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सूरत स्टेशन पर मजदूरों का फूटा दर्द!

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सूरत स्टेशन पर मजदूरों का फूटा दर्द!

इंडिया Live: गुजरात के सूरत के उधना रेलवे स्टेशन पर रविवार को उस वक्त अफरा-तफरी का माहौल बन गया, जब हजारों की संख्या में लोग अपने घर लौटने के लिए स्टेशन पर जमा हो गए। फैक्ट्रियों में काम कम होने और गर्मी की छुट्टियों की शुरुआत के चलते मजदूरों और कामगारों का रुख अपने गांवों की ओर हो गया। लेकिन इस भीड़ ने धीरे-धीरे विकराल रूप ले लिया।
तपती धूप में घंटों से खड़े लोग बेहाल नजर आए। किसी के सिर पर सामान था, तो कोई अपने छोटे बच्चों को गोद में उठाए पसीने से तर-बतर खड़ा था। स्टेशन परिसर में छांव की कमी और भीड़ के दबाव ने हालात और मुश्किल कर दिए। पानी और बैठने की व्यवस्था भी नाकाफी साबित हुई, जिससे लोगों की परेशानी बढ़ती चली गई।

जैसे-जैसे समय बीतता गया, लोगों की बेचैनी भी बढ़ने लगी। ट्रेन का इंतजार कर रहे यात्रियों में धक्का-मुक्की शुरू हो गई। कई लोग प्लेटफॉर्म पर जगह बनाने के लिए आगे बढ़ने लगे, जिससे अव्यवस्था और बढ़ गई। हालात को काबू में करने के लिए पुलिस और रेलवे प्रशासन को मौके पर तैनात किया गया।
लेकिन भीड़ इतनी ज्यादा थी कि स्थिति नियंत्रण से बाहर होती दिखी। कुछ जगहों पर पुलिस को हल्का बल प्रयोग भी करना पड़ा, ताकि भीड़ को पीछे किया जा सके और व्यवस्था बनाई जा सके। इस दौरान कई लोग घबराकर इधर-उधर भागते नजर आए।
सबसे ज्यादा मुश्किल उन मजदूरों के लिए रही, जो कई दिनों से घर जाने की तैयारी कर रहे थे। उनके चेहरे पर थकान, चिंता और जल्द से जल्द अपने परिवार तक पहुंचने की बेचैनी साफ देखी जा सकती थी। एक यात्री ने बताया, “सुबह से खड़े हैं, ना ठीक से पानी मिल रहा है, ना बैठने की जगह… बस किसी तरह घर पहुंचना है।”

यह घटना एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करती है कि बड़ी संख्या में यात्रियों के प्रबंधन के लिए क्या पर्याप्त इंतजाम किए जा रहे हैं। खासकर ऐसे समय में, जब छुट्टियों और काम की कमी के चलते लोगों का पलायन बढ़ जाता है।
फिलहाल, प्रशासन स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश में जुटा है, लेकिन सवाल यही है कि क्या भविष्य में ऐसे हालात से बचने के लिए बेहतर योजना बनाई जाएगी, ताकि आम लोगों—खासकर मजदूरों—को इस तरह की परेशानियों का सामना न करना पड़े।

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