
मृत हिस्ट्रीशीटर का खाका नष्ट कर लखनऊ पुलिस ने की अभिलेखों की शुद्धि, अपराध नियंत्रण की दिशा में बड़ा कदम
मृत हिस्ट्रीशीटर का खाका नष्ट कर लखनऊ पुलिस ने की अभिलेखों की शुद्धि, अपराध नियंत्रण की दिशा में बड़ा कदम
लखनऊ: उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक के निर्देश पर चलाए जा रहे “मृत हिस्ट्रीशीटर का खाका नष्ट करने के विशेष अभियान” के अंतर्गत लखनऊ पुलिस ने पुलिस अभिलेखों की शुद्धता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में एक ठोस कार्रवाई की है। यह प्रयास अपराध और अपराधियों पर प्रभावी नियंत्रण के साथ-साथ पुलिस तंत्र को अधिक दक्ष और जवाबदेह बनाने की दिशा में उठाया गया एक महत्वपूर्ण कदम है।पुलिस कमिश्नरेट लखनऊ के जोन-पश्चिमी क्षेत्र स्थित सआदतगंज थाना क्षेत्र में इस अभियान के तहत एक मृत घोषित हिस्ट्रीशीटर का आपराधिक खाका विधिसम्मत प्रक्रिया के तहत नष्ट किया गया। यह कार्रवाई पुलिस आयुक्त अमरेन्द्र कुमार सेंगर के नेतृत्व, पुलिस उपायुक्त पश्चिमी विश्वजीत श्रीवास्तव, अपर पुलिस उपायुक्त धनंजय कुशवाहा के पर्यवेक्षण और सहायक पुलिस आयुक्त बाजारखाला वीरेन्द्र विक्रम सिंह के निर्देशन में सम्पन्न हुई।मृत घोषित किए गए हिस्ट्रीशीटर की पहचान एच.एस. 97ए शिवम उर्फ अमन मिश्रा पुत्र स्वर्गीय राजू उर्फ राजेश, निवासी 358/43 बिहारीपुर, थाना सआदतगंज के रूप में हुई है। उक्त व्यक्ति के आपराधिक रिकॉर्ड को नष्ट कर दिया गया है, जिससे पुलिस अभिलेखों में केवल जीवित और सक्रिय अपराधियों की जानकारी बनी रहे।इस अभियान का उद्देश्य न केवल संसाधनों का बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित करना है, बल्कि यह भी सुनिश्चित करना है कि पुलिस की निगरानी प्रणाली केवल वास्तविक और वर्तमान अपराधियों पर केंद्रित रहे। इससे न केवल जांच एवं खुफिया कार्य प्रणाली अधिक प्रभावी होगी, बल्कि पुलिस के डेटाबेस की सटीकता और पारदर्शिता भी बढ़ेगी।लखनऊ पुलिस का यह कदम कानून व्यवस्था की मजबूती और न्यायिक प्रक्रियाओं की पारदर्शिता को बढ़ाने वाला माना जा रहा है। इस अभियान से एक ओर जहां फर्जीवाड़े और भ्रम की स्थिति को रोका जा सकेगा, वहीं दूसरी ओर पुलिस कर्मियों का ध्यान उन अपराधियों की ओर केंद्रित हो सकेगा जो वर्तमान में समाज के लिए खतरा हैं।प्रदेश भर में चलाए जा रहे इस विशेष अभियान के तहत अन्य जनपदों में भी मृत हिस्ट्रीशीटरों के खाके नष्ट किए जा रहे हैं, जिससे पुलिस अभिलेखों की विश्वसनीयता में सुधार लाया जा सके। यह पहल आने वाले समय में अपराध पर नियंत्रण की रणनीतियों को और अधिक सटीक और प्रभावी बनाने में सहायक सिद्ध होगी।
