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हाथ में हथकड़ी,पैरों में बेड़ियां,सलूक ऐसा मानों कि हम अपराधी हों’, अमेरिका से भेजे गए भारतीयों का छलका दर्द

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Illegal Indian Immigrants in America: अमेरिका से अवैध भारतीय प्रवासियों का पहला जत्था बुधवार को अमृतसर पहुंचा। अमेरिकी सेना के विमान सी-17 ग्लोबमास्टर में सवार होकर आए 204 भारतीयों में से कई ने अपनी इस यात्रा के बेहद बुरे अनुभव साझा किए हैं।

लोगों का कहना है कि विमान में उन्हें अपराधियों की तरह रखा गया। उनके हाथों में हथकड़ी और पैरों में बेड़ियां डाल दी गईं। करीब 40 घंटे की इस यात्रा में शौच के लिए भी उन्हें जद्दोजहद करनी पड़ी। कई लोगों का दावा है कि अमेरिका जाने के चक्कर में उनकी जीवन भर की जमा पूजी और कमाई डूब गई। बता दें कि राष्ट्रपति बनने के बाद डोनाल्ड ट्रंप अवैध प्रवासियों को अमेरिका से बाहर निकाल रहे हैं।

अमेरिका की कानूनी एजेंसियों ने ऐसे करीब 18 हजार अवैध प्रवासी भारतीयों की पहचान की है जिन्हें वापस भारत भेजा जाएगा। वहीं, डिपोर्टेशन का यह मुद्दा भारत में एक बड़ा सियासी मुद्दा बन गया है। विपक्ष ने सरकार पर ट्रंप के आगे झुकने का आरोप लगाया है। चूंकि बजट सत्र चल रहा है। ऐसे में विपक्ष सदन में सवाल से तीखे सवाल कर रहा है। गुरुवार को संसद की कार्यवाही जब शुरू हुई तो विपक्ष के सांसदों ने अवैध प्रवासियों के मुद्दे पर तत्काल चर्चा कराने की मांग की।

 

अमृतसर पहुंचने पर ही बेड़ियां खोली गईं: 

पंजाब के गुरदासपुर के रहने वाले 36 साल के जसपाल सिंह ने बताया कि अमेरिका में जब उन्हें विमान में चढ़ाया गया तो उन्हें लगा कि सभी लोगों को किसी दूसरे कैंप ले जाया जा रहा है लेकिन एक अधिकारी ने बताया कि वे उन्हें भारत ले जा रहे हैं। जसपाल का कहना है कि विमान में उन्हें हथकड़ी लगाई गई और पैरों में बेड़ियां डाल दी गईं। अमृतसर पहुंचने पर ही हथकड़ी और बेड़ियों को खोला गया। जसपाल ने बताया कि भारत भेजे जाने से पहले उन्हें अमेरिका में 11 दिनों तक हिरासत में रखा गया।

“एजेंट ने 42 लाख रुपये ले लिए”

अमेरिका से आए विमान में 33-33 लोग हरियाणा एवं गुजरात के, 30 पंजाब के, तीन-तीन महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश के तथा दो चंडीगढ़ के हैं।

पंजाब के जिन 30 लोगों को निर्वासित किया गया है, उनमें छह कपूरथला के, पांच अमृतसर के, चार-चार पटियाला और जालंधर के, दो-दो होशियारपुर, लुधियाना, एसबीएस नगर के और एक-एक गुरदासपुर, तरनतारन, संगरूर, एसएएस नगर और फतेहगढ़ साहिब के हैं। होशियारपुर जिले के ताहली गांव का रहने वाला हरविंदर सिंह (41) पंजाब से निर्वासित लोगों में शामिल है। वह लगभग आठ महीने पहले अमेरिका चला गया था। उसकी पत्नी कुलजिंदर कौर ने दावा किया कि एक ट्रैवल एजेंट ने हरविंदर को कानूनी तरीके से अमेरिका भेजने का वादा करके 42 लाख रुपये लिए।

अवैध और खतरनाक मार्ग से भेजा

 

कुलजिंदर ने कहा कि हालांकि, एजेंट ने हरविंदर को अमेरिका में प्रवेश के लिए प्रवासियों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले अवैध और खतरनाक मार्ग से वहां भेजा। उसने बताया कि हरविंदर ने आखिरी बार 15 फरवरी को परिवार से संपर्क किया और बताया कि वह अमेरिकी सीमा में दाखिल हो चुका है।

कुलजिंदर के अनुसार, ‘उसके बाद कोई बातचीत नहीं हुई। हमें आज हरविंदर के निर्वासन के बारे में पता चला।’ उसने कहा, ‘बेहतर भविष्य की उम्मीद में, हमारे पास जो कुछ भी था, उसे हमने बेच दिया और एजेंट को भुगतान के लिए उच्च ब्याज दर पर पैसे उधार लिए। लेकिन उसने (एजेंट) हमें धोखा दिया। अब न केवल मेरे पति को निर्वासित कर दिया गया है, बल्कि हम भारी कर्ज के बोझ तले भी दब गए हैं।’

