
ईरान युद्ध लंबा चला तो ट्रंप की कुर्सी जाना तय।
IRAN US WAR:ईरान के साथ लंबा खिंचता युद्ध अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन के लिए गंभीर राजनीतिक और आर्थिक संकट पैदा कर रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान की रणनीति इस जंग को ट्रंप के कार्यकाल (2029 तक) या आगामी मध्यावधि चुनावों (Midterm Elections) तक खींचकर अमेरिकी नेतृत्व पर दबाव बनाने की है। हालांकि इससे ट्रंप की कुर्सी जाना तय है या नहीं, यह सीधे तौर पर नहीं कहा जा सकता, लेकिन घरेलू स्तर पर उनकी मुश्किलें जरूर बढ़ रही हैं।

ईरान और अमेरिका के बीच जारी संघर्ष लंबा खिंचता जा रहा है और इसका सीधा असर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की घरेलू राजनीति पर भी पड़ रहा है। हालिया रिपोर्टों के मुताबिक, युद्ध के कारण ईंधन की कीमतों और महंगाई का दबाव बढ़ रहा है, जबकि अमेरिकी मतदाताओं में युद्ध को लेकर असंतोष भी सामने आ रहा है।
सबसे बड़ी चुनौती नवंबर 2026 के मिडटर्म चुनाव हैं। लंबे युद्ध को लेकर रिपब्लिकन खेमे में भी चिंता बढ़ने की खबरें हैं। अगर युद्ध जारी रहता है और इसका आर्थिक बोझ अमेरिकी जनता पर बढ़ता है, तो इसका असर रिपब्लिकन पार्टी के चुनावी प्रदर्शन पर पड़ सकता है।
ईरान-अमेरिका वार्ता में भी फिलहाल कोई ठोस प्रगति नहीं दिख रही है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर दोनों देशों के बीच टकराव जारी है और अमेरिका ने ईरान पर लंबे समय तक नौसैनिक नाकेबंदी बनाए रखने की क्षमता जताई है।

कुछ विश्लेषकों का मानना है कि यदि युद्ध लंबा खिंचता है, तो ट्रंप के सामने बढ़ती महंगाई, महंगा ईंधन, गिरती लोकप्रियता और चुनावी नुकसान जैसी राजनीतिक चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं। हालांकि, यह कहना कि युद्ध लंबा चलने मात्र से ट्रंप की राष्ट्रपति पद की “कुर्सी जाना तय” है, अभी एक राजनीतिक अनुमान है—ऐसा कोई संवैधानिक या चुनावी परिणाम तय नहीं है।
यानी असली सवाल यह है—क्या ट्रंप ईरान युद्ध को जल्द खत्म कर पाएंगे, या यह संघर्ष 2026 के अमेरिकी चुनावों में उनके लिए सबसे बड़ी राजनीतिक चुनौती बन जाएगा?