
उत्तर प्रदेश : राजधानी में क्राइम की बढती तेज़ी में एक नया मामला सामने आया है. मामला पीजीआई के वृंदावन कॉलोनी सेक्टर-14 में समीक्षा अधिकारी अजय यादव के मकान में हुए दुर्गेश हत्याकांड में मुख्य आरोपी पलक ठाकुर की कार पुलिस ने कृष्णानगर इलाके से बरामद कर ली है वही दूसरी ओर कार छुपाने वाले संतोष सिंह को गिरफ्तार किया है
आपको बता दे की हत्याकांड में शामिल अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने तीन टीमें रवाना की है .दुर्गेश के कमरे की तलाशी में कई दस्तावेज़ मिले है दस्तावेजों की जाँच जारी है इसमें 25 बेरोजगारों को भेजे गए रेलवे भर्ती बोर्ड के फर्जी नियुक्ति पत्र मिले है साथ ही बेरोजगारों से 5-10 लाख रुपये तक की वसूली की गई है
प्रभारी निरीक्षक केके मिश्रा के मुताबिक, दुर्गेश के कमरे से 30 फर्जी सर्विस बुक मिली हैं .इसमें कर्मचारियों के नाम भी दर्ज हैं .उनके अंगूठे के निशान भी लगे हैं . बेरोजगारों को झांसे में लेने के लिए इस सर्विस बुक का प्रयोग किया जाता था पुलिस ने इन सर्विस बुक को जांच के लिए फोरेंसिक लैब भेज दिया है
बेरोजगारों के अंकपत्र व आधार कार्ड बरामद
पुलिस को छानबीन में 120 बेरोजगार युवकों के अंकपत्र व आधार कार्ड सहित कई महत्वपूर्ण दस्तावेज मिले हैं.इसमें बैंक की 23 पासबुक भी हैं. पुलिस के मुताबिक, जालसाजों के वाहनों पर लगे सभी पास स्कैन किए हुए हैं . जांच के लिए पास सचिवालय भेजे गए हैं। वहीं, सचिवालय में जिस कर्मचारी ने जालसाजों की मदद की है .उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जाएगा.
पूर्वांचल व पश्चिमी क्षेत्र में फैला था नेटवर्क
पुलिस की पड़ताल में सामने आया के जालसाजी का नेटवर्क पूर्वांचल से पश्चिमी उत्तर प्रदेश तक फैला हुआ था. दुर्गेश गोरखपुर, मऊ, आजमगढ़, बस्ती, संतकबीरनगर, सिद्घार्थनगर, महराजगंज, देवरिया, कुशीनगर के बेरोजगारों को ठगता था. वहीं, दूसरी ओर पलक ठाकुर ने अंबेडकरनगर, अयोध्या, बाराबंकी, लखनऊ, कानपुर में नेटवर्क फैला रखा था। उधर, मनीष यादव व मानवेंद्र ने फर्रुखाबाद, बिजनौर, एटा, मेरठ, बरेली, फिरोजाबाद सहित पश्चिमी क्षेत्र के जिलों के बेरोजगारों से पैसों की माग करते थे .