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पूर्व प्रधान मंत्री राजीव गांधी की पुण्यतिथि पर कांग्रेस जनों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की

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लखनऊ : पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की पुण्यतिथि पर आज पूरे उत्तर प्रदेश में कांग्रेस जनों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्हे युगदृष्टा और भारत में संचार क्रांति का जनक बताते हुए कांग्रेस ने कहा कि उन्होंने देश को इक्कीसवीं सदी के भारत का सपना दिया और राष्ट्रीय एकता के लिए जीवन कुर्बान कर दिया। लखनऊ में कालिदास मार्ग और मॉल एवेन्यू चौराहों पर स्व.राजीव गांधी की प्रतिमा पर माल्यार्पण के लिए आज सुबह भारी संख्या में कांग्रेस जन जुटे। इसके बाद पार्टी मुख्यालय स्थित राजीव गांधी सभागार में हुई गोष्ठी में वक्ताओं ने उनकी कुर्बानी को याद किया।

वक्ताओं ने कहा कि संजय गांधी के निधन के बाद उत्पन्न हुई विशेष परिस्थिति में राजनीति से दूर रहे राजीव गांधी राजनीति में आये और अपने सौम्य व्यवहार और कुशल नेतृत्व की वजह से जल्दी ही राजनीतिक क्षितिज पर छा गये। इंदिरा गांधी की शहादत के बाद उन्होंने बतौर प्रधानमंत्री देश की बागडोर संभाली और देश को इक्कीसवीं सदी की चुनौतियों के लिए तैयार करने में जुट गये। उन्होंने सबसे पहले कंप्यूटर के महत्व से देशवासियों को परिचित कराया। देश में संचार क्रांति की आधारशिला रखी जो शुरुआती पीसीओ बूथ से चलते हुए आज हर हाथ में मोबाइल तक पहुँची।

उन्होंने नवोदय विद्यालयों की कल्पना की जो राष्ट्रीय एकता के लिहाज से एक महत्वपूर्ण पहल थी। वक्ताओं ने कहा कि 18 साल के युवाओं को मताधिकार देने से लेकर पंचायती राज तक की उनकी क्रांतिकारी सोच ने भारतीय समाज का नक्शा बदल दिया। दक्षिण एशिया क्षेत्रीय सहयोग संगठन यानी सार्क के ज़रिये उन्होंने पड़ोसी देशों से संबंध सुधारते हुए उन्हें एक आर्थिक मोर्चे में बदलने का ऐतिहासिक काम किया। यही नहीं 1986 में गांव-गांव शुद्ध पेयजल पहुँचाने की उनकी योजना ने ग्रामीण भारत के स्वास्थ्य में उल्लेखनीय सुधार किया।

इस अवसर पर पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने उनसे निजी संबंधों को भी याद किया। उन्होंने बताया कि राजीव गांधी का मुस्कराता सौम्य चेहरा नौजवानों में जोश भर देता था। उनके नेतृत्व में पार्टी जिस तरह पूरे भारत में मज़बूत हुई, वह मिसाल है। उनके साथ बहुत छल हुआ लेकिन उन्होंने कभी कटुता नहीं दिखाई। उन्होंने भी इंदिरा गांधी की तरह राष्ट्रीय एकता के लिए जीवन कुर्बान करने की शपथ ली थी और वे सचमुच भारत के लिए कुर्बान हो गए। उनके बताए रास्ते पर चलकर कांग्रेस पार्टी एक बार फिर अपना गौरव वापस पा सकती है।

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