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कार्यकाल पूरा कर चुके ग्राम प्रधान की भ्रष्टाचार की नई चाल,भ्रष्टाचार करने की फिराक में है निवर्तमान ग्राम प्रधान

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सफीपुर,उन्नाव : गांवों का कायाकल्प करने के लिए केंद्र और राज्य सरकार हर साल एक-एक ग्राम पंचायत को लाखों करोड़ों रुपए वहां के शौचालय,नाली खडंजा, पानी, साफ सफाई, पक्के निर्माण के लिए देती है गांव के खेत खलिहानों में सिंचाई की सुविधा हो ये भी प्रधान का काम है लेकिन ज्यातादर लोग इस बारें में नहीं जानते है परंतु जनप्रतिनिधियों एवं जिम्मेदार अधिकारियों व कर्मचारियों द्वारा केवल अपना ही हित तथा विकास करने का 1 सूत्रीय कार्य किया जाता है जबकि ग्राम पंचायत के पात्र लोगों को केवल विकास के नाम पर लॉलीपॉप ही थमा दिया जाता है ग्राम प्रधानों के कार्यकाल समाप्त होने के बाद भी अब प्रधान विकास खंड कार्यालय के चक्कर लगा रहे हैं जिससे बची हुई धनराशि को किसी भी तरह से प्राप्त हो सके।

 

ऐसा ही मामला विकासखंड क्षेत्र के ग्राम पंचायत मऊ मंसूरपुर में प्रकाश में आया है। जहां पर ग्राम प्रधान द्वारा ग्राम पंचायत में स्वच्छ भारत मिशन के तहत बने शौचालय, तथा ग्राम पंचायत के प्रथम एवं राज्य वित्त खाते से हुए निर्माण कार्यों में जमकर सरकारी धन का बंदरबांट करते हुए सरकार के कल्याणकारी योजनाओं को तार-तार कर कागजों पर ही कार्य दिखाकर भुगतान कराए हैं तथा प्रधान माधुरी देवी का पुत्र सुखबीर पुत्र पुत्ती लाल जोकि आइटीबीपी  2016 से तैनात है जिसके भी खाते में ग्राम पंचायत द्वारा वित्तीय वर्ष 2017-18 में विकास कार्य में मनरेगा की 7 दिनों की मजदूरी दिखाकर 1225 रुपए उसके खाते में भी भेजी गई थी लेकिन शिकायतकर्ताओं की शिकायत के बाद ग्राम विकास अधिकारी द्वारा लिखित रूप से माना कि उक्त शिकायत सही है मगर गलत भुगतान बताकर ड्राफ्ट के माध्यम से पुनः रोजगार गारण्टी के खाते में वापस भेज दी गयी है वहीं शिकायतकर्ता शिवपाल, मदनलाल आदि लोगों का कहना है कि शिकायत को हमने दुबारा लिखित रूप में मुख्यमंत्री महोदय व मनरेगा आयुक्त लखनऊ को दी है ।

 

शिकायतकर्ता का कहना है कि जब उक्त शिकायत सही पाई गई है तो अभी तक सम्बंधित ग्राम प्रधान, ग्राम विकास अधिकारी व प्रधान पुत्र पर कोई विधिक कार्यवाही क्यों नहीं की गई कहाँ का कानून कहता है कि कोई भी सरकारी कर्मचारी नौकरी करते हुये सरकार के द्वारा दोहरा लाभ ले और सरकारी धन का गबनध्हनन करे और पकड़े जाने पर उस धनराशि को वापस कर देने से क्या वह दोष मुक्त हो जाएगा शिकायत कर्ता शिवपाल का कहना है कि उक्त प्रकरण में संलिप्त ग्राम विकास अधिकारी,रोजगार सेवक, प्रधान व प्रधान पुत्र के खिलाफ विधिक कार्यवाही कराने की मांग की है ।

 

वहीं ग्राम प्रधान द्वारा आम जन-मानस या जरूरतमंद लोगों को रोजगार ना देकर अपने ही परिवार के सदस्यों को जॉब कार्ड बना कर फर्जी तरीके से बिना काम कराए ही उनके खाते में भुगतान करा दिया जाता है जबकि वह लोग कभी भी कहीं भी किसी भी कार्य में काम करने के लिए नहीं पहुंचते हैं। ग्राम पंचायत के मजरा मऊ में बाबूलाल शर्मा के दरवाजे से विजय शर्मा,बुड्ढा आदि के दरवाजे तक जलभराव की स्थिति होने के बावजूद भी विकास के नाम पर वहां पर केवल लीपा-पोती ही की गई जबकि वहां पर खड़ंजा लगना बहुत ही आवश्यकता फिर भी ग्राम प्रधान व सचिव की मिलीभगत से विकास के नाम पर छलावा करते हुए निजी स्वार्थों के चलते केवल खानापूर्ति ही की गई है।

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