
Pakistan ने खोले Iran के लिए रास्ते?
PAKISTAN ,IRAN RELATIONS:आज हम बात कर रहे हैं चाबहार पोर्ट को लेकर बदलते हालात की, जहां एक तरफ भारत के लिए मुश्किलें बढ़ती दिख रही हैं, वहीं पाकिस्तान और ईरान के रिश्ते नई दिशा लेते नजर आ रहे हैं।
सबसे पहले समझते हैं कि चाबहार पोर्ट भारत के लिए इतना अहम क्यों है। ईरान में स्थित यह पोर्ट भारत को अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक पहुंचने का सीधा रास्ता देता है, वो भी बिना पाकिस्तान के रास्ते से गुजरे। यही वजह है कि भारत ने इसमें निवेश किया और इसे अपनी रणनीतिक ताकत माना।
लेकिन अब हालात बदलते दिख रहे हैं। अमेरिका ने ईरान पर प्रतिबंध लगाए हुए हैं और हाल ही में चाबहार से जुड़ी छूट (waiver) खत्म हो गई है। इसके कारण भारत के सामने दुविधा खड़ी हो गई है—या तो वह इस प्रोजेक्ट से पीछे हटे, या फिर अमेरिकी प्रतिबंधों का जोखिम उठाए।
इसी बीच खबरें ये भी कह रही हैं कि भारत इस प्रोजेक्ट में अपने रोल को बचाने के लिए ईरान और अमेरिका दोनों से बातचीत कर रहा है। लेकिन स्थिति आसान नहीं है क्योंकि अंतरराष्ट्रीय राजनीति इसमें बड़ी भूमिका निभा रही है।

अब बात करते हैं पाकिस्तान की। पाकिस्तान पहले से ही चीन के साथ मिलकर ग्वादर पोर्ट को विकसित कर रहा है, जो चाबहार का एक तरह से प्रतिस्पर्धी माना जाता है। अब अगर ईरान पाकिस्तान के साथ रिश्ते मजबूत करता है या उसे रास्ता देता है, तो भारत के लिए यह रणनीतिक झटका हो सकता है।
हाल के घटनाक्रमों में यह भी सामने आया है कि ईरान के प्रतिनिधि पाकिस्तान के दौरे पर जा रहे हैं और दोनों देशों के बीच बातचीत बढ़ रही है। इससे यह संकेत मिल रहा है कि ईरान अब क्षेत्रीय संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है और सिर्फ भारत पर निर्भर नहीं रहना चाहता।
दूसरी बड़ी चिंता यह है कि चीन भी इस पूरे खेल में एंट्री कर सकता है। अगर चीन चाबहार में निवेश करता है या पाकिस्तान के साथ मिलकर अपना प्रभाव बढ़ाता है, तो भारत की स्थिति और कमजोर हो सकती है।
हालांकि, ईरान की तरफ से यह भी कहा गया है कि चाबहार प्रोजेक्ट अभी भी जारी है और भारत के लिए दरवाजे बंद नहीं हुए हैं। यानी पूरी तरह से भारत बाहर नहीं हुआ है, लेकिन स्थिति पहले जैसी मजबूत भी नहीं रही।
कुल मिलाकर देखा जाए तो चाबहार अब सिर्फ एक पोर्ट नहीं बल्कि एक बड़ा जियोपॉलिटिकल खेल बन चुका है। अमेरिका के प्रतिबंध, चीन की संभावित एंट्री, और पाकिस्तान-ईरान के बढ़ते संबंध—ये सब मिलकर भारत के लिए चुनौती खड़ी कर रहे हैं।
अब भारत के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या वह इस प्रोजेक्ट को बचा पाएगा या फिर उसे नया रास्ता तलाशना होगा। आने वाले समय में यह साफ होगा कि चाबहार भारत की ताकत बनेगा या एक अधूरा सपना।