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सुल्तानपुर में उमड़ा जनसैलाब: “रोज़गार दो–सामाजिक न्याय दो” पदयात्रा में बदलाव की गूंज, संजय सिंह बोले—सुल्तानपुर की लड़ाई मेरी व्यक्तिगत लड़ाई

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सुल्तानपुर में उमड़ा जनसैलाब: “रोज़गार दो–सामाजिक न्याय दो” पदयात्रा में बदलाव की गूंज, संजय सिंह बोले—सुल्तानपुर की लड़ाई मेरी व्यक्तिगत लड़ाई

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में बेरोज़गारी, महँगाई और अन्याय के खिलाफ आम आदमी पार्टी की “रोज़गार दो–सामाजिक न्याय दो” पदयात्रा के चौथे दिन कूरेभार से कटका तक अभूतपूर्व जनसैलाब उमड़ पड़ा। हर गाँव, हर मोड़ पर लोगों की मौजूदगी ने साफ कर दिया कि प्रदेश की जनता बदलाव के लिए तैयार बैठी है। शुक्रवार रात जब यह पदयात्रा कूरेभार में विश्राम के लिए पहुँची, तो ठंड और अंधेरा भी लोगों के उत्साह को कम नहीं कर पाए। हजारों लोगों ने जिस गर्मजोशी से पदयात्रा का स्वागत किया, उसने यह संदेश स्पष्ट कर दिया कि आम आदमी पार्टी के प्रति जनता का भरोसा तेजी से बढ़ रहा है।पदयात्रा के दौरान कूरेभार में युवाओं ने सांसद संजय सिंह से मुलाकात कर रोजगार की समस्याओं को विस्तार से रखा और उन्हें सदन में मजबूती से उठाने की मांग की। इसी दौरान पटना चौराहे पर पिंकू सिंह और पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के पास आशा बहुओं ने भी संजय सिंह और पदयात्रा दल का जोरदार स्वागत किया। कूरेभार, गुफ्तारगंज, बाबूगंज और कटरा बाजार में भी स्थानीय लोगों ने उत्साह के साथ पदयात्रा में शामिल होकर सरकार के खिलाफ अपनी नाराजगी जाहिर की।पदयात्रा जब सुल्तानपुर की सीमा में प्रवेश करती है, तो सांसद संजय सिंह का दर्द साफ झलकता है। भावुक स्वर में उन्होंने कहा कि सुल्तानपुर उनका गृह जनपद है, और यहाँ की पीड़ा उनके लिए सिर्फ आंकड़ों की कहानी नहीं, बल्कि व्यक्तिगत दर्द है। उन्होंने कहा कि पिछले आठ वर्षों में जिले की बुनियादी सुविधाओं का हाल बद से बदतर हो चुका है। सड़कों की दशा पर उन्होंने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि सुल्तानपुर की सड़कें किसी जिले की नहीं, बल्कि भेदभाव की कहानी लगती हैं। इतने गड्ढे हैं कि गिनने बैठो तो एक साल कम पड़ जाए। रोजाना हादसों के भय में सफर करना यहाँ की मजबूरी बन चुका है।उन्होंने यह भी कहा कि बिजली की समस्या जिले की सबसे बड़ी चुनौतियों में से है। 24 घंटे में मुश्किल से 10 घंटे बिजली उपलब्ध हो पाती है, जिससे पढ़ाई, कारोबार और सामान्य जीवन सब प्रभावित हो रहा है। बिजली कटौती ने आम आदमी का जीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है।आशा बहुओं की समस्याओं पर संजय सिंह ने गहरी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि ये महिलाएँ उस समय लोगों की जान बचाने का काम करती हैं, जब कोई भी सहायता उपलब्ध नहीं होती। लेकिन इसके बावजूद इन्हें बेहद कम मानदेय दिया जाता है, जो सरासर अन्याय है। उन्होंने आश्वासन दिया कि आशा बहुओं की आवाज़ को सड़क से लेकर संसद तक पुरजोर तरीके से उठाया जाएगा।पदयात्रा के दौरान विभिन्न स्थानों पर वंशराज दुबे, सुरेश चंद्र, राकेश सिंह, कुलदीप यादव, रौनक सिंह, देवांश सिंह, बृजेश सिंह और रामशंकर गौतम सहित कई स्थानीय लोगों ने इस आंदोलन का समर्थन करते हुए पदयात्रा दल का स्वागत किया।
सुल्तानपुर की स्वास्थ्य व्यवस्था पर हमला बोलते हुए संजय सिंह ने कहा कि जिला अस्पताल से लेकर सीएचसी तक दवाई, जांच और डॉक्टरों की भारी कमी है। लोगों को बीमारी से ज्यादा सिस्टम से लड़ना पड़ रहा है। उन्होंने राजकीय मेडिकल कॉलेज की उस घटना का भी उल्लेख किया जिसमें एक्स-रे रिपोर्ट “कागज पर” दे देने से पूरे प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खुल गई थी।पेपर लीक और युवाओं की बेरोज़गारी पर संजय सिंह ने कहा कि पिछले 8 वर्षों में उत्तर प्रदेश में एक भी शिक्षक भर्ती पूरी नहीं हो पाई। UPTET, पुलिस भर्ती, RO/ARO जैसी सभी परीक्षाएं पेपर लीक की भेंट चढ़ गईं। भ्रष्टाचार और लापरवाही के कारण परीक्षाएं रद्द होती रहीं और युवाओं के सपनों को हर बार धोखा मिला। उन्होंने कहा कि पेपर लीक अब उत्तर प्रदेश की पहचान बन चुका है और यह साबित करता है कि भर्ती प्रणाली चरमरा गई है।उन्होंने कहा कि जब पदयात्रा सुल्तानपुर पहुँची तो हजारों लोग बेरोज़गारी और अन्याय के खिलाफ अपनी आवाज़ लेकर इस आंदोलन से जुड़ गए। संजय सिंह ने स्पष्ट कहा कि “सुल्तानपुर की लड़ाई मेरी व्यक्तिगत लड़ाई है, और मैं जनता के हक़ के लिए इस संघर्ष को जारी रखूंगा।”

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