अंधेरे में नजर आ रहा भविष्य: 

कुलजिंदर ने सरकार से मदद की गुहार लगाते हुए ट्रैवल एजेंट के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की अपील की। होशियारपुर के दारापुर गांव में कर्ज के बोझ तले दबे सुखपाल (35) के परिवार को अपना भविष्य अंधेरे में नजर आ रहा है। पेशे से शेफ सुखपाल अक्टूबर 2024 में एक साल के ‘वर्क परमिट’ पर इटली गया था। उसके परिवार ने कहा कि वह इस बात से पूरी तरह से अनजान है कि सुखपाल कैसे अमेरिका पहुंचा। सुखपाल के पिता प्रेम सैनी सरकारी स्कूल के अध्यापक रह चुके हैं। उन्होंने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि सुखपाल के वीजा के लिए सभी आवश्यक दस्तावेजों की व्यवस्था इटली में उनके रिश्तेदारों ने की थी।

 

…20-22 दिन पहले वह इटली में ही था

 

सैनी ने कहा, ‘जहां तक हमें पता था, वह इटली में कानूनी रूप से शेफ के रूप में काम कर रहा था और उसके पास सभी वैध दस्तावेज थे। हमने उससे आखिरी बार लगभग 20-22 दिन पहले बात की थी और तब वह इटली में ही था। उसने कहीं और जाने के बारे में कोई जिक्र नहीं किया। उसके बाद से हमारी उससे कोई बातचीत नहीं हुई।’ सैनी ने कहा, ‘आज हमें मीडिया से उसके निर्वासन के बारे में पता चला। हमें नहीं मालूम कि वह अमेरिका कब, कैसे और क्यों पहुंचा। उसके घर पहुंचने के बाद ही हमें उसकी अमेरिका यात्रा के पीछे की असली कहानी पता चलेगी।’

अमेरिका जाने के लिए 45 लाख रुपये खर्च किए

 

कपूरथला के बेहबल बहादुर निवासी गुरप्रीत सिंह के परिवार ने उसे विदेश भेजने के लिए अपना घर गिरवी रख दिया था। गुरप्रीत के परिवार के एक सदस्य ने कहा, ‘हमने कर्ज लिया, घर गिरवी रखा और रिश्तेदारों से भी पैसे उधार लिए। हमने उसे अमेरिका भेजने के लिए 45 लाख रुपये खर्च किए। अब मीडिया में आई खबरों से पता चला है कि उसे निर्वासित कर दिया गया है। फतेहगढ़ साहिब के जसविंदर सिंह की कहानी भी कुछ ऐसी ही है, जिसे अमेरिका भेजने के लिए उसके परिजनों ने 50 लाख रुपये खर्च किए। इसके लिए उन्हें ऊंची ब्याज दर पर कर्ज लेना पड़ा और रिश्तेदारों से मदद भी मांगनी पड़ी। जसविंदर के एक परिजन ने कहा, ‘हमने सोचा था कि वह वहां पैसे कमा लेगा।’ गुरदासपुर जिले के हरदोरावल गांव का रहने वाला जसपाल सिंह (36) पिछले महीने ही अमेरिका गया था। उनके चचेरे भाई जसबीर सिंह ने कहा, ‘हमें बुधवार सुबह मीडिया के माध्यम से उसके निर्वासन के बारे में पता चला।’

 

20-25 लाख रुपये कर्ज लेना पड़ा:

जसबीर ने कहा, ‘ये सरकारों के मुद्दे हैं। जब हम काम के लिए विदेश जाते हैं, तो हमारे पास अपने परिवार के बेहतर भविष्य के लिए बड़े सपने होते हैं। ये सपने अब टूट चुके हैं।’ मोहाली के जरौट गांव में प्रदीप सिंह (21) के परिवार के सदस्यों ने राज्य सरकार से मदद मांगी और कहा कि उन्होंने उसे अमेरिका भेजने के लिए भारी कर्ज लिया है। परिजनों ने दावा किया प्रदीप को उज्ज्वल भविष्य के लिए अमेरिका भेजने के वास्ते उन्हें अपनी जमीन बेचनी पड़ी और 20-25 लाख रुपये कर्ज लेना पड़ा। लेकिन चूंकि, प्रदीप को निर्वासित कर दिया गया है, इसलिए परिवार के सदस्यों ने मांग की कि या तो राज्य सरकार उन्हें कर्ज चुकाने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करे या फिर प्रदीप को सरकारी नौकरी दे।

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