
बक बक वाले ट्रंप, ईरान पर चुप क्यों?
IRAN vs AMERICA TENSION ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई ने एक भाषण में दावा किया कि हालिया हिंसा में “कई हज़ार लोग मारे गए”, जिनमें से कुछ को उन्होंने अमानवीय और बर्बर तरीके से मारे जाने की बात कही। इन मौतों और देश में हुए नुकसान के लिए उन्होंने सीधे तौर पर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इज़राइल को जिम्मेदार ठहराया।
खामेनेई ने डोनाल्ड ट्रंप को “अपराधी” कहा और आरोप लगाया कि ट्रंप ने प्रदर्शनकारियों को खुला समर्थन दिया, उन्हें सैन्य मदद का भरोसा दिलाया और इस पूरे विद्रोह में अमेरिका की सीधी भूमिका रही। उन्होंने कहा कि इस साजिश में शामिल घरेलू और अंतरराष्ट्रीय अपराधियों को सज़ा दी जाएगी और अमेरिका को इसके लिए जवाबदेह ठहराया जाएगा।

खामेनेई के इन गंभीर आरोपों के बावजूद डोनाल्ड ट्रंप की ओर से कोई सीधी प्रतिक्रिया नहीं आई, जिसे लेकर सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि आमतौर पर ट्रंप ऐसे मामलों पर खुलकर बयान देते रहे हैं। इसी बीच यह भी चर्चा में है कि ट्रंप के दबाव या डर के चलते कुछ देशों ने BRICS से दूरी बनाई, BRICS सैन्य अभ्यास से अलग हुए, रूस से तेल खरीद कम की, ईरान से तेल लेना बंद किया, और यहां तक कि चाबहार परियोजना से भी बाहर हो गए।
ईरान का दावा है कि उसने जिन लोगों को हालिया हिंसा के सिलसिले में गिरफ्तार किया है, उनसे उसे ईरान में अस्थिरता फैलाने की अमेरिकी साजिश के ठोस सबूत मिले हैं। इन्हीं सबूतों के आधार पर ईरान डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय अदालत जाने की तैयारी कर रहा है। ईरान के अनुसार, गिरफ्तार लोगों में एक महिला नाज़नीन बरादरन भी शामिल है, जिसके पास तीन अलग अलग पासपोर्ट मिले हैं। ईरान का कहना है कि वह सीधे तौर पर रज़ा पहलवी के करीबी बिज़न कियान को रिपोर्ट करती थी और उसका बयान इस कथित साजिश का अहम हिस्सा है, जिसे ईरान जल्द दुनिया के सामने रखने की बात कह रहा है।
बताया जा रहा है कि बिज़न कियान, जो एक ईरानी अमेरिकी व्यवसायी हैं, उनके संबंध अमेरिका के रक्षा विभाग पेंटागन से जुड़े रहे हैं, खासतौर पर वहां के वरिष्ठ अधिकारी Adam Lovinger से। ईरान का आरोप है कि हाल के दिनों में जो हिंसा हुई, वह अमेरिका, इज़राइल और डोनाल्ड ट्रंप द्वारा रज़ा पहलवी के ज़रिए रची गई साजिश का नतीजा है।
विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप का अचानक ईरान की तारीफ करने लगना भी सामान्य नहीं है। इसी बीच खबरें हैं कि ईरान इन कथित सबूतों के आधार पर मिडिल ईस्ट में मौजूद अमेरिकी ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई कर सकता है। कहा जा रहा है कि इस आशंका की जानकारी रूस ने इज़राइल को बातचीत के दौरान दे दी है।
रूस ने इज़राइल को ईरान की हाइपरसोनिक मिसाइल क्षमता को लेकर भी जानकारी दी है। दावा है कि इन मिसाइलों की रफ्तार मैक 13 से मैक 15 (यानी ध्वनि की गति से 13–15 गुना तेज़, लगभग 16,000–18,000 किमी प्रति घंटा) तक हो सकती है। ऐसे हथियारों से इज़राइल, फारस की खाड़ी में मौजूद अमेरिकी सैन्य अड्डे कुछ ही मिनटों में निशाने पर आ सकते हैं। ईरान का कहना है कि इन मिसाइलों में ऐसी तकनीक है जो रडार से बचने और मिसाइल डिफेंस सिस्टम को चकमा देने में सक्षम है।
इसी वजह से खबर है कि खाड़ी के कई देशों ने ईरान के खिलाफ किसी भी अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के लिए अपना एयरस्पेस देने से इनकार कर दिया है, क्योंकि कोई भी देश सीधे इस टकराव में फंसना नहीं चाहता। इसके अलावा यह भी दावा किया जा रहा है कि अमेरिका को यह सूचना दी गई है कि ईरान के पास परमाणु हथियार बनाने की क्षमता या उससे जुड़ी तकनीक हो सकती है, जिसे ऐसी मिसाइलों के साथ इस्तेमाल किया जा सकता है।
कुल मिलाकर, यह पूरा मामला मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव, शक्ति प्रदर्शन और वैश्विक राजनीति की जटिलता को दिखाता है। समर्थकों का कहना है कि ईरान ने अपनी सुरक्षा पर गंभीरता से काम किया है, जबकि आलोचकों के अनुसार आने वाले समय में यह स्थिति और बड़े टकराव की ओर भी जा सकती है।