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कोरोना वारयस की वजह से नही उठा शाही मोम की ज़रीह का जुलूस

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लखनऊ : कर्बला मे शहीद हुए 72 मासूमीन के गम का महीना मोहर्रम शुक्रवार को शुरू हो गया लेकिन इस बार हज़रत इमाम हुसैन अ0स0 के चाहने वालो का गम और ज़्यादा इस लिए बढ़ गया क्यू कि मौजूदा समय मे पूरी दुनिया कोरोना वायरस की चपेट मे है और दुनिया के लगभग सभी देशो मे भीड़ भाड़ वाले धार्मिक कार्यक्रमो पर पूरी तरह से पाबन्दी है। कोरोना काल मे पड़े इस मोहर्रम मे शायद ये पहली बार देखने को मिला है जब किसी को नज़र न आने वाले कोरोना वायरस की वजह से पहली मोहर्रम को हुसैनाबाद ट्रस्ट की ओर से लखनऊ के बाड़े इमामबाड़े से छोटे इमामबाड़े तक शाही अन्दाज़ मे निकाला जाने वाला शाही मोम की ज़रीह का जुलूस नही निकाला गया।
शाही मोम की ज़रीह के साथ इस बार मोहर्रम के महीने मे निकाले जाने वाले सभी जुलूसों पर पूरी तरह से पाबन्दी है। लखनऊ के सात इमामबाड़ो मे सोशल डिस्टेंंसिग का पालन किए जाने की शर्त के साथ सिर्फ 7 इमाम बाड़ो में मजलिसे किए जाने की अनुमति पुलिस आयुक्त सुजीत पाडेण्य ने सशर्त दी है जिसमे कहा गया है कि मजलिस के दौरान इमामबाड़े मे मौलाना के अलावा सिर्फ 5 लोग ही मौजूद होंगे
कर्बला का मंज़र बयान करने के लिए भले ही 5 लोगो के साथ मजलिसे आयोजित करने की अनुमति मिली हो लेकिन शिया समुदाय के लोगो ने हज़रत इमाम हुसैन का गम मनाने के लिए इस अनुमति को भी स्वीकार कर लिया हालाकि सोशल डिस्टेंसिंग के साथ हो रही मजलिसो मे लोग डायरेक्ट तो शामिल नही हुए लेकिन इन मजलिसो मे आम अज़ादार अपने अपने घरो से आन लाईन शामिल हुए और कर्बला के शहीदो की याद मे आयोजित मजलिसों मे मौलाना द्वारा बयान किए गए ग़मग़ीन मंज़र को सुन कर अपने आसू रोक नही पाए। कोरोना काल के मोहर्रम की पहली तारीख को सरकारी गाईड लाईन के अनुसार इमाम बाड़ा गुफरान मआब, शिया कालेज,मदरसा नाज़मियां , म़कबरा सआदत अली खाॅ , इमाममाड़ा अफ़ज़ल महेल मे सोशल डिस्टेंंसिग के तहत मजलिसे आयोजित की गई।
आम दिनो मे मोहर्रम की पहली तारीख से पुराने लखनऊ मे अज़ादारो द्वारा सैक़ड़ो की सख्ंया मे सबीलो का आयोजन किया जाता था जहां से लोगो को तरह तरह का तर्बरूख बाटा जाता था लेकिन इस बार कोरोना वायरस की वजह से कही एक भी सबील नही लगाई गई और न ही सड़क पर किसी तरह के बैनर पोस्टर लगाए गए। दीने इस्लाम और इन्सानियत को बचाने के लिए कर्बला मे शहीद हुए हज़रत इमाम हुसैन अ0स0 और उनके साथियो का ग़म वैसे तो अज़ादार अपने अपने घरो मे दिल खोल कर मना रहे है लेकिन जिस तरह से हर वर्ष मोहर्रम का चाॅद नज़र आते ही पुराने लखनऊ के शिया बाहुल्य इलाको मे माहौल गम ज़दा नज़र आने लगता था वो नज़ारा इस बार कोरोना वायरस की वजह से कम ही नज़र आया।

