
सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ के डीजीपी को लगाई कड़ी फटकार।
INDIA LIVE: छत्तीसगढ़ में कस्टोडियल डेथ यानी पुलिस/न्यायिक हिरासत में हुई मौत के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने राज्य पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर नाराजगी जताई है। सुनवाई के दौरान अदालत ने DGP अरुणदेव गौतम की भूमिका पर भी तीखी टिप्पणी की और उनकी कार्यशैली पर सवाल उठाए।
मामला बिलासपुर के सीपत थाना क्षेत्र का है, जहां जनवरी 2024 में श्रवण सूर्यवंशी को आबकारी कानून के तहत गिरफ्तार किया गया था। जेल भेजे जाने के बाद उसकी तबीयत बिगड़ी और 22 जनवरी 2024 को अस्पताल में उसकी मौत हो गई।
सबसे बड़ा सवाल यह उठा कि मौत के बाद भी FIR दर्ज करने में करीब ढाई साल की देरी क्यों हुई। रिपोर्ट के मुताबिक FIR 30 जुलाई 2026 को दर्ज की गई। सुप्रीम कोर्ट ने इस देरी और जांच की प्रक्रिया पर गंभीर आपत्ति जताई।
न्यायिक जांच में मृतक के सिर पर गंभीर चोट का उल्लेख होने के बावजूद कार्रवाई में देरी को लेकर अदालत ने पुलिस प्रशासन से जवाब मांगा। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह भी कहा कि उपलब्ध रिकॉर्ड को देखते हुए राज्य पुलिस की जांच क्षमता पर भरोसा करना मुश्किल है।
अब सुप्रीम कोर्ट मामले की निष्पक्ष जांच, जिम्मेदारी तय करने और पीड़ित परिवार को उचित राहत जैसे पहलुओं पर विचार कर रहा है। मामले की सुनवाई जारी है और अंतिम फैसला अभी बाकी है।