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ईरान की साइबर धमकी! अमेरिका में BLACKOUT का खतरा?

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ईरान की साइबर धमकी! अमेरिका में BLACKOUT का खतरा?

 

IRAN US WAR:  अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अब सिर्फ जमीन और आसमान तक सीमित नहीं है। दोनों देशों के बीच बढ़ते टकराव के बीच साइबर हमलों का खतरा भी तेजी से चर्चा में है। अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों ने ईरान से जुड़े साइबर एक्टर्स को लेकर लगातार चेतावनी जारी की है। खास चिंता अमेरिका के उन क्रिटिकल इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर है, जिन पर बिजली, पानी, ऊर्जा और दूसरी जरूरी सेवाएं निर्भर करती हैं। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक ईरान से जुड़े साइबर समूह इंटरनेट से जुड़े औद्योगिक सिस्टम को निशाना बनाने की कोशिश कर चुके हैं।

सबसे बड़ी चिंता उन सिस्टम्स को लेकर है जिन्हें आसान भाषा में ऐसे कंप्यूटर सिस्टम समझ सकते हैं, जो किसी प्लांट या जरूरी सुविधा के कामकाज को कंट्रोल करते हैं। अमेरिकी एजेंसियों ने बताया है कि कुछ ईरान-संबद्ध साइबर एक्टर्स ने ऐसे प्रोग्रामेबल लॉजिक कंट्रोलर्स यानी PLCs को निशाना बनाया। इन सिस्टम्स का इस्तेमाल पानी, ऊर्जा और दूसरे औद्योगिक कामों में होता है। अधिकारियों के मुताबिक कुछ मामलों में सिस्टम के संचालन में परेशानी और आर्थिक नुकसान भी सामने आया है।

अब सवाल उठता है कि अगर किसी बड़े साइबर हमले का दायरा बढ़ता है तो इसका असर आम लोगों पर कैसे पड़ सकता है? साइबर हमला सिर्फ कंप्यूटर में डेटा चोरी करने तक सीमित नहीं होता। अगर किसी जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर के कंट्रोल सिस्टम में सेंध लग जाए तो किसी सेवा के संचालन में रुकावट आ सकती है। यही वजह है कि अमेरिका की FBI, CISA और दूसरी एजेंसियां महत्वपूर्ण संस्थानों को अपने नेटवर्क की सुरक्षा मजबूत करने और इंटरनेट से जुड़े संवेदनशील सिस्टम पर नजर रखने की सलाह दे रही हैं।

अमेरिका के लिए यह चुनौती इसलिए भी गंभीर है क्योंकि बिजली, पानी, ऊर्जा और संचार जैसी सेवाएं आधुनिक देश की रीढ़ मानी जाती हैं। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि अमेरिका का पूरा पावर ग्रिड या इंटरनेट निश्चित रूप से बंद होने वाला है। विशेषज्ञों के मुताबिक खतरा वास्तविक है, लेकिन किसी बड़े देश के पूरे इंफ्रास्ट्रक्चर को एक साथ ठप कर देना बेहद जटिल काम होगा। इसलिए मौजूदा स्थिति को खतरे और तैयारी के नजरिए से देखना ज्यादा सही है, न कि किसी निश्चित ब्लैकआउट की भविष्यवाणी के रूप में।

इस पूरे मामले का एक बड़ा पहलू यह भी है कि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ने पर साइबर क्षेत्र एक अलग मोर्चा बन सकता है। मिसाइल और सैन्य कार्रवाई दुनिया को दिखाई देती है, लेकिन साइबर हमले पर्दे के पीछे हो सकते हैं और उनका असर सरकारी संस्थानों से लेकर जरूरी सेवाओं तक पहुंच सकता है। अमेरिकी एजेंसियां पहले ही ईरान-संबद्ध साइबर गतिविधियों को लेकर सतर्क रहने की अपील कर चुकी हैं।

अब आने वाले दिनों में सबसे बड़ा सवाल यही है कि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव किस दिशा में जाता है। क्या साइबर हमले बढ़ेंगे? क्या अमेरिका अपने क्रिटिकल इंफ्रास्ट्रक्चर की सुरक्षा और मजबूत करेगा? और क्या दोनों देशों के बीच बढ़ता तनाव साइबर दुनिया को भी एक नए संघर्ष का मैदान बना देगा? फिलहाल इतना साफ है कि अमेरिका ने ईरान से जुड़े साइबर खतरे को गंभीरता से लिया है और उसकी सुरक्षा एजेंसियां महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर लगातार अलर्ट जारी कर रही हैं।

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