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Imran Pratapgarhi की कविता पर Supreme Court ने गुजरात पुलिस को बुरी तरह फटकारा।

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Imran Pratapgarhi की कविता पर Supreme Court ने गुजरात पुलिस को बुरी तरह फटकारा।

इंडिया Live:  सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस के राज्यसभा सांसद इमरान प्रतापगढ़ी की याचिका पर फैसला सुरक्षित रखा है। कांग्रेस सांसद ने सोशल मीडिया पर पोस्ट की गई कविता को लेकर गुजरात के जामनगर में दर्ज एफआईआर रद्द करने की मांग की है। SC ने कांग्रेस सांसद को राहत देते हुए कहा कि पुलिस ने मामले में संवेदनशीलता की कमी दिखाई है। ईमरान प्रतापगढ़ी पर इल्जाम है कि उनकी सोशल मीडिया पर मौजूद वीडियो भड़काऊ और मुल्क की एक्ता के लिए खतरा पैदा करने वाली है. सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की 3 मार्च को हुई सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के एक जज ने पुलिस को फटकार लगाते हुए कहा कि संविधान लागू हुए 75 साल हो गए हैं, कम से कम पुलिस को फ्रीडम ऑफ एक्सप्रेशन को समझना चाहिए. साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह कविता हिंसा को नहीं अहिंसा को बढ़ावा देने वाली है.

इस मामले की सुनवाई जस्टिस अभ्य एस ओके और जस्टिस उज्जवल भुइयां की बेंच कर रही है. पीठ ने सुनवाई के दौरान संविधान के अनुच्छेद 19 (1) के तहत फ्रीडम ऑफ एक्सप्रेशन को हाइलाइट किया है. साथ ही कोर्ट ने पुलिस को फटकार भी लगाई है. जस्टिस ओका ने सुनवाई के दौरान कहा जब अभिव्यक्ति की आज़ादी की बात आती है, तो इसे सुरक्षित करना होगा. उन्होंने आगे कहा कि प्राथमिकी दर्ज करने से पहले पुलिस को कुछ संवेदनशीलता दिखानी होगी. उन्हें (संविधान के अनुच्छेद को) पढ़ना और समझना चाहिए.

जस्टिस ओके ने कहा कि यह कविता वास्तव में अहिंसा को बढ़ावा देने वाली है. उन्होंने कहा कि इसके ट्रांसलेशन में कुछ खामियां दिख रही है. उन्होंने आगे कहा कि यह कविता किसी मज़हब के खिलाफ नहीं है. बल्कि यह कविता अप्रत्यक्ष रूप से कहती है कि भले ही कोई हिंसा में शामिल हो लेकिन हम हिंसा में शामिल नहीं होंगे.

बता दें कि गुजरात सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि इस कविता का लोगों ने अलग तरह से अर्थ समझा होगा। तुषार मेहता की इस टिप्पणी पर न्यायमूर्ति ओका ने कहा कि यही समस्या है। अगर आप कविता को सही तरीके से पढ़ते तो इसका अर्थ समझते। जस्टिस ने कहा कि जो खून के प्यासे हैं वे हमारी बात सुनें। अगर न्याय की लड़ाई का सामना अन्याय से भी होता है तो हम उस अन्याय का जवाब प्यार से देंगे। राज्यसभा में कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी का दिखा अलग अंदाज,

मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। विपक्षी दलों ने उनके बयान को सांप्रदायिक बताया है, जबकि भाजपा नेताओं ने इसे हिंदू समाज के उत्थान के लिए जरूरी बताया है। अब देखना यह होगा कि इस बयान पर राहुल गांधी और ममता बनर्जी की ओर से क्या प्रतिक्रिया आती है।

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