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लखनऊ: जालसाज़ी कर ज़मीन हड़पने के मामले में मोहनलालगंज पुलिस को बड़ी सफलता, फरार आरोपी गिरफ्तार

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लखनऊ: जालसाज़ी कर ज़मीन हड़पने के मामले में मोहनलालगंज पुलिस को बड़ी सफलता, फरार आरोपी गिरफ्तार

लखनऊ: के मोहनलालगंज थाना क्षेत्र में फर्जी दस्तावेजों के जरिए ज़मीन हड़पने की साज़िश रचने वाले एक शातिर आरोपी को आखिरकार पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। आरोपी की पहचान संदीप कुमार गौतम पुत्र जगदीश प्रसाद, निवासी ग्राम मदारीखेड़ा, पोस्ट सरवा, जनपद हरदोई के रूप में हुई है। वह इस गंभीर मामले में लंबे समय से फरार चल रहा था। पुलिस ने उसे मुखबिर की सूचना पर रायबरेली-लखनऊ मार्ग स्थित किसान पथ पुल के नीचे से दबोचा और न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया।यह मामला 18 नवंबर 2023 को सामने आया था जब वादी जगदीश कुमार पुत्र छोटेलाल, निवासी बाजूपुर, थाना बीबीडी, लखनऊ ने मोहनलालगंज थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत के अनुसार, आरोपीगण ने धोखाधड़ी, जालसाज़ी और धमकी देने के साथ-साथ अनुसूचित जाति-जनजाति अधिनियम के तहत संगीन धाराओं में अपराध किया। वादी की ज़मीन गाटा संख्या 137, रकबा 0.278 हेक्टेयर (करीब 22 बिस्वा) को हड़पने के लिए आरोपीगण ने एक सुनियोजित साजिश के तहत जालसाज़ी को अंजाम दिया।विवेचना के दौरान पता चला कि ‘विजय सिंह’ नाम का व्यक्ति असल में कोई अस्तित्व नहीं रखता। जांच में यह भी खुलासा हुआ कि संस्कार पाण्डेय पुत्र राजेश पाण्डेय, निवासी इलाहाबाद, ने खुद को विजय सिंह के नाम से प्रस्तुत किया और अपने साथियों सभाजीत यादव व संदीप कुमार गौतम के साथ मिलकर यह साजिश रची। इन्होंने वादी को भरोसे में लेकर फर्जी तरीके से उसकी ज़मीन की रजिस्ट्री में हस्ताक्षर करवा लिए, परंतु उसे रजिस्ट्री कार्यालय में प्रस्तुत करने के बजाय जाली हस्ताक्षरों के माध्यम से ज़मीन को अपने नाम दर्ज करवा लिया।मुख्य आरोपी संस्कार पाण्डेय को पुलिस पहले ही गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है, वहीं दूसरा आरोपी संदीप कुमार घटना के बाद से ही फरार चल रहा था। पुलिस टीम ने लगातार निगरानी और खुफिया सूचना के आधार पर उसे गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की। मामले में तीसरे आरोपी सभाजीत यादव की तलाश अभी जारी है।गिरफ्तार आरोपी के विरुद्ध थाना मोहनलालगंज में आईपीसी की धारा 406, 420, 467, 468, 471, 504, 506 और अनुसूचित जाति एवं जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम की धारा 3(1)(द)(ध), 3(2)(va) व धारा 138 एनआई एक्ट के तहत मुकदमा पंजीकृत है।इस गिरफ्तारी में उपनिरीक्षक वीर बहादुर दुबे और कांस्टेबल विकास जायसवाल की भूमिका सराहनीय रही। पुलिस अब सभाजीत की गिरफ्तारी के लिए दबिशें दे रही है। लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट ने एक बार फिर यह साबित किया है कि अपराधियों के लिए राजधानी में कोई जगह नहीं है।

   

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