
ढाई लाख मे अवैध हिरासत से रिहा हुआ लालकृष्ण
रायबरेली : डीह थानाध्यक्ष राकेश कुमार यादव को अपनी योग्यता और खाकी का इतना गुरूर है,कि उन्हें जिले के पुलिस कप्तान के आदेश और पुलिस के रेगुलेशन एक्ट के निर्देशों में भी झोलझाल नजर आता है। एसओजी में विवादित कार्यशैली के चलते इन्हें हटाया गया था। एसओजी में इनका कार्यकाल कुछ दिन का रहा इससे यह अंदाजा लगाया जा सकता है। कि इनकी कार्यशैली हमेशा अमर्यादित रही है। डीह थानेदार बनते ही इन्होंने कानून के नियम और कायदे को ताक पर रख दिया। इसे सिस्टम की मजबूरी समझा जाए व पुलिस कप्तान की परख को दोष दिया जाए। जिसकी वजह से ऐसे मुलाजिम को थानेदार जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई। सभी मामलों में अपने उच्च अधिकारियों को गुमराह करना और खुद को सर्वोपरि रखने के लिए पुलिस कप्तान को गुमराह करना इनकी फितरत में है। वही थानेदार का अनोखा कारनामा 48 घंटे से अवैध हिरासत में थाने पर बैठाए गए व्यक्ति से इनकार कर दिया है। जबकि थाने पर मौजूद चश्मदीदों की मानें तो ना तो कोई मुकदमा दर्ज किया है, और ना ही गिरफ्तारी से पूर्व परिवारिक लोगों को गिरफ्तारी की संपूर्ण सूचना दिया।
मामला डीह थाने के ग्राम हरिवंशराय मजरे खुरहटी का है। बताया जाता है कि लालकृष्ण नामक व्यक्ति गांव में ही पोल्ट्री फार्म चलाता है। लालकृष्ण पर आरोप यह बताया जा रहा है कि कंपनी ने लालकृष्ण को पोल्ट्री फार्म के लिए चूजे दिए थे। उसी के पैसों के लेनदेन में कुछ भूल चूक हुई। जिस पर कंपनी के असल पैरोकार के रूप में डीह थाने की पुलिस सामने आई और अवैध तरीके से लालकृष्ण को पकड़कर थाने ले आई । पहले लालकृष्ण की पिटाई की गई। उसके बाद पैसे मांगने का दबाव डाला जाने लगा। इस पर लालकृष्ण ने असमर्थता व्यक्त की, जिसके चलते डीह पुलिस अवैध रूप से हिरासत में थाने में रखे हुई थी। जब वही थानेदार से बात की गई तो उन्होंने पूरे मामले से अनभिज्ञता जाहिर किया है। जबकि थाने पर लालकृष्ण की मौजूदगी के तमाम साक्ष्य उपलब्ध हैं। यही नहीं रविवार को अवैध हिरासत से रिहा करते हुए एक बिचौलिए के माध्यम से ढाई लाख रुपए की रकम भी वसूली गई । इस अवैध वसूली और अवैध हिरासत की पुलिस अधीक्षक महोदय चाहे तो गोपनीय विभाग से जांच भी करा सकते हैं । जांच से स्पष्ट हो जाएगा की थानेदार थाने मे रहने के हकदार है या रिजर्व पुलिस लाइन ?