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शहीद आयतुल्लाह सैयद अली खामनेई की याद में भव्य ‘मजलिस-ए-अज़ा’ का आयोजन!

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शहीद आयतुल्लाह सैयद अली खामनेई की याद में भव्य ‘मजलिस-ए-अज़ा’ का आयोजन!

 

HIGHLIGHTS:

इस्लाम नहीं सिखाता कि खामोशी से जुल्म सहा जाए: मौलाना जहांगीर आलम क़ासमी

 

 

 

लखनऊ Live:इस्लाम अमन पसंदी और भाईचारे का मज़हब है। लेकिन इस्लाम इस बात की जरा भी इजाजत नहीं देता कि आप किसी ज़ालिम के जुल्म को खामोशी से बर्दाश्त करते रहें। जालिम के जुल्म को मुंहतोड़ जवाब देना लाजमी है। यह बातें अंजुमन फलाह ए दारैन के अध्यक्ष मौलाना जहाँगीर आलम कासमी ने रविवार को कही। ईरान के सर्वोच्च धार्मिक नेता शहीद आयतुल्लाह सैयद अली खामनेई और स्कूल में शहीद हुई बच्चियों सहित अन्य शहीदों के ईसाले-सवाब के लिए लखनऊ के अमीनाबाद इलाके में एक भव्य मजलिस-ए-अज़ा का आयोजन किया गया।

ईरान के सर्वोच्च धार्मिक नेता शहीद आयतुल्लाह सैयद अली खामनेई और स्कूल में शहीद हुई बच्चियों सहित अन्य शहीदों के ईसाले-सवाब के लिए लखनऊ के अमीनाबाद इलाके में एक भव्य मजलिस-ए-अज़ा का आयोजन किया गया। मजलिस को देश के ख्याति प्राप्त विद्वान और

धर्मगुरु हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन आली जनाब मौलाना अली अब्बास खान ने संबोधित किया। मजलिस से पहले मौजूद लोगों को मौलाना जहांगीर आलम कासमी ने अपने जोशीले अंदाज में नसीहतें दी। उन्होंने कहा कि रहबर ए मोअज्जम की शहादत हम सबके लिए एक पैगाम है। हमें मिलजुल कर आलम ए इस्लाम की हिफाजत करनी है। उन्होंने कहा कि अब वक्त आ गया है कि सभी मुसलमानो को एक होकर जालिम अमेरिका और इसराइल के खिलाफ आवाज बुलंद करनी चाहिए।

मौलाना क़ासमी ने कुरान और हदीस की रोशनी में अपनी बात को पेश किया। उन्होंने कुरान की मुख्तलिफ आयात और हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की हदीस को लोगों तक पहुंचाया। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने सोचा था की मौलवी टाइप का आदमी हमारा क्या बिगाड़ पाएगा, लेकिन आज दुनिया देख रही है कि उस मौलवी ने ऐसे मजबूत मुल्क और उस मुल्क के ऐसे मजबूत शहरियों की तबीयत की है जो सुपर पावर अमेरिका और इजरायल से टक्कर ले रहा है।

उन्होंने कहा कि इस्लाम इस बात की बिल्कुल इजाजत नहीं देता की जालिम के जुल्म को खामोशी से सहा जाए। मौलाना जहांगीर ने कहा कि इस्लाम अमन का पैगाम देने वाला मजहब है हमें अमन और भाईचारे के साथ सबको साथ लेकर चलना है। लेकिन ज़ालिम के खात्मे के बगैर अमन को पैदा नहीं किया जा सकता।

 

 

 

उन्होंने सऊदी अरब सहित विभिन्न अरब देश की निंदा की। उन्होंने कहा की खाड़ी के जो भी मुल्क अमेरिका की मदद कर रहे हैं उनके ऊपर अल्लाह का ग़ज़ब और क़हर नाज़िल होगा। मौलाना ने हजरत मूसा और फिरौन की मिसाल देते हुए कहा कि जब-जब फिरौनियत अपना सर उठाएगी तब तब अल्लाह इस दुनिया में किसी न किसी को मूसा बना कर भेज देगा।

 

 

 

 

ईरान के सर्वोच्च धार्मिक नेता शहीद आयतुल्लाह सैयद अली खामनेई के व्यक्तित्व की प्रशंसा करते हुए उन्होंने कहा कि वह नबूवत और इमामत के पैरोंकार थे। वह अपने पीछे लाखों लोगों को इस्लाम की सुरक्षा के लिए खड़ा करके गए हैं। उन्होंने कहा कि हम सब को शिया, सुन्नी, बरेलवी और देवबंदी जैसे इख़्तेलाफ़ात को भुलाकर एकता और भाईचारे के साथ ईरान की हिमायत के लिए खड़ा होना है।

बाद मजलिस को हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन आली जनाब मौलाना अली अब्बास खान ने खिताब किया। उन्होंने भी डर हजरा पर रोशनी डाली और कुरान और इस्लाम के असल पैगाम को बताया। उन्होंने कहा कि कर्बला हमें यह दर्स देती है कि इस्लाम और दिन की हिफाजत किस तरह करनी है। इस अवसर पर सैकड़ो की तादाद में लोग मौजूद रहे जिन्होंने शोहदा को खिराज ए अक़ीदत पेश की। कार्यक्रम का संचालन जनाब गुलरेज नकी ने किया

 

 

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