
मिर्जापुर के गाँवों में खुलेगा ग्रामीण पर्यटन का नया द्वार, पहले चरण में आठ गांव होंगे विकसित
मिर्जापुर,लखनऊ: उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक राजधानी माने जाने वाले मिर्जापुर में अब ग्रामीण पर्यटन को एक नई पहचान मिलने जा रही है। अपनी आध्यात्मिक आभा और प्राकृतिक सौंदर्य के लिए विख्यात यह क्षेत्र अब पर्यटन विभाग की एक महत्वाकांक्षी योजना के माध्यम से देश-विदेश के पर्यटकों को गाँवों की ओर आकर्षित करने को तैयार है। योजना का उद्देश्य न सिर्फ ग्रामीण आर्थिकी को सशक्त करना है, बल्कि प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक पटल पर स्थापित करना भी है।पर्यटन विभाग द्वारा शुरू की गई इस योजना के तहत मिर्जापुर, सोनभद्र और भदोही जिलों के चुनिंदा गाँवों को ग्रामीण और कृषि पर्यटन के केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। इस योजना को पांच चरणों में लागू किया जाएगा, जिसके पहले चरण में आठ गाँवों का चयन किया गया है। इन गाँवों में स्थानीय जीवनशैली, संस्कृति, हस्तशिल्प और पारंपरिक आजीविका को पर्यटन के माध्यम से उभारा जाएगा।पर्यटन और संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने जानकारी देते हुए कहा कि “यह पहल केवल पर्यटन नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण सांस्कृतिक पुनर्जागरण का प्रयास है। हम गाँवों को आत्मनिर्भर बनाना चाहते हैं, ताकि वहाँ के लोग अपनी परंपराओं और संसाधनों के माध्यम से रोजगार प्राप्त कर सकें।”योजना के अनुसार, प्रत्येक गाँव में एक स्थानीय समन्वयक नियुक्त किया जाएगा जिसे राज्य और जिला स्तरीय टीमों का सहयोग मिलेगा। इन टीमों में पर्यटन, संस्कृति और ग्रामीण विकास के विशेषज्ञ शामिल होंगे। इन गाँवों में कम से कम चार आधुनिक होमस्टे तैयार किए जाएंगे, जिनमें साफ-सुथरे कमरे, स्वच्छ शौचालय, इंटरनेट, डिजिटल पेमेंट, पीओएस मशीन और क्यूआर कोड जैसी सुविधाएं होंगी, ताकि आने वाले पर्यटकों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।इन गाँवों में पारंपरिक हस्तशिल्प, जैसे जरी-जरदोजी कढ़ाई, मूनज घास से बने उत्पाद, लकड़ी के खिलौने और ODOP (वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट) से जुड़े उत्पादों को विशेष स्थान दिया जाएगा। गाँवों में इन उत्पादों के लिए विशेष दुकानें खोली जाएंगी और उन्हें डिजिटल भुगतान के अनुकूल बनाया जाएगा, जिससे शिल्पियों को सीधे लाभ मिलेगा।योजना में सोशल मीडिया की भूमिका भी अहम होगी। प्रत्येक गाँव के लिए अलग-अलग सोशल मीडिया अकाउंट बनाए जाएंगे जहां फ़ोटो, वीडियो और रील्स के माध्यम से वहाँ की सांस्कृतिक विविधता, लोकगीत, लोकनृत्य, भोजन और पर्यावरणीय खूबसूरती को विश्वभर में प्रचारित किया जाएगा।इसके अतिरिक्त, प्रत्येक तिमाही में प्रशिक्षण शिविर, जागरूकता कार्यक्रम और पर्यटक सम्मेलनों का आयोजन किया जाएगा, ताकि स्थानीय समुदाय की भागीदारी निरंतर बनी रहे और गाँव की पहचान एक पर्यटन केंद्र के रूप में मजबूत हो सके। राष्ट्रीय और स्थानीय टूर ऑपरेटरों के साथ साझेदारी कर इन गाँवों को टूरिज्म सर्किट में जोड़ा जाएगा।योजना की सफलता की कहानियाँ वृत्तचित्रों के रूप में तैयार कर हिंदी और अंग्रेजी भाषाओं में प्रस्तुत की जाएंगी, जिससे यह मॉडल अन्य जिलों और राज्यों के लिए भी प्रेरणा बन सके। यह पहल मिर्जापुर के ग्रामीण क्षेत्रों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है, जो स्थानीय जीवन को समृद्ध करने के साथ-साथ उत्तर प्रदेश को पर्यटन के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों तक ले जाने की दिशा में अग्रसर है।