नही निकाला गया शाही ज़रीह का जुलूस ग़म मे डूबे अज़ादार
हज़रत इमाम हुसैन और उनके साथियो का ग़म मनाने के लिए शिया समुदाय के लिए पहली मोहर्रम से गम का जो सिलसिला शुरू होता है वो सिलसिला बिना रूके पूरे दो महीने आठ दिनो तक जारी रहता है पहली मुहर्रम को बड़े इमामबाड़े से हुसैनाबाद ट्रस्ट की ओर से निकाला जाने वाला शाही मोम की ज़रीह का जुलूस भी इस बार नही निकाला गया । शाही मोम की ज़रीह का जुलूस पहली मोहर्रम को शाम करीब 7 बजे बड़े इमाम बाड़े से शाही शानो शौकत के साथ निकाला जाता था ।
शाही मोम की ज़रीह के जुलूस मे जुलूस मे फाटक स्याह बाबत जुलूसे ज़रीह, शाही बाजा हुसैनाबाद मुबारक, रौशन चैकी बराए शहनाई मय साउन्ड 12 अदद , कहार, सबील मय शरबत 12 अदद, हाथी मय माही मरातिब (ताज माही शेरे दहां सूरज चाॅद) 6 अदद, ऊॅट मय सैफ हाय बिरंजी 20 अदद , गोल झंण्डी 30 अदद , पुलिस बैन्ड, के अलावा भी जुलूस मे शाही साज़ो सामान को शामिल किया जाता था । जुलूस मे शामिल पुलिस बैन्ड पर मातमी धुने बज रही थी और जुलूस मे शामिल मासूब बच्चे अपने हाथो मे परचम लेकर चलते थे। इसके अलावा जुलूस के मार्ग पर अकीदतमंद अज़ादारो की तरफ से कई सबीलो का आयोजन भी किया जाता था

जुलूस के मार्ग पर सुरक्षा के मददे नज़र पुलिस का सख्त पहरा हुआ करता था लेकिन इस बार कोरोना वायरस की वजह से न तो जुलूस ही निकाला गया और न ही जुलूस से पहले इमामबाड़े मे आयोजित की जाने वाली मजलिस हुई हुई। पिछली बार पहली मोहर्रम को जो सड़क अज़ादारो की भीड़ से भरी रहती थी वो सड़क आज पूरी तरह से सूनी पड़ी रही  पहली मोहर्रम को जुलूस न निकलने का दर्द अज़ादारो के चेहरे पर साफ देखा गया।

पहली मोहर्रम को शिया धर्म गुरू मौलाना कल्बे जव्वाद नक़वी ने  चौक स्थित इमामबाड़ा गुफरान मआब मे सोशल डिस्टेंंसीग के साथ सुबह दस बजे मजलिस शुरू करते हुए कहा कि कर्बला सब्र का दूसरा नाम है मौलाना ने कहा कि कर्बला मे सब कुछ अपने हाथ मे होते हुए भी नवासा-ए-रसूल हज़रत इमाम हुसैन अ0स0 ने अपने 72 साथियो के साथ कुर्बानी दी ये उनका सब्र था उन्होने कहा कि हम ज़िन्दा रहेंगे तो दोबारा ग़म मनाएगे
उन्होने कर्बला का ज़िक्र करते हुए कहा कि जिस वक़्त यज़ीदी फौजों ने कर्बला मे इमाम हुसैन के लश्कर के खेमो मे आग लगा दी थी उस समय जनाबे ज़ैनब ने अपने भाई से कहा था कि अपनी जान बचाना वाजिब है इस लिए सब लोग अपने अपने खेमो से बाहर निकल जाए मौजूदा समय मे भी कोरोना वायरस इन्सानी जानो का दुशमन है इस वबा से अपनी और अपनो की जान बचाना भी ज़रूरी है उन्होने मजलिस के ज़रिए लोगो से अपील करते हुए कहा कि सब्र से काम लेते हुए सरकारी गाईड लाईन के अनुसार मोहर्रम मनाए उन्होने कहा कि सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए मास्क ज़रूर लगाए।
मौलाना कल्बे जव्वाद गुफरान मआब इमामबाड़े मे मजलिस को खिताब कर रहे थे और इस मजलिस में इमाम हुसैन के चाहने वाले हज़ारो अज़ारदार आन लाईन शामिल थे मौलाना मजलिस मे कर्बला का मंज़र बयान कर रहे थे और मजलिस मे आन लाईन शामिल अज़ादारो की आखो से ज़ारो क़तार आसू बह रहे थे। शहर लखनऊ मे सशर्त सोशल डिस्टेंसिंग के साथ हुई सभी 7 मजलिसो को दुनिया भर के लोगो ने सोशल मीडिया के माध्यम से सीधे तौर पर सुना और देखा भी।
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