
अपना दल (एस) ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर की मोनिका आर्या और अरविन्द बौद्ध को पद से हटाने की मांग
गठबंधन धर्म की गरिमा बनाए रखने पर दिया ज़ोर, कहा— पार्टी से निष्कासित लोगों को नहीं मिलनी चाहिए जिम्मेदारी
लखनऊ:एनडीए में शामिल घटक दल अपना दल (सोनेलाल) ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर दो पदाधिकारियों को तत्काल प्रभाव से हटाने की मांग की है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष जाटव आर. पी. गौतम द्वारा लिखे गए पत्र में कहा गया है कि पूर्व में पार्टी कोटे से नियुक्त की गईं मोनिका आर्या (अपर शासकीय अधिवक्ता) और अरविन्द बौद्ध (पूर्वांचल विकास बोर्ड के सदस्य) अब पार्टी की मूल नीतियों और अनुशासन के अनुरूप आचरण नहीं कर रहे हैं।पत्र में कहा गया है कि मोनिका आर्या और अरविन्द बौद्ध को तीन वर्ष पूर्व ही पार्टी से निष्कासित कर दिया गया था, लेकिन हाल ही में उन्हें अपना दल (एस) को विश्वास में लिए बिना ही पुनः उनके पदों पर नामित कर दिया गया है। यह निर्णय न केवल गठबंधन धर्म की भावना के विरुद्ध है बल्कि संगठन की प्रतिष्ठा और कार्यकर्ताओं के मनोबल को भी प्रभावित करता है।
प्रदेश अध्यक्ष ने आग्रह किया है कि दोनों पदाधिकारियों को उनके पदों से तत्काल हटाया जाए और उनकी जगह पर अपना दल (एस) कोटे से नए नामों की अनुशंसा को स्वीकार किया जाए। पत्र में स्पष्ट किया गया है कि पार्टी सामाजिक न्याय और पारदर्शिता के मूल सिद्धांतों के साथ गठबंधन धर्म को पूरी गंभीरता से निभा रही है, लेकिन ऐसी नियुक्तियां कार्यकर्ताओं में असमंजस और असंतोष उत्पन्न करती हैं।पत्र की शुरुआत में पार्टी संस्थापक डॉ. सोनेलाल पटेल, बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर और सरदार वल्लभ भाई पटेल को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए पार्टी की विचारधारा को दोहराया गया। साथ ही यह भी स्मरण कराया गया कि अपना दल (एस) 2014 से एनडीए का प्रमुख घटक रहा है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में गठबंधन धर्म का पालन करते हुए प्रदेश और देश के विकास में सक्रिय भूमिका निभा रहा है।
इस पत्र के माध्यम से पार्टी ने गठबंधन के भीतर पारदर्शिता, सम्मान और संवाद की आवश्यकता को दोहराया है।
