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मस्जिद में ताला, लखनऊ में भारी बवाल

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लखनऊ ; उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में स्थित लखनऊ विश्वविद्यालय एक बार फिर सुर्खियों में है। इस बार मामला विश्वविद्यालय परिसर के अंदर स्थित ‘लाल बारादरी’ से जुड़ा है, जहां एक धार्मिक गतिविधि को लेकर दो छात्र गुट आमने-सामने आ गए। आइए पूरे घटनाक्रम को विस्तार से समझते हैं — आखिर क्या हुआ, क्यों हुआ और अब आगे क्या हो सकता है।
घटना की शुरुआत उस समय हुई जब विश्वविद्यालय परिसर के भीतर मौजूद लाल बारादरी क्षेत्र में कुछ छात्रों ने नमाज़ अदा की। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, यह नमाज़ खुले स्थान पर पढ़ी गई। यह स्पष्ट नहीं है कि इसके लिए प्रशासन से औपचारिक अनुमति ली गई थी या नहीं। जैसे ही इसकी जानकारी दूसरे छात्र संगठन के सदस्यों को मिली, वे मौके पर पहुंचे और इसका विरोध करने लगे।
विरोध करने वाले छात्रों का कहना था कि विश्वविद्यालय एक शैक्षणिक संस्थान है, धार्मिक स्थल नहीं। उनका तर्क था कि यदि एक समुदाय को परिसर में धार्मिक गतिविधि की अनुमति दी जाती है, तो भविष्य में अन्य समुदाय भी ऐसा कर सकते हैं, जिससे परिसर का माहौल प्रभावित होगा। इसी दौरान कुछ छात्रों ने ‘जय भवानी’ और ‘जय श्रीराम’ के नारे लगाए। इसके जवाब में दूसरे पक्ष के छात्र भी अपने समर्थन में खड़े हो गए। देखते ही देखते बहस तेज हो गई और दोनों गुट आमने-सामने आ गए।

हालांकि स्थिति तनावपूर्ण जरूर हुई, लेकिन किसी बड़े हिंसक टकराव की खबर नहीं है। विश्वविद्यालय के सुरक्षाकर्मियों ने तुरंत हस्तक्षेप किया और छात्रों को अलग किया। प्रशासनिक अधिकारियों को सूचना दी गई और थोड़ी ही देर में वरिष्ठ अधिकारी भी मौके पर पहुंच गए। एहतियातन परिसर में अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था कर दी गई।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने बाद में एक बयान जारी कर कहा कि परिसर में किसी भी प्रकार की धार्मिक या राजनीतिक गतिविधि के लिए पूर्व अनुमति अनिवार्य है। प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया कि संस्थान का प्राथमिक उद्देश्य शैक्षणिक वातावरण बनाए रखना है और किसी भी तरह की गतिविधि जो तनाव पैदा करे, उसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अब यह जांच की जा रही है कि नमाज़ बिना अनुमति के पढ़ी गई थी या नहीं, और क्या विरोध के दौरान किसी ने नियमों का उल्लंघन किया।
घटना के बाद पुलिस को भी सूचना दी गई। पुलिस ने परिसर के आसपास गश्त बढ़ा दी और सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं। यदि जांच में पाया जाता है कि किसी छात्र या समूह ने माहौल बिगाड़ने की कोशिश की है, तो उसके खिलाफ कानूनी या अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है।
इस पूरे विवाद ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है — क्या विश्वविद्यालय परिसर में धार्मिक गतिविधियों की अनुमति होनी चाहिए? कुछ लोग इसे व्यक्तिगत धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार मानते हैं, तो कुछ का कहना है कि शैक्षणिक संस्थानों को पूरी तरह धर्मनिरपेक्ष और तटस्थ रहना चाहिए। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में स्पष्ट नीतियां और संवाद बेहद जरूरी हैं, ताकि भविष्य में इस तरह के टकराव से बचा जा सके।
सोशल मीडिया पर भी यह मुद्दा तेजी से फैल गया। अलग-अलग विचार सामने आए। कुछ लोगों ने इसे धार्मिक स्वतंत्रता का मामला बताया, तो कुछ ने इसे परिसर की निष्पक्षता और अनुशासन से जोड़कर देखा। हालांकि प्रशासन ने छात्रों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और किसी भी तरह की भड़काऊ पोस्ट से बचें।
फिलहाल स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने सभी छात्र संगठनों के साथ बैठक करने की तैयारी की है, ताकि आगे ऐसी घटनाओं को रोका जा सके। संभव है कि भविष्य में परिसर में किसी भी तरह की सामूहिक गतिविधि के लिए और सख्त दिशा-निर्देश लागू किए जाएं।


संक्षेप में, पूरा मामला विश्वविद्यालय परिसर में नमाज़ पढ़े जाने और उसके विरोध में लगाए गए धार्मिक नारों से शुरू हुआ, जो कुछ समय के लिए तनाव का कारण बना। प्रशासन अब जांच कर रहा है कि नियमों का उल्लंघन हुआ या नहीं। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि क्या किसी के खिलाफ कार्रवाई होती है या मामला बातचीत से सुलझ जाता है। फिलहाल विश्वविद्यालय का ध्यान शांति और शैक्षणिक माहौल बनाए रखने पर है।

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