
चुनावी गड़बड़ी पर सुप्रीम कोर्ट ने उठाए बड़े सवाल!
Supreme Court ने चुनाव आयोग को एक बड़ा झटका दिया है। कोर्ट ने आयोग की कई प्रक्रियाओं पर सवाल उठाए और उनकी जवाबदेही पर चिंता जताई है। चुनाव आयोग पर आरोप हैं कि वह वोट खरीद-फरोख्त जैसे गड़बड़ियों को रोकने में नाकाम रहा है।
साथ ही सवाल उठ रहे हैं कि क्या प्रधानमंत्री मोदी और उनकी पार्टी भाजपा चुनावी जीत के लिए ऐसे ‘चुनावी पिंडदानपर भरोसा करती है या उनके जनसमर्थन पर?

कोर्ट ने चुनाव आयोग से पूछा कि आधार कार्ड स्वीकार करने वाले BLO को नोटिस कैसे जारी किया जाता है और क्या आयोग को इस बात की जानकारी है। जवाब में चुनाव आयोग के अधिकारी चुप रहे और कहा, “हमें पता नहीं।”
सीनियर वकील कपिल सिब्बल ने सवाल किया कि ऐसा कैसे हो सकता है कि आयोग को यह जानकारी न हो। इस जवाब ने आयोग की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

चुनावी पिंडदान’ यानी वोटों की खरीद-फरोख्त, दबाव और अवैध तरीकों से चुनाव प्रभावित करना। कोर्ट ने पूछा कि चुनाव आयोग के पास इसे रोकने के लिए क्या ठोस कदम हैं। आयोग ने माना कि संसाधन और कानून कम हैं, जिससे वे इस समस्या को पूरी तरह से नियंत्रित नहीं कर पा रहे हैं।

प्रधानमंत्री मोदी की लोकप्रियता के बावजूद आरोप लग रहे हैं कि भाजपा ने कुछ इलाकों में चुनाव में दबाव और ग़ैरकानूनी तरीकों का सहारा लिया है।
अगर चुनाव आयोग अपनी जवाबदेही नहीं बढ़ाता और ‘चुनावी पिंडदान’ जैसी समस्याओं को गंभीरता से नहीं लेता, तो यह सीधे लोकतंत्र पर असर डालेगा।
Supreme Court ने कहा है कि चुनाव प्रक्रिया पूरी पारदर्शिता और निष्पक्षता से होनी चाहिए। अब सबकी नजरें कोर्ट के अगले फैसलों पर टिकी हैं।
यह मामला देश के लोकतंत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण है और आगे भी इसकी गूंज सुनाई देगी।