
सरल भाषा में समझिए:टैरिफ युद्ध एक आर्थिक संघर्ष है जिसमें प्रत्येक देश दूसरे के निर्यात पर अतिरिक्त कर लगाता है। टैरिफ युद्ध आमतौर पर तब शुरू होते हैं जब किसी देश का नेतृत्व किसी व्यापारिक साझेदार के व्यापारिक व्यवहार से नाखुश होता है या भू-राजनीतिक कारणों से ऐसा
होता है।
टैरिफ वार (Tariff War) एक तरह का व्यापारिक संघर्ष (Trade Conflict) होता है जिसमें देश एक-दूसरे के उत्पादों पर सीमा शुल्क (Import Duty या Tariff) बढ़ा देते हैं। इसका उद्देश्य अपने देश के उद्योगों को विदेशी प्रतिस्पर्धा से बचाना होता है, लेकिन इससे दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों में तनाव आ जाता है।
अब आइए भारत-अमेरिका टैरिफ वार को विस्तार से समझते हैं:
🔹 पृष्ठभूमि (Background):
भारत और अमेरिका के बीच टैरिफ से जुड़े विवाद 2018 से ज़्यादा उभरकर सामने आए, जब अमेरिका ने “America First” नीति अपनाई और कई देशों पर टैरिफ बढ़ा दिए, जिनमें भारत भी शामिल था।
🔹 मुख्य घटनाएं:
1. अमेरिका का स्टील और एल्युमिनियम पर टैरिफ (2018):
अमेरिका ने 2018 में भारत से आयात होने वाले स्टील पर 25% और एल्युमिनियम पर 10% टैरिफ लगा दिया।
इसका असर भारत के इन उत्पादों के निर्यात पर पड़ा।
2. भारत की प्रतिक्रिया (Retaliation):
भारत ने अमेरिका से आने वाले 28 उत्पादों पर प्रति-टैरिफ (Retaliatory Tariffs) लगाया। इनमें बादाम, अखरोट, सेब जैसी वस्तुएं शामिल थीं।
3. GSP (Generalized System of Preferences) का निलंबन (2019):
अमेरिका ने जून 2019 में भारत को GSP लाभ देना बंद कर दिया।
इसके अंतर्गत भारत के 2,000 से अधिक उत्पाद अमेरिका में बिना शुल्क के निर्यात किए जा सकते थे।
अमेरिका का आरोप था कि भारत “उचित और न्यायसंगत” बाजार पहुंच नहीं दे रहा।
🔹 भारत की स्थिति:
भारत का कहना था कि वह विकासशील देश है और GSP जैसी छूट उसके लिए जरूरी है।
भारत ने कहा कि वह अपने घरेलू बाजार और किसानों की रक्षा के लिए टैरिफ लगाता है।
🔹 प्रभाव (Impacts):
1. व्यापार पर असर:
दोनों देशों के बीच व्यापार में तनाव आया।
कृषि और मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र प्रभावित हुए।
2. उद्योगों पर प्रभाव:
अमेरिका से आयातित वस्तुएं महंगी हुईं।
भारत के कुछ उत्पाद अमेरिका में कम प्रतिस्पर्धी हो गए।
3. कूटनीतिक रिश्तों पर असर:
व्यापारिक संबंधों में खटास आई, लेकिन रणनीतिक रिश्ते मजबूत बने रहे।
🔹 हाल की स्थिति (2023-2025 तक):
दोनों देशों ने हाल के वर्षों में व्यापार तनाव को कम करने की कोशिश की है।
कुछ टैरिफ कम किए गए हैं, और व्यापारिक बातचीत फिर से शुरू हुई है।
भारत-अमेरिका रणनीतिक और तकनीकी साझेदारी को और बढ़ा रहे हैं।
निष्कर्ष:
भारत-अमेरिका टैरिफ वार एक आर्थिक संघर्ष था, जिसका कारण व्यापारिक असंतुलन और संरक्षणवाद (Protectionism) था। हालांकि इससे कुछ समय के लिए रिश्तों में तनाव आया, लेकिन दोनों देशों ने संवाद और समझौते के जरिए इसे संभालने की कोशिश की।