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ट्रम्प की ईरान को फिर हमले की धमकी, तेहरान का पलटवार—हमला हुआ तो समुद्र में बिछी इंटरनेट केबल काट देंगे!

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ट्रम्प की ईरान को फिर हमले की धमकी, तेहरान का पलटवार—हमला हुआ तो समुद्र में बिछी इंटरनेट केबल काट देंगे!

IRAN-US  TENSION: वास्तविक सैन्य या रणनीतिक कदमों में बदलती हैं, तो इसका असर केवल अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि दुनिअमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ने की खबरों ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल पैदा कर दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की ओर से ईरान के खिलाफ दोबारा सैन्य कार्रवाई की धमकी और इसके जवाब में समुद्र के भीतर बिछी इंटरनेट केबलों को निशाना बनाने की कथित चेतावनी ने वैश्विक सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं। यदि इस तरह की धमकियांया की डिजिटल कनेक्टिविटी और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी पड़ सकता है।

हालांकि, इन विशिष्ट बयानों और इंटरनेट केबल काटने की कथित धमकी की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है। इसलिए इसे फिलहाल पुष्ट सैन्य फैसले के बजाय रिपोर्ट की गई चेतावनी के रूप में देखना चाहिए।

अमेरिका-ईरान के बीच क्यों बढ़ रहा तनाव?

अमेरिका और ईरान के संबंध लंबे समय से तनावपूर्ण रहे हैं। ईरान के परमाणु कार्यक्रम, पश्चिम एशिया में उसके क्षेत्रीय प्रभाव, आर्थिक प्रतिबंधों और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर दोनों देशों के बीच लगातार मतभेद रहे हैं। समय-समय पर कूटनीतिक बातचीत के प्रयास हुए हैं, लेकिन कई मुद्दों पर सहमति नहीं बन पाने के कारण तनाव बना रहता है।

 

डोनाल्ड ट्रम्प के नेतृत्व में ईरान के प्रति अमेरिकी नीति का रुख पहले भी सख्त रहा है। अमेरिकी प्रशासन ईरान के परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय गतिविधियों को लेकर दबाव बनाने की रणनीति अपनाता रहा है। दूसरी ओर, ईरान अमेरिकी प्रतिबंधों और सैन्य दबाव का विरोध करता है तथा किसी भी संभावित हमले का जवाब देने की चेतावनी देता रहा है।

ऐसे माहौल में सैन्य कार्रवाई की धमकी और जवाबी चेतावनियां स्थिति को और संवेदनशील बना सकती हैं। किसी भी संभावित टकराव का असर तेल बाजार, समुद्री व्यापार, क्षेत्रीय सुरक्षा और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।

इंटरनेट केबलों को निशाना बनाने की बात क्यों अहम?

समुद्र के नीचे बिछी फाइबर-ऑप्टिक केबलें दुनिया के इंटरनेट नेटवर्क की रीढ़ मानी जाती हैं। इन्हीं के जरिए देशों और महाद्वीपों के बीच बड़ी मात्रा में डिजिटल डेटा का आदान-प्रदान होता है। अंतरराष्ट्रीय इंटरनेट ट्रैफिक, वित्तीय लेनदेन, कारोबारी संचार और क्लाउड सेवाओं का बड़ा हिस्सा इन केबलों पर निर्भर करता है।

यदि समुद्र के भीतर स्थित महत्वपूर्ण केबलों को जानबूझकर नुकसान पहुंचाया जाता है, तो कुछ क्षेत्रों में इंटरनेट की गति धीमी हो सकती है, डेटा ट्रांसफर बाधित हो सकता है और दूरसंचार सेवाओं पर दबाव बढ़ सकता है। हालांकि, इसका असर इस बात पर निर्भर करेगा कि कौन-सी केबल प्रभावित हुई है, नेटवर्क के पास कितने वैकल्पिक रास्ते उपलब्ध हैं और मरम्मत में कितना समय लगता है।

यह समझना भी जरूरी है कि समुद्र के नीचे केबलों में खराबी हमेशा किसी देश के हमले के कारण नहीं होती। जहाजों के लंगर, मछली पकड़ने की गतिविधियों, प्राकृतिक घटनाओं और तकनीकी खराबियों से भी केबल क्षतिग्रस्त हो सकती हैं। इसलिए किसी घटना के पीछे जिम्मेदारी तय करने के लिए ठोस सबूत जरूरी होते हैं।

 

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