदम सोच-समझ कर उठा रहा है। वह सैन्य ताकत दिखा रहा है, दबाव बढ़ा रहा है, लेकिन सीधे युद्ध की शुरुआत से बच रहा है।

तुर्की, सऊदी अरब, क़तर और अन्य मध्य पूर्वी देश भी इस समय कूटनीति और बातचीत के रास्ते पर जोर दे रहे हैं। उन्होंने अमेरिका और ईरान दोनों से कहा है कि सीधे युद्ध से कोई समाधान नहीं निकलने वाला। इन देशों का मानना है कि अगर लड़ाई शुरू हुई तो पूरे अरब क्षेत्र की सुरक्षा और आम लोगों की जिंदगी खतरे में पड़ जाएगी। इसी वजह से उन्होंने शांति और बातचीत की कोशिशें तेज कर दी हैं। लेकिन ईरान ने यह भी साफ कर दिया है कि वह सिर्फ बातचीत के लिए कमजोर नहीं पड़ेगा। वह अपनी ताकत और गठजोड़ से अमेरिका को लगातार चेतावनी दे रहा है कि अगर हमला हुआ तो जवाब तुरंत मिलेगा।

इस समय दुनिया भर की निगाहें इस संघर्ष पर टिकी हुई हैं। यह सिर्फ अमेरिका और ईरान के बीच की टकराव नहीं है, बल्कि यह एक वैश्विक राजनीतिक और सुरक्षा संकट बन चुका है। अमेरिका अपनी शक्ति दिखाकर दबाव बना रहा है और ईरान अपनी रणनीति, मिसाइल शक्ति और क्षेत्रीय समर्थन के जरिए अमेरिका को थर थर काँपने पर मजबूर कर रहा है। दोनों तरफ़ से तैयारियाँ जोरों पर हैं और हर कोई चाहता है कि पहले बातचीत और कूटनीति का रास्ता अपनाया जाए, ताकि कोई बड़ा युद्ध न हो।

कुल मिलाकर, आज की स्थिति यह है कि जंग की घंटी बज सकती है, अमेरिका और उसके सहयोगियों की रणनीति ईरान की ताकत से थम गई है और ईरान पूरी तैयारी के साथ खड़ा है। अगर कोई भी पक्ष जल्दबाजी करेगा, तो पूरे मध्य पूर्व में गंभीर संकट पैदा हो सकता है। इस समय यही महत्वपूर्ण है कि कूटनीति और बातचीत के रास्ते से ही इस तनाव को खत्म किया जाए, वरना दुनिया एक नए युद्ध की दहलीज पर खड़ी है।

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