
विकसित कृषि से विकसित उत्तर प्रदेश की दिशा में बड़ा कदम: उपकार स्थापना दिवस पर राष्ट्रीय संगोष्ठी में बोले मुख्यमंत्री योगी
विकसित कृषि से विकसित उत्तर प्रदेश की दिशा में बड़ा कदम: उपकार स्थापना दिवस पर राष्ट्रीय संगोष्ठी में बोले मुख्यमंत्री योगी
लखनऊ: उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद (उपकार) के 36वें स्थापना दिवस के अवसर पर मंगलवार को राजधानी लखनऊ स्थित भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान (आईएसआरआई) में एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी एवं कृषि वैज्ञानिक सम्मान समारोह का आयोजन भव्यता के साथ सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर “विकसित कृषि – विकसित उत्तर प्रदेश/2047” विषयक संगोष्ठी का शुभारंभ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया।मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि उपकार ने बीते 35 वर्षों में कृषि क्षेत्र में सराहनीय कार्य किए हैं। उत्तर प्रदेश देश का ऐसा राज्य है जहां कुल कृषि योग्य भूमि का 11 प्रतिशत हिस्सा है, लेकिन यहां 20 प्रतिशत तक खाद्यान्न उत्पादन हो रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य की उर्वर भूमि, सिंचाई व्यवस्था और वैज्ञानिक संसाधनों की बदौलत कृषि उत्पादन को तीन गुना तक बढ़ाया जा सकता है। उन्होंने कृषि अनुसंधान को खेतों तक पहुंचाने और किसानों को नई तकनीक से जोड़ने पर विशेमुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में वर्तमान में चार कृषि विश्वविद्यालय कार्यरत हैं और पांचवां स्थापना की प्रक्रिया में है। इसके अतिरिक्त, 89 कृषि विज्ञान केंद्र भी किसानों को तकनीकी सहायता प्रदान कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि विकसित भारत 2047 की कल्पना को साकार करने के लिए उत्तर प्रदेश को कृषि क्षेत्र में अग्रणी बनाना होगा। इसके लिए शॉर्ट टर्म, मीडियम टर्म और लॉन्ग टर्म योजनाओं को समन्वय के साथ लागू करना होगा। उन्होंने इजराइल सहयोग से स्थापित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस को विस्तार देने, जलवायु परिवर्तन से निपटने, उन्नत बीज व तकनीकी खेती को बढ़ावा देने की जरूरत बताई।कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने बताया कि वर्ष 2024-25 के खरीफ सीजन में प्रदेश में 14 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि आच्छादित हुई और 725 लाख मीट्रिक टन खाद्यान्न उत्पादन हुआ, जो कि एक नया रिकॉर्ड है। उन्होंने त्वरित मक्का कार्यक्रम के अंतर्गत 5 लाख हेक्टेयर में मक्का उत्पादन की जानकारी दी और गौ आधारित प्राकृतिक खेती समेत मुख्यमंत्री द्वारा स्वीकृत अनुसंधान परियोजनाओं की विशेष चर्चा की। साथ ही उन्होंने बताया कि उपकार की कार्यप्रणाली को और प्रभावी बनाने के लिए आचार्य नरेंद्र देव कृषि विश्वविद्यालय, अयोध्या के कुलपति डॉ. बिजेंद्र सिंह की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय समिति का गठन किया गया है।कार्यक्रम के अध्यक्ष कैप्टन विकास गुप्ता ने स्वागत भाषण में उपकार की उपलब्धियों को रेखांकित करते हुए इसे सांविधिक दर्जा दिए जाने की मांग उठाई। प्रमुख सचिव कृषि रविन्द्र कुमार और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली के उपमहानिदेशक डॉ. ए.के. सिंह की अध्यक्षता में हुए तकनीकी सत्र में बुंदेलखंड में कृषि संभावनाओं, प्राकृतिक खेती, एफपीओ की भूमिका और उद्यानिकी पर विशेषज्ञों ने अपने विचार रखे।मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर कृषि अनुसंधान और नवाचार में उत्कृष्ट कार्य करने वाले युवा वैज्ञानिकों को सम्मानित किया। इनमें चन्द्रशेखर आजाद कृषि विश्वविद्यालय, कानपुर के डॉ. राजेन्द्र कुमार यादव, वाराणसी के डॉ. राहुल कुमार सिंह, अयोध्या की डॉ. सुप्रिया, डॉ. अनुष्का पाण्डेय, डॉ. अंकुर त्रिपाठी, डॉ. अवधेश यादव, डॉ. आलोक सिंह तथा गोरखपुर विश्वविद्यालय के डॉ. राजर्षि कुमार गौड़ शामिल रहे। वहीं, कृषि मंत्री ने उपकार के पांच कर्मठ कर्मचारियों को प्रशस्तिपत्र देकर सम्मानित किया।इस अवसर पर उपकार द्वारा प्रकाशित शोध साहित्य का विमोचन भी किया गया। कार्यक्रम में उद्यान मंत्री दिनेश प्रताप सिंह, कृषि राज्य मंत्री बलदेव सिंह औलख, गौ सेवा आयोग अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता, मुख्यमंत्री के सलाहकार अवनीश अवस्थी, उपकार के महानिदेशक संजय सिंह, भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान के निदेशक डॉ. दिनेश सिंह, कृषि विश्वविद्यालयों और विज्ञान केंद्रों के वैज्ञानिक एवं एफपीओ प्रतिनिधि बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